UPSC के अभ्यर्थियों को नहीं दिया जाएगा एक्स्ट्रा चांस…….सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा…25 जनवरी को होगी अब अगली सुनवाई

नयी दिल्ली 22 जनवरी 2021। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को कहा कि वह पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में शामिल नहीं होने से अपना आखिरी मौका गंवा देने वाले अभ्यर्थियों को एक और अवसर देने के पक्ष में नहीं है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर के नेतृत्व वाली पीठ ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू के निवेदन का संज्ञान लिया कि सरकार कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में सिविल सेवा अभ्यर्थियों को एक और अवसर देने को तैयार नहीं है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा, ”हम एक और अवसर देने को तैयार नहीं है। मुझे हलफनामा दाखिल करने का समय दीजिए। कल (बृहस्पतिवार) रात मुझे निर्देश मिला है कि हम इस पर तैयार नहीं हैं।”

25 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी थे। पीठ ने सिविल सेवा की अभ्यर्थी रचना की याचिका को 25 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया है और केंद्र से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया था कि सिविल सर्विसेज के कोविड-19 प्रभावित  उम्मीदवारों को सरकार एक और मौका देने पर विचार कर रही है। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को वर्ष 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त मौका पाने की उम्मीद थी।

गौरतलब है कि यूपीएससी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) , भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) समेत की तरह की सिविल सेवओं के लिए अधिकारियों का चयन करने के लिए प्रतिवर्ष तीन चरणों में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित कराती है। इस भर्ती परीक्षा में हर साल करीब 8 लाख युवा बैठते हैं। वर्तमान में इस भर्ती परीक्षा के लिए आयु की न्यूनतम सीमा 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष तय की हुई है। एससी, एसटी वर्ग के उम्मीदवारों का पांच वर्ष और ओबीसी को तीन वर्ष की छूट है। किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएट व्यक्ति इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

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