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Child Sexual Abuse Case: 9 साल की बच्ची प्रेग्नेंट मिली, आरोपी निकला 11 साल का सगा भाई; महिला अधिकारी ने सुनाई घटना, हर कोई रह गया सन्न

Child Sexual Abuse Case: महिला अधिकारी ने एक केस का जिक्र किया जिसमें 9 साल की बच्ची प्रेग्नेंट मिली और आरोपी उसका 11 साल का सगा भाई निकला। POCSO कानून, जागरूकता और बच्चों की सुरक्षा पर फिर बहस तेज।

Child Sexual Abuse Case: 9 साल की बच्ची प्रेग्नेंट मिली, आरोपी निकला 11 साल का सगा भाई; महिला अधिकारी ने सुनाई घटना, हर कोई रह गया सन्न
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By Ragib Asim

Child Sexual Abuse Case: भारत में नाबालिगों के साथ यौन शोषण के मामलों की बढ़ती संख्या के बीच एक ऐसा केस सामने आया है जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। एक महिला अधिकारी ने ऐसी घटना का जिक्र किया जिसमें 9 साल की बच्ची प्रेग्नेंट पाई गई यही नहीं जांच में आरोपी उसका 11 साल का सगा भाई निकला।

घटना ने क्यों बढ़ाई चिंता?
महिला अधिकारी के मुताबिक बच्ची की गर्भावस्था 8वें महीने तक पहुंच गई थी लेकिन हैरानी की बात है कि घर के किसी सदस्य को खासतौर पर मां को भी इसका अंदाजा तक नहीं हुआ। असल बात ये है कि इतनी छोटी उम्र में प्रेग्नेंट होना सिर्फ एक मेडिकल इमरजेंसी नहीं बल्कि बहुत बड़ा क्राइम और सिस्टम फेलियर भी है। क्योंकि बच्चा
महिला अधिकारी ने क्या बताया?
महिला अधिकारी ने बताया कि मामला जब पुलिस तक पहुंचा फिर बच्ची की काउंसलिंग हुई। इलाज कराया गया और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने ये भी दुख के साथ कहा कि कई बार परिवार शर्म और डर में इतना उलझ जाता है कि बच्चा सबसे ज्यादा अकेला पड़ जाता है। कई मामलों में पीड़ित बच्चा भावनात्मक रूप से टूट जाता है क्योंकि उसे सबसे पहले अपने ही लोगों से सहारे की उम्मीद होती है।
9 साल की बच्ची के लिए प्रेग्नेंसी कितना बड़ा खतरा?
डॉक्टर्स के मुताबिक इतनी कम उम्र में गर्भावस्था बेहद खतरनाक होती है शरीर पूरी तरह विकसित नहीं होता, खून की कमी, संक्रमण और ऑपरेशन का खतरा, मानसिक ट्रॉमा और आगे की पूरी जिंदगी पर असर इसका बुरा असर पड़ता है।
POCSO और कानून क्या कहता है?
भारत में बच्चों के यौन शोषण से सुरक्षा के लिए POCSO Act बनाया गया है। इसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ किसी भी तरह का यौन अपराध गंभीर अपराध माना जाता है। लेकिन यहां मामला अलग है क्योंकि आरोपी भी नाबालिग है। ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर प्रक्रिया Juvenile Justice Act के तहत चलती है और ोिस्का मक़सद सजा से ज्यादा सुधार (reform) पर होता है।


बच्चे कई बार घर में ही सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं
अब सोचिए अगर घर में ही बच्चा सुरक्षित नहीं तो बाहर की दुनिया से कैसे बचाया जाएगा? इसलिए एक्सपर्ट्स लगातार कहते हैं बच्चों को Good Touch–Bad Touch समझाना जरूरी है, उनके व्यवहार में बदलाव, डर, चुप्पी, घबराहट को गंभीरता से लें, शरीर में बदलाव को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है, बच्चों को भरोसा दें कि बताने पर डांट नहीं पड़ेगी।
कहां लें मदद?
अगर परिवार में या आसपास ऐसा कोई शक भी हो तो चुप रहना सबसे बड़ा अपराध है।
Childline 1098
Women Helpline 181
नजदीकी पुलिस स्टेशन / महिला थाना
स्कूल काउंसलर / भरोसेमंद डॉक्टर
ये घटना इस बात की चेतावनी है कि बच्चों के लिए सुरक्षा सिर्फ बाहर नहीं घर के भीतर भी करनी होगी। कानून मौजूद है पुलिस मौजूद है लेकिन सबसे पहले काम शुरू होता है पैरेंट्स की सतर्कता और बच्चों से खुली बातचीत से।

Ragib Asim

Ragib Asim News Editor, NPG News Ragib Asim is the News Editor at NPG News with over 15 years of experience across print, television, and digital journalism. He began his career with Hindustan in 2011 and has worked with Jain TV, TV One, NewsTrack, Special Coverage, Janjwar, and The Hans India. He studied Mass Communication at Jamia Millia Islamia, holds a Master’s degree in Political Science from the University of Delhi, and has pursued Islamic Studies at Nadwatul Ulama. Ragib is proficient in Urdu, Hindi, Arabic, and English. His reporting and editorial work focuses on politics, geopolitics, current affairs, crime, business, technology, education, automobiles, and careers, with a strong specialization in SEO-, AEO-, and GEO-driven news strategy. Contact: [email protected]

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