ऋचा और अमित जोगी के नामंकन पर लटकी तलवार…अमित बोले….“जनता की अदालत अंतिम और सबसे बड़ी, देश संविधान और विधि से चलता है”

मरवाही, 16 अक्टूबर 2020। नामांकन भरने के पहले भावनाओं की लहरों में उफान लाने की लगातार जारी कवायद करते हुए सुबह पिता की समाधि पर माँ रेणु जोगी और पत्नी ऋचा जोगी के साथ पहुँच कर अमित जोगी ने प्रणाम किया, समाधि की मिट्टी माथे पर लगाई और कलेक्ट्रेट नामांकन दाखिल करने पहुँच गए। नामांकन दाखिल होने के दौरान अमित और जोगी परिवार का आमना सामना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस प्रत्याशी से भी हुआ।
नामांकन दाखिल के बाद अमित जोगी वापस लौट गए। अमित ने खुद का और अपनी पत्नी ऋचा जोगी का नामांकन दाखिल किया। …..बिग ब्रेकिंग : अमित के आरोपों पर CM भूपेश का जवाब…. मरवाही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट….चुनाव वही लड़ेगा जिसके बाद सर्टिफिकेट होगा, ऐसे ही कोई चुनाव थोड़े लड़ेगा….अमित ने लगाया था राज्य सरकार पर ये आरोपइसे सीधे तौर पर अभी कोई नहीं कह रहा है, लेकिन सियासत के भीतरखाने यह चर्चा सार्वजनिक है कि अमित और ऋचा के नामांकन पर तलवार लटकी हुई है। जातीय मामलों की वजह से नामंकन खारिज किया जा सकता है। ऋचा के जाति प्रमाण पत्र को कल निलंबित किया गया है, संकेत हैं कि अमित जोगी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी राज्य सरकार ने अहम निर्णय लेकर उसे क्रियान्वित कर दिया है। हालाँकि इस की कोई पुष्टि पंक्तियों के लिखे जाने तक नहीं है।

नामांकन खारिज होने की आशंकाओं के बीच अमित जोगी ने कहा “कुश्ती अकेले तो लड़ी नहीं जाती, अकेले भला अखाड़े में कौन हाथ पाँव हिलाएगा और खुद से खुद को विजेता साबित करता है.. पर ऐसी ही हास्यास्पद स्थिति के संकेत दिए जा रहे हैं.. मेरा दृढ़ विश्वास जनता की अदालत पर है.. जो सबसे बड़ी है.. हमारा देश संविधान और विधि द्वारा स्थापित व्यवस्था से चलता है, मुझे यकीं है हमारा प्रदेश इससे अलग नहीं है..और मूल बात यह है कि मरवाही मेरा घर है, मुझे चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिशें हो सकती हैं लेकिन मुझे मेरे घर से.. मरवाही के दिल से अलग कैसे करेंगे..”

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