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आईएएस की तीन देवियां

तरकश, 19 सितंबर 2021 आईएएस में तीन देवियां हैं….तीनों छत्तीसगढ़ कैडर की हैं लेकिन उनका ट्रेक रिकार्ड से लगता है वे डेपुटेशन पर छत्तीसगढ़ आती हैं और फिर बॉय-बॉय कर लौट जाती हैं। एक तो राज्य बनने के बाद पहली बार बड़ी मशक्कत के बाद 2014 में रायपुर आईं। इसके बाद एक साल हायर एजुकेशन […]

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आईएएस की तीन देवियां
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तरकश, 19 सितंबर 2021

आईएएस में तीन देवियां हैं….तीनों छत्तीसगढ़ कैडर की हैं लेकिन उनका ट्रेक रिकार्ड से लगता है वे डेपुटेशन पर छत्तीसगढ़ आती हैं और फिर बॉय-बॉय कर लौट जाती हैं। एक तो राज्य बनने के बाद पहली बार बड़ी मशक्कत के बाद 2014 में रायपुर आईं। इसके बाद एक साल हायर एजुकेशन के नाम पर विदेश में रहीं। और अब फिर छत्तीसगढ़ को बॉय-बॉय। दूसरी देवी…राज्य बनने के दो-एक साल बाद दिल्ली चली गईं थीं। चूकि प्रोफाइल में एक बार कलेक्टर लिखा जाए, इसलिए छह महीने की कलेक्टरी करने के लिए लौटीं। बीजेपी सरकार ने उनके छत्तीसगढ़ आने से पहले ही कलेक्टर का आदेश निकाल दिया था। वे छह महीने की कलेक्टरी कर फिर दिल्ली चली गईं। 2016 में वे फिर छत्तीसगढ़ आईं और अभी फिर कहीं बाहर हैं, इस बारे में जीएडी बता सकता है। तीसरी देवी राज्य बनने के 15 साल बाद छत्तीसगढ़ आई थीं और पिछले साल दिल्ली लौट गईं। इसके आगे नो कमेंट्स।

रिकार्ड ट्रांसफर

राज्य बनने के बाद इतनी बड़ी संख्या में कभी ट्रांसफर नहीं हुए होंगे, जितना बड़ा 12 सितंबर की शाम हुआ। हालांकि, लिस्ट की चर्चा दोपहर में शुरू हो गई थी। लेकिन, रविवार होने के कारण लोगों को यकीं नहीं हुआ। लेकिन, सात बजते-बजते 21 आईएएस की लिस्ट निकली। फिर सरगुजा आईजी समेत पांच आईपीएस। और आधी रात से पहले 96 राज्य प्रशासनिक अधिकारियों को बदल दिया गया। 96 राप्रसे अफसरों में से ज्यादतर तीन साल वाले थे, जिनका ट्रांसफर लंबे समय से पेंडिंग था।

अहम जिम्मेदारी

डॉ0 कमलप्रीत सिंह को पिछले फेरबदल में फूड और ट्रांसपोर्ट लेकर स्कूल एजुकेशन का सिकरेट्री बनाया गया तो लोग चौंके थे। लेकिन, इस बार सरकार ने न केवल उन्हें सिकरेट्री एग्रीकल्चर बनाया है। साथ ही एपीसी का अहम दायित्व भी। स्कूल एजुकेशन भी उनके पास बना रहेगा। जीएडी का आईएएस शाखा भी। डीलडौल से भी पंजाबी कमलप्रीत के कंधे पर सरकार ने अब बड़ी जिम्मेदारी दे दी हैं। खेती-किसानी भी और बच्चों की शिक्षा भी। बता दें, 2002 बैच के आईएएस कमलप्रीत भारत सरकार में ज्वाइंट सिकरेट्री इम्पेनल हो चुके हैं। सरकार ने 97 बैच की एम गीता को जरूर एपीसी बना दिया था लेकिन, एसीएस लेवल से नीचे दीगर राज्यों में यह पद मिलता नहीं। ऐसे में, कमलप्रीत का प्रोफाइल ही स्ट्रांग होगा। हेल्थ, फूड, स्कूल शिक्षा, एग्रीकल्चर में भले ही बाकी चीजें ज्यादा नहीं है, लेकिन सोशल सेक्टर के इन विभागों को करने से भारत सरकार में वेटेज मिलता है।

