कानपुर : कार में आखिरी सफर और फिर पटरी पर लाशें : उस रात पिता-पुत्री के साथ क्या हुआ था?
Kanpur Father Daughter Suicide : कानपुर में घरेलू कलह के बीच एक पिता अपनी 14 साल की मासूम बेटी के साथ ट्रेन के आगे कूद गया. सोमवार रात जब पटरी पर दोनों के क्षत-विक्षत शव मिले, इस दर्दनाक हादसे की वजह से तेजस एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को करीब आधे घंटे तक जंगल में ही खड़ा रहना पड़ा. बगल में खड़ी सफेद कार और मृतक की कमर में बंधी चाबियां उस आखिरी सफर की गवाही दे रही थीं, जो मौत के साथ खत्म हो गई.

कानपुर : कार में आखिरी सफर और फिर पटरी पर लाशें : उस रात पिता-पुत्री के साथ क्या हुआ था?
Kanpur Father Daughter Suicide : कानपुर : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में सोमवार की रात एक बड़ी घटना सामने आई है. कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर एक पिता और उसकी 14 वर्षीय मासूम बेटी के क्षत-विक्षत शव रेलवे ट्रैक पर मिलने से सनसनी फैल गई. बताया जा रहा है कि पारिवारिक विवाद से तंग आकर पिता ने अपनी बेटी के साथ चलती मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली. इस दर्दनाक हादसे की वजह से रेल यातायात भी प्रभावित हुआ और तेजस समेत कई वीआईपी ट्रेनें काफी देर तक खड़ी रहीं.
विवाद के बाद बेटी को लेकर घर से निकला था पिता
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान कानपुर के कल्याणपुर निवासी विकास गुप्ता और उनकी 13-14 वर्षीय बेटी वेदिका के रूप में हुई है. विकास हाल ही में गंगाघाट थाना क्षेत्र के सहजनी इलाके में रह रहे थे. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि विकास का अपनी पत्नी डॉली से पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था, जिसके कारण डॉली अपने मायके में रह रही थी. सोमवार को भी पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी. इसी विवाद के बाद विकास गुस्से में अपनी बेटी को कार में लेकर घर से निकल गया और सहजनी रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचकर यह आत्मघाती कदम उठा लिया.
आधे घंटे तक खड़ी रही तेजस एक्सप्रेस
हादसा इतना भीषण था कि शव रेलवे ट्रैक पर बिखर गए. रात करीब 9 बजे जब गेटमैन ने पटरी पर शव देखे, तो तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर और पुलिस को दी. चूंकि शव ट्रैक पर ही पड़े थे, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली से लखनऊ जा रही तेजस एक्सप्रेस को करीब 33 मिनट तक रोकना पड़ा. इसके साथ ही गोमती एक्सप्रेस और अन्य ट्रेनों की रफ्तार भी धीमी कर दी गई. पुलिस और जीआरपी की टीम ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक साफ कराया, तब जाकर रेल यातायात सुचारू हो सका.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल
घटनास्थल के पास ही मृतक की सफेद रंग की कार खड़ी मिली थी. चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक की कमर में ही कार की चाबी बंधी थी और कार के भीतर मोबाइल और पर्स भी मौजूद थे. इसके बावजूद पुलिस को शवों की शिनाख्त करने में करीब 4 घंटे का समय लग गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने मोबाइल और कार के रिकॉर्ड से पहचान करने में देरी की. पुलिस का तर्क था कि नेटवर्क की समस्या और एप न चलने की वजह से कार मालिक का पता लगाने में समय लगा.
जांच में जुटी पुलिस
गंगाघाट थाना पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में मामला घरेलू विवाद के कारण की गई आत्महत्या का लग रहा है. विकास की पत्नी डॉली जैसे ही थाने पहुंची, पति और बेटी की मौत की खबर सुनकर बेसुध हो गई. पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के अलावा अन्य पहलुओं पर भी जांच की जा रही है ताकि मौत की सही वजह साफ हो सके.
झारखंड के हजारीबाग जिले में जुलाई 2018 में आया था ऐसा ही एक मामला
यह घटना झारखंड के हजारीबाग जिले में जुलाई 2018 में घटी थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. नरेश माहेश्वरी नाम के एक शख्स ने भारी कर्ज और आर्थिक तंगी से तंग आकर अपने ही परिवार के 6 लोगों के साथ मौत का रास्ता चुन लिया. उसने अपने बूढ़े माता-पिता और पत्नी को पहले जहर दिया, फिर अपनी मासूम बेटियों के साथ घर की छत से छलांग लगा दी. घर के अंदर मिले एक सुसाइड नोट में उसने सिर्फ इतना लिखा था कि कर्ज ने उसे इस कदर तोड़ दिया है कि अब मौत के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.
इस दर्दनाक कांड का सबसे खौफनाक पहलू यह था कि एक हसंता-खेलता परिवार रातों-रात खत्म हो गया. पुलिस को मौके से खून से सने कपड़े और बिखरा हुआ सामान मिला था. आस-पड़ोस के लोग इस बात से हैरान थे कि जिस पिता को अपनी बेटियों से इतना प्यार था, वह आखिर इतना पत्थरदिल कैसे हो गया कि उसने अपनी लाड़लियों की जान ले ली.
