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UP Assistant Professor Recruitment: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बड़ा खुलासा: 35-35 लाख में हुआ था सौदा, रसूखदार अधिकारी जांच के घेरे में

UP Assistant Professor Recruitment: उत्तरप्रदेश । असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार और धांधली की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे सबूतों के अनुसार, इस भर्ती परीक्षा में सीटों का सौदा पहले ही हो चुका था।

UP Assistant Professor Recruitment: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बड़ा खुलासा: 35-35 लाख में हुआ था सौदा, रसूखदार अधिकारी जांच के घेरे में
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By Madhu Sharma

UP Assistant Professor Recruitment: उत्तरप्रदेश । असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार और धांधली की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे सबूतों के अनुसार, इस भर्ती परीक्षा में सीटों का सौदा पहले ही हो चुका था। बताया जा रहा है कि एक-एक अभ्यर्थी से पास कराने के नाम पर 35-35 लाख रुपये की भारी-भरकम डील की गई थी। इस खुलासे के बाद शिक्षा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

​नेटवर्क में कई बड़े अधिकारियों के नाम

​जांच का दायरा केवल बिचौलियों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग के कई उच्चाधिकारी भी अब जांच के दायरे में आ गए हैं। संदेह जताया जा रहा है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक या अंकों की हेराफेरी संभव नहीं थी। जांच एजेंसी अब उन फोन कॉल्स और बैंक ट्रांजेक्शनों को खंगाल रही है, जो इन अधिकारियों और दलालों के बीच हुए थे।

​डील का तरीका: एडवांस और फाइनल पेमेंट

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सौदा दो किस्तों में तय हुआ था। अभ्यर्थियों से कुछ लाख रुपये 'टोकन मनी' के तौर पर पहले लिए गए थे, जबकि बाकी की राशि चयन सूची में नाम आने के बाद दी जानी थी। जांच टीम उन अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इन दलालों से संपर्क किया था।

​प्रमुख बिंदु:

  • ​रेट कार्ड: प्रत्येक सीट के लिए 35 लाख रुपये की मांग।
  • ​मिलीभगत: चयन प्रक्रिया से जुड़े कई अधिकारियों पर संदेह की सुई।
  • ​बड़ी कार्रवाई की तैयारी: जल्द ही कुछ बड़े नामों की गिरफ्तारी संभव।

​अभ्यर्थियों में आक्रोश

​इस खुलासे के बाद सालों से मेहनत कर रहे योग्य उम्मीदवारों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच की मांग तेज हो गई है। युवाओं का कहना है कि अगर ईमानदारी से मेहनत करने वालों के बजाय पैसों के दम पर नियुक्तियां होंगी, तो शिक्षा का स्तर पूरी तरह गिर जाएगा।

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