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Satta King Law India: भारत में जुआ कानून, सजा, धाराएं, ऑनलाइन सट्टा और जुआ अधिनियम की पूरी जानकारी

Satta King Law India: जानिए भारत में Public Gambling Act 1867 क्या है, सट्टेबाज़ी पर क्या सज़ा है, कौन-से जुए कानूनी हैं और ऑनलाइन सट्टा पर क्या कानून लागू होता है।

Satta King Law India: भारत में जुआ कानून, सजा, धाराएं, ऑनलाइन सट्टा और जुआ अधिनियम की पूरी जानकारी
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By Ragib Asim

Satta King Law India: भारत में जुआ जिसे आम बोलचाल में सट्टा या दांव कहा जाता है हमेशा विवादों और चर्चाओं का टॉपिक रहा है। लोग तेज़ी से पैसा कमाने के लिए संपत्ति या नकद को दांव पर लगाते हैं लेकिन अक्सर यह आदत लत और नशे में बदल जाती है और व्यक्ति को आर्थिक संकट, कर्ज और अपराध की ओर धकेल देती है।

जुआ क्या होता है
जुआ (Gambling) ऐसा कार्य है जिसमें व्यक्ति किस्मत आज़माने के लिए किसी परिणाम पर पैसा लगाता है। मिसाल के तौर पर ताश पर दांव लगाना, क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाना, या लॉटरी टिकट खरीदना। अगर अनुमान सही हुआ तो जीत वरना पूरा नुकसान। भारत में कुछ जुए कानूनी हैं जबकि अधिकांश राज्यों में ग़ैरकानूनी माने जाते हैं।
कानूनी जुआ (Legal Gambling)
भारत में कुछ गतिविधियों को “स्किल आधारित” या लाइसेंस प्राप्त होने के कारण कानूनी मान्यता मिली है:
घोड़ों की दौड़ पर सट्टा: इसे Skill-based माना गया है।
राज्य लॉटरी: महाराष्ट्र, सिक्किम, केरल जैसे राज्यों में सरकारी लॉटरी वैध है।
कैसीनो: गोवा और सिक्किम में सख्त नियमों के साथ अनुमति है।
फैंटेसी स्पोर्ट्स / रमी / पोकर: सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें कौशल आधारित खेल माना है।
ग़ैरकानूनी जुआ (Illegal Gambling)
Public Gambling Act, 1867 के तहत ये सभी गतिविधियां अपराध की श्रेणी में आती हैं:
सार्वजनिक स्थानों पर ताश या अन्य जुआ खेलना।
क्रिकेट, फुटबॉल या किसी खेल पर सट्टेबाज़ी करना।
बिना लाइसेंस वाली निजी लॉटरी चलाना या खरीदना।
बिना अनुमति के ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म चलाना।
सार्वजनिक जुआ अधिनियम (1867) के मुख्य प्रावधान
जुआ घरों पर प्रतिबंध: बिना लाइसेंस के चलने वाले Gambling House अपराध हैं।
भाग्य आधारित खेलों की परिभाषा: Luck पर आधारित सभी गेम इस अधिनियम में आते हैं; Skill games बाहर रखे गए हैं।
सजा:
जुआ घर चलाने पर ₹500 तक जुर्माना या 6 महीने की जेल।
जुआ खेलते पकड़े जाने पर ₹200 तक जुर्माना या 3 महीने की जेल।
पुलिस अधिकार: बिना वारंट के छापा, गिरफ्तारी और सामान ज़ब्त करने का अधिकार।
राज्यों की स्वतंत्रता: प्रत्येक राज्य अपने कानून बना सकता है।
धाराएं और सज़ाएं (BNS 2023 के अनुसार)
धारा 297: बिना अनुमति के लॉटरी चलाना — 6 महीने की जेल या जुर्माना या दोनों।
धारा 318: धोखाधड़ी से संपत्ति प्राप्त करना (सट्टेबाज़ी के ज़रिए) — 7 साल तक की जेल।
धारा 3(6): समूह में अवैध जुआ चलाने पर सामूहिक अपराध का प्रावधान।
ऑनलाइन सट्टा और आईटी एक्ट 2000
डिजिटल युग में सट्टा ऑनलाइन रूप ले चुका है।
आईटी एक्ट 2000 के तहत सरकार अवैध सट्टा साइटों को ब्लॉक कर सकती है।
ऑनलाइन सट्टेबाज़ी में पकड़े गए लोगों पर साइबर अपराध के तहत कार्रवाई होती है।
राज्यवार स्थिति:
सिक्किम, नागालैंड: कुछ शर्तों के साथ ऑनलाइन सट्टेबाज़ी वैध।
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना: पूर्ण प्रतिबंध और जेल प्रावधान।
सजा और जमानत व्यवस्था
सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने पर पहली बार ₹200 जुर्माना या 3 महीने की कैद (जमानती)।
घर में अवैध सट्टा चलाने पर मालिक को ₹500 जुर्माना या 6 महीने की कैद (कुछ मामलों में गैर-जमानती)।
समूह या संगठित सट्टा चलाने पर 2 साल तक की जेल तक सज़ा हो सकती है।
अगर कोई जुए की लत में फंस जाए
किसी मनोवैज्ञानिक या एडिक्शन-काउंसलर से संपर्क करें।
आर्थिक नुकसान का मूल्यांकन करें और बजट नियंत्रण बनाएं।
सट्टा खेलने वाले माहौल और समूह से दूरी रखें।
सभी ऑनलाइन खातों और ऐप्स को बंद करें।
कानूनी उलझन में हों तो तुरंत वकील से सलाह लें।
भारत में जुए और सट्टेबाज़ी पर क़ानून सख़्त हैं। सरकार इन्हें Luck based illegal games की श्रेणी में रखती है क्योंकि ये आर्थिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाते हैं। कानूनी लॉटरी या कौशल आधारित खेल को छोड़कर हर तरह का सट्टा अपराध की श्रेणी में आता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। NPG.News किसी भी तरह की सट्टेबाज़ी, जुए या अवैध गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देता। सट्टेबाज़ी में शामिल होना कानूनन अपराध है और इससे दूर रहना ही समझदारी है।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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