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आदिवासी राष्ट्रपतिः छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुईया उइके हो सकती हैं भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति, रामनाथ कोविंद अगले साल होंगे रिटायर, सात महीने बाद शुरू हो जाएगी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

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रायपुर/नई दिल्ली, 4 अगस्त 2021। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का चार साल पूरा हो गया हैं। उनके कार्यकाल अब एक साल से भी कम समय बचा है। अगले साल मार्च से राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। जून में चुनाव होगा। और 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ होगा।
भारत के आजाद होने के बाद अभी तक 14 राष्ट्रपति हुए हैं। इनमें से दो दलित राष्ट्रपति हुए हैं और एक मुस्लिम। 97 में केआर नारायणन पहले दलित राष्ट्रपति बने थे। उनके बाद 2017 में मोदी सरकार ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्राध्यक्ष के पद पर बिठाया। देश में एक बड़ी आबादी होने के बाद भी अभी तक किसी आदिवासी को राष्ट्रपति बनने का मौका नहीं मिला है।
2017 में झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनाने की खबर वायरल हुई थी। याद होगा, राष्ट्रीय मीडिया के सुर्खियो में रही। लोग लगभग मान चुके थे कि प्रणब मुखर्जी के बाद भारत का पहला आदिवासी राष्ट्रपति बनने जा रहा है। लेकिन, मोदी सरकार ने अचानक बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद का नाम आगे बढ़ा चौंका दिया था। इसके साथ ही आदिवासी राष्ट्रपति की दावेदारी खतम हो गई थी।
अब चूकि अगले साल राष्ट्रपति का चुनाव है। सो, नए राष्ट्रपति के नामों की अटकलें शुरू हो गई हैं। इनमें एक प्रमुख नाम छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुईया उइके का भी है। अनसुईया उइके की दावेदारी इसलिए अहम मानी जा रही हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेहद नजदीक हैं। राज्यपाल जब भी दिल्ली जाती हैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ के संदर्भ में चर्चा जरूर करती है। शायद ही किसी राज्यपाल को प्रधानमंत्री या शीर्ष नेताओं से मिलने का इतना टाईम मिल पाता है। कोरोना की स्थितियों से निबटने में राज्यपाल ने अपनी तरफ से क्या-क्या प्रयास किया, इसका बुकलेट पिछले प्रवास में राज्यपाल ने प्रधानमंत्री को सौंपा था। ये सब बातें अनसुईया के पक्ष में जाती हैं।
अनसुईया उइके मध्यप्रदेश से आती हैं। छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनने के बाद जनता से संवाद कायम करने उन्होंने कई कदम उठाई है। खासकर, राजभवन से आम आदमी की दुरियां सिमट गई हैं। वहीं, आदिवासियों के विकास के लिए वे सतत प्रयत्नशील रहती हैं। अनुसईया आदिवासी होने के साथ ही महिला भी हैं। उन्हें देश के इस शीर्ष पर बिठाने से दो वर्गां को साधा जा सकेगा। पहला आदिवासी और दूसरा, महिला। अभी तक एक महिला राष्ट्रपति हुई हैं। प्रतिभा पाटिल। अनसुईया को फायदा ये मिलेगा कि इस समय आदिवासी वर्ग में इस पद पर बिठाने के लिए भाजपा के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है। उपर से महिला। द्रौपदी मुर्मू राज्यपाल से हट चुकी हैं। वे अब गृह राज्य उड़ीसा चली गई हैं। उनके अलावा आदिवासी समुदाय में और कोई महिला का फेस नहीं है। अनसुईया को सरकार में रहने का अनुभव भी है। मध्यप्रदेश में मंत्री रह चुकी हैं। राज्यपाल पद पर भी दो साल हो गया है। अगले साल तक तीन साल हो जाएगा। दिल्ली में जैसी चर्चा है, सब कुछ ठीक रहा तो अनसुईया उइके शीर्ष कुर्सी तक पहुंच सकती हैं।

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