Saif al-Islam Gaddafi death: सैफ़ अल-इस्लाम गद्दाफी की गोली मारकर हत्या, राष्ट्रपति चुनाव की कर रहे थे तैयारी, जानिए ग़द्दाफ़ी बेटे की पूरी कहानी
Saif al-Islam Gaddafi death: लीबिया के पूर्व नेता कर्नल मुअम्मर ग़द्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी की गोली मारकर हत्याकर दी गई है। लीबियाई न्यूज़ एजेंसी ने यह जानकारी उनकी टीम के प्रमुख के हवाले से दी है।

Saif al-Islam Gaddafi death: लीबिया के पूर्व तानाशाह कर्नल मुअम्मर अल-ग़द्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी की गोली मारकर हत्याकर दी गई है। यह जानकारी लीबियाई न्यूज़ एजेंसी ने उनकी टीम के प्रमुख के हवाले से दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक सैफ़ अल-इस्लाम के वकील ने एएफ़पी (AFP) को बताया कि चार लोगों की ने ज़िंतान शहर में उनके घर पर हमला किया और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। अभी यह साफ़ नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे कौन लोग थे और इसका मक़सद क्या था?
बहन का अलग दावा
सैफ़ अल-इस्लाम की बहन ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए लीबियाई टीवी चैनल को बताया कि उनके भाई की मौत ज़िंतान में नहीं, बल्कि लीबिया-अल्जीरिया सीमा के पास हुई। इन दो अलग-अलग बयानों की वजह से सैफ़ अल-इस्लाम की मौत की सरकमस्टान्सेस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
ग़द्दाफ़ी शासन में अहम भूमिका
1972 में जन्मे सैफ़ अल-इस्लाम को लंबे समय तक अपने पिता का उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। 2000 के बाद उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ लीबिया के रिश्ते सुधारने में अहम भूमिका निभाई थी। इन्हीं प्रयासों के तहत उन समझौतों पर बातचीत हुई जिनके बाद लीबिया ने अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ दिया था।
हालांकि 2011 में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने में बड़ी भूमिका निभाने के आरोप भी उन पर लगे। उनके पिता की मौत के बाद सैफ़ अल-इस्लाम को ज़िंतान की एक मिलिशिया ने करीब छह साल तक हिरासत में रखा था।
मौत की सज़ा और अंतरराष्ट्रीय मामला
2015 में लीबिया की एक अदालत ने उन्हें मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों का दोषी ठहराते हुए उनकी अनुपस्थिति में मौत की सज़ा सुनाई थी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय भी 2011 की घटनाओं को लेकर उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाना चाहता था।
राजनीति में वापसी की कोशिश
सैफ़ अल-इस्लाम ने हमेशा कहा था कि वे अपने पिता से सत्ता विरासत में नहीं लेना चाहते। इसके बावजूद 2021 में उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का ऐलान किया था हालांकि ये चुनाव बाद में अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए।
