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UPSC- आधे लोग भी नहीं बैठे परीक्षा में, अफसर भी हैरान, क्या घट रहा सिविल सेवा का क्रेज, क्या कहते हैं एक्सपर्ट

UPSC- आधे लोग भी नहीं बैठे परीक्षा में, अफसर भी हैरान, क्या घट रहा सिविल सेवा का क्रेज, क्या कहते हैं एक्सपर्ट
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By NPG News

रायपुर, 12 अक्टूबर 2021। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल सर्विसेस की प्रारम्भिक परीक्षा का आयोजन रविवार को किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि रायपुर और बिलासपुर में बनाए गए दो शहरों के केंद्रों में आधे लोग ही शामिल हुए। इस बात से अफसर भी हैरान हैं कि आखिर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में युवाओं का क्रेज कैसे कम हो रहा है।
छत्तीसगढ़ में यूपीएससी के लिए रायपुर में 39 परीक्षा केंद्र और बिलासपुर में 24 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां दो पालियों में परीक्षा सम्पन्न हुई। सुबह 9.30 से 11.30 की प्रथम पाली में सामान्य अध्ययन, वहीं 2.30 से 4.30 की दूसरी पाली में एप्टीट्यूड टेस्ट की परीक्षा (सीसेट) का आयोजन किया गया। बिलासपुर में परीक्षा के लिए संयुक्त कलेक्टर एआर टण्डन और रायपुर में एडिशनल कलेक्टर पद्मिनी भोई को नोडल अधिकारी बनाया गया था। सभी परीक्षा केंद्र के लिए अलग से प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए गए थे। रायपुर में 14304 में से 6868 परीक्षार्थियों ने किस्मत आजमाई। बिलासपुर में 8073 परीक्षार्थियों को सेंटर अलॉट किया गया था पर दोनों पालियों में सिर्फ 3979 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। दोनों ही शहरों में सिर्फ 50 फीसदी अभ्यर्थियों के शामिल होने पर बहस छिड़ गई है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों से यह ट्रेंड चल रहा है। उड़ान आईएएस अकेडमी के डायरेक्टर अंकित अग्रवाल के मुताबिक पूरे देश में यह ट्रेंड है। जितने अभ्यर्थी फॉर्म सबमिट करते हैं, औसतन उसके आधे ही परीक्षा में शामिल होते हैं। इसकी एक बड़ी वजह युवाओं में अटेम्प्ट बचाने की कोशिश भी है। परीक्षा से पहले अभ्यर्थी जब यह देखते हैं कि तैयारी नहीं हुई है तो वे परीक्षा में शामिल नहीं होते, क्योंकि कमजोर तैयारी में परीक्षा दिलाने का मतलब है, एक अटेम्प्ट खराब करना। यह पहली बार शामिल हो रहे अभ्यर्थियों से लेकर अंतिम मौके से पहले तक के अभ्यर्थियों पर लागू होता है। यही वजह है कि साल दर साल परीक्षा में औसत 50% शामिल होने का ट्रेंड बना हुआ है।

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