UGC New Regulations Row: ‘UGC को काला कानून’ बताकर BJP किसान मोर्चा नेता का इस्तीफा, PM मोदी को लिखा पत्र हुआ वायरल

नई दिल्ली/रायबरेली। UGC के नए समानता विनियम 2026 को लेकर विवाद अब सियासी रंग लेने लगा है। भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा से जुड़े रायबरेली के नेता श्याम सुंदर त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। PM को लिखे पत्र में उन्होंने UGC के नए नियमों को “काला कानून” बताया है।
पत्र में क्या लिखा है?
25 जनवरी 2026 को लिखे इस पत्र में श्याम सुंदर त्रिपाठी ने कहा है कि वे “सवर्ण जाति के बच्चों के विरुद्ध लाए गए UGC जैसे काले कानून” के विरोध में अपने पद से त्यागपत्र दे रहे हैं। पत्र के मुताबिक उनका आरोप है कि ये नियम समाज में असंतुलन और विभाजन पैदा कर सकते हैं और इससे विश्वविद्यालय परिसरों का माहौल खराब होगा। पत्र में यह भी लिखा है कि सरकार से उन्हें उम्मीद थी कि वह सभी वर्गों के लिए समानता सुनिश्चित करेगी लेकिन मौजूदा प्रावधान उस दिशा में नहीं जाते दिख रहे।
UGC New Regulations 2026 पर क्यों बढ़ रहा विरोध?
UGC ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में समान अवसर केंद्र बनाने और SC-ST के साथ OBC को भी जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया है। यहीं से विवाद शुरू हुआ है। एक वर्ग का मानना है कि इससे वंचित छात्रों को सुरक्षा मिलेगी, जबकि दूसरा पक्ष इसे सामान्य वर्ग के खिलाफ मान रहा है।
BJP के भीतर असहजता?
श्याम सुंदर त्रिपाठी का पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर #ShameOnUGC जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। पार्टी से जुड़े एक नेता का सार्वजनिक तौर पर इस्तीफा देना यह इशारा देता है कि UGC नियमों को लेकर BJP के भीतर भी असहजता बढ़ रही है, खासकर उत्तर भारत के सवर्ण मतदाता वर्ग में।
क्या हैं सियासी मायने ?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह मामला सिर्फ शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रहेगा। अगर ऐसे और पत्र या इस्तीफे सामने आते हैं, तो UGC के नए नियम आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि वह समानता और सामाजिक संतुलन दोनों के बीच भरोसे का रास्ता कैसे निकाले।
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