…इस लेडी IPS ने बनाया मुरीद…..12 घंटे की ड्यूटी के बाद जरूरतमंदों के लिए तलती है पूरियां, बनाती है खाना ….इनकी पुलिस रसोई की चर्चा हो रही है हर जगह

रायपुर 22 जून 2020। कोरोना संकट में पूरी दुनिया कराह रही है…तो इस संकट में कई लोग फरिश्ता बनकर सामने भी आये हैं। इसी कड़ी में IPS सरोज कुमारी की कोशिशें भी खूब तारीफ बटोर रही है। गुजरात कैडर की IPS सरोज कुमारी इस संकट में जरूरतमंदों के लिए ‘पुलिस रसोई शुरू की है। इस पुलिस रसोई से प्रदेश में हर दिन 1200 लोगों का पेट भर रहा है। वह पहले 12 घंटे ड्यूटी करती हैं, इसके बाद अपनी पुलिस रसोई में डेली पूड़ियां बेलती और सेंकती नजर आती हैं। उनके साथ करीब 50 महिला पुलिसकर्मी इस काम में मदद करती हैं।

गुजरात के वडोदरा में डीसीपी (एडमिन हेडक्वार्टर) सरोज कुमारी ने बताया कि 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन में हमें महसूस हुआ कि वडोदरा में कच्ची बस्ती, सड़क किनारे और ओवर ब्रिज के नीचे रहने वाले कई लोगों के सामने पेट भरने की समस्या आ गई थी। कोई भी व्यक्ति भूख से नहीं मरे इसके लिए ‘पुलिस रसोई’ शुरू करने का फैसला लिया। सरोज कुमारी ने वुमन सेल की सात महिला कांस्टेबल, एसआई आदि के साथ चर्चा की।

राजस्थान के झुंझुनू जिले के चिड़ावा तहसील के एक छोटे से गांव बुडानिया की आईपीएस सरोज कुमारी रहने वाली हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ाई करके आईपीएस बन कर उन्होंने मिसाल पेश की थी। आईपीएस सरोज कुमारी ने जो पुलिस रसोई शुरू करके भूखों व जरूरतमंदों को भोजन कराने का यह कदम उठाया है, उनके जिले झुंझुनू में भी इसकी जमकर सराहना की जा रही है।एसपी सरोज कुमारी की छवि आरंभ में लेडी सिंघम के तौर पर बनी थी। जब वे बोटाद की एसपी थीं तो उस दौरान उन्होंने न केवल सेक्स वर्कर्स की जिंदगी को संवारने का काम किया, बल्कि जिले में जो गिरोह फिरौती वसूली कर रहे थे, उन्हें सलाखों के पीछे भी उन्होंने पहुंचा दिया।

वुमन सेल के हेल्प लाइन नंबर समेत पुलिस कंट्रोल रूम में भी लोग फोन करके भोजन की जरूरत के बारे में सूचना देते थे, जिन्हें भोजन उपलब्ध करवाते थे। इसके लिए 12 जगह चिहिन्त कर रखी थी। इन जगहों पर पुलिस की गाड़ी पहुंचने पर लोग हाथों में बर्तन लिए भोजन का इंतजार करते मिलते थे। पुलिस की यह रसोई अप्रेल से लेकर 11 जून 2020 तक चली है। अब अनलॉक-1 की शुरुआत होने पर लोग अपने स्तर पर ही भोजन की व्यवस्था करने में सक्षम हो गए हैं।

आईपीएस सरोज कुमारी ने बताया कि पुलिस रसोई का पूरा भोजन खुद महिला पुलिसकर्मी ही तैयार करती थी। कभी पूड़ी सब्जी, रोटी, कड़ी, दाल, चावल आदि बनाते थे। पुलिस अधिकारियों के बाद आमजन भी पुलिस की इस पहल से जुड़ गए। हर किसी ने राशन सामग्री उपलब्ध करवाई, जिससे भोजन के पैकेट तैयार किए गए।

 

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