इस एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस ने लखीमपुर हिंसा की आग को ठंडा करने में निभाई अहम भूमिका, किसान नेता राकेश टिकैत को इस तरह इश्यू न बनाने के लिए किया राजी

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2021। लखीमपुर में हुई हिंसा के मामले में उत्तरप्रदेश कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अफसर अजयपाल सिंह का नाम एक बार फिर चर्चा में है। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले इस स्मार्ट आईपीएस अफसर का नाम के साथ कई विवाद भी जुडे़ हैं। लेकिन, लखीमपुर कांड में उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत को जिस तरह हैंडिल किया, उससे सरकार का उन पर भरोसा बढ़ गया है।
ज्ञातव्य है, घटना की खबर मिलते ही राकेश टिकैत लखीमपुर के लिए रवाना हो गए थे। टिकैत पर कांग्रेस समर्थित किसान नेता होने के आरोप लगते हैं। वे केंद्र सरकार समेत भाजपा पर हमले करने से चूकते भी नहीं। लिहाजा, टिकैत जब लखीमपुर के लिए रवाना हुए तो सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों को लगा कि मामला बिगड़ सकता है। लेकिन, कुछ अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी कि टिकैत को अगर रोका गया तो किसान और उत्तेजित हो जाएंगे।
राकेश टिकैत के पश्चिम यूपी क्षेत्र में पहले तैनात रहे कई अधिकारियों के साथ अच्छे संबंधों की बात सामने आई। बताया जाता है कि आईपीएस अजयपाल शर्मा को आगे किया गया। उनके राकेश टिकैत के साथ अच्छे संबंध हैं। अजयपाल शर्मा जब नोएडा में एसएसपी थे तब से उनकी राकेश टिकैत के साथ अच्छी बनती है। ऐसे में उन्होंने मोर्चा संभाला। टिकैत 3 अक्टूबर की रात खीरी पहुंचे। अजयपाल शर्मा को भी यहां भेजा गया। बताया जा रहा है कि राकेश टिकैत और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका अजयपाल शर्मा ने भी निभाई, जो इन दिनों यूपी की ’डायल 112’ में तैनात हैं।सेवा में तैनात हैं। उन्हें वहां उनके पिछले संपर्कों को देखते हुए लखीमपुर भेज दिया गया था।
जानकारों का मानना है कि अजय पाल शर्मा जैसे आईपीएस नहीं होते, तो मामला बिगड़ सकता था। लेकिन, राकेश टिकैत आश्चर्यजनक तौर पर इस मामले को सुलगाने की बजाए मामले को ठंडा करने में ज्यादा सक्रिय दिखे। दो किसानों के परिवारों ने जब शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया तो टिकैत ने ही उन्हें समझा कर अंत्येष्टि करवाई।