बड़ा विभाग

लंबे समय से हांसिये पर चल रहे 2006 बैच के आईएएस भूवनेश यादव का कद इस पोस्टिंग में बढ़ा है। सरकार ने उन्हें उच्च शिक्षा के विशेष सचिव का स्वतंत्र प्रभार के साथ ही बीज विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया है। सिकरेट्री टू सीएम सिद्धार्थ कोमल परदेसी को भी पीडब्लूडी के साथ अब माईनिंग मिल गया है। सिकरेट्री टू सीएम का पद है ही। ये दोनों अहम विभाग राज्य बनने के बाद सिर्फ एक बार सुबोध िंसंह के पास रहा। सुबोध के पास माईनिंग पहिले से था, 2018 की शुरूआत में पीडब्लूडी भी मिल गया था। राजेश राणा का भी काफी समय से ठीक-ठाक नहीं चल रहा था। अब एमडी पाठ्य पुस्तक निगम बनाया गया है। नरेंद्र दुग्गे को भी संचालक समग्र शिक्षा मिला है। आश्चर्यजनक तौर पर आर प्रसन्ना, एलेक्स पाल मेनन और जूनियर में अभिजीत सिंह पिच पर जम नहीं पा रहे। प्रसन्ना से पंचायत भी ले लिया गया। याने उनके पास बचा कौशल विकास। एलेक्स को भी प्रशासन एकेडमी। और छह महीने में कलेक्टरी से वापिस बुलाए गए अभिजीत को पाठ्य पुस्तक से विदा कर सीएलआर और मुद्रण का जिम्मा दिया गया है।

नाराजगी नहीं?

रायपुर एसएसपी अजय यादव को सरकार ने आधी रात को हटाया तो यह सवाल उठा कि सरकार आखिर नाराज क्यों हो गई राजधानी के कप्तान से। लेकिन, हफ्ते भर के भीतर उन्हें सरगुजा का प्रभारी आईजी अपाइंट करने से साफ हो गया कि अजय से नाराजगी जैसी बात नहीं होगी। क्योंकि, सरकार नाराज होती है तो फिर बिना आईजी बनें रेंज का प्रभार थोड़े देती। नाराजगी का मतलब होता है पीएचक्यू में बिना विभाग की पोस्टिंग।

रमेश बैस भी!

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने इस्तीफा दे दिया है। उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की खबर है। बेबी रानी के इस्तीफा से त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस के समर्थक एक बार फिर आशान्वित हो गए हैं। वो इसलिए कि राज्यपाल बनने के बाद ऐसा नहीं कि पालिटिकल कैरियर खतम हो गया। अर्जुन सिंह जैसे कुछेक नाम है, जो राज्यपाल बनने के बाद फिर सक्रिय राजनीति में आए और चमके भी। रही बात रमेश बैस की तो वे रायपुर से सात बार सांसद रह चुके हैं। 2003 के विधानसभा चुनाव से पहले वे केंद्रीय राज्य मंत्री थे। प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए पहले उनसे ही पूछा गया था। उनकी अनिच्छा के बाद रमन सिंह को छत्तीसगढ़ भेजा गया। और वे 15 साल मुख्यमंत्री रहे। रमन सिंह की पहली पारी में ये खबर हमेशा चर्चा में रही कि बैसजी कभी भी कमान संभाल सकते हैं। सरकार के खिलाफ बैस काफी मुखर भी रहे। लेकिन, बात बनी नहीं। बेबी रानी के बाद अब बैस के समर्थकों को उम्मीद बंध गई है कि भाजपा के इस शीर्ष कुर्मी नेता को एक बार सूबे में फिर किस्मत आजमाने का मौका मिल सकता है।

हफ्ते का व्हाट्सएप

मन चाहा पति पाने के लिए हरतालिका तीज, करवा चौथ, सावन सोमवार, शिवरात्रि व्रत और मनचाही पत्नी पाने के लिए यूपीएससी, पीएससी, एसएससी, व्यापम, रेलवे आदि…ईश्वर ये बहुत नाइंसाफी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. भिलाई नगर निगम के आईएएस कमिश्नर ऋतुराज रघुवंशी को आरडीए का सीईओ क्यों बना दिया गया?
2. इस खबर में कितनी सत्यता है कि दो-तीन कलेक्टरों की लिस्ट निकल सकती है?

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