मंत्रियों के ग्रह-नक्षत्र

संजय के. दीक्षित
तरकश, 10 मई 2020
पंचायत और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के राजधानी स्थित सरकारी बंगले में शार्ट सर्किट से आग लग गई। घटना के दौरान मंत्री घर पर ही थे। गनीमत है कि दिन का समय था, लिहाजा बंगले का स्टाफ तुरंत हरकत में आ गया। और, कल नगरीय प्रशासन एवं श्रम मंत्री शिवकुमार डहरिया के सरकारी आवास पर बिजली गिर गई। 8 मई को शाम बारिश, आंधी के बीच जिस जगह पर बिजली गिरी, उससे 50 कदम पर मंत्री डहरिया अपने आफिस में बैठे थे। बिजली का प्रभाव इतना ज्यादा था कि मंत्री के घर का एसी, टीवी जैसे इलेक्ट्रानिक सामान खराब हो गए। बहरहाल, हफ्ते भर में दो-दो मंत्रियों के यहां इस तरह की घटनाएं…। लगता है, ग्रह-नक्षत्र की शांति के लिए इन्हें यज्ञ आदि कुछ करना चाहिए।

भूपेश की वर्किंग टीम

फरवरी में सीएम के विदेश जाने के पहिले से कलेक्टरों के ट्रांसफर की अटकलें चल रही हैं। मगर किसी-न-किसी वजह से लिस्ट रुक जा रही थी। अब खबर है, बाहर से आने वाले मजदूरों के सेटलमेंट के बाद कलेक्टरों के ट्रांसफर पर सरकार मुहर लगा देगी। क्योंकि, कोरोना अब लंबा चलने वाला है, इसे लगभग सभी ने मान लिया है। बहरहाल, अबकी जो कलेक्टरों की लिस्ट निकलेगी, वही सीएम की असली वर्किंग टीम होगी। अब योजनाओं के क्रियान्वयन का समय आ गया है। पिछली बार सरकार ने शपथ लेने के तुरंत बाद 21 कलेक्टरों को बदला था। लेकिन, तब पिछली सरकार के कई दुखी, पीड़ित अफसर रो-गाकर कलेक्टर बनने में कामयाब हो गए थे। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं होगा। सुना है, सरकार इस बार ठोक-बजाकर फैसला लेगी। कुछ नाम तो तय भी किए जा चुके हैं।

2008 बैच तक क्लोज?

छत्तीसगढ़ में 2012 बैच के चार आईएएस अभी तक कलेक्टर नहीं बन पाए हैं। जबकि, दूसरे कई राज्यों में 2012 बैच के अफसर दो-दो जिला कर चुके हैं। उधर, 2011, 2012 बैच के पदोन्नत आईएएस में से भी कुछ को कलेक्टर बनाना होगा। लिहाजा, सरकार कलेक्टर के लिए 2008 बैच तक क्लोज करने पर विचार कर रही है। हालांकि, इसमें अड़चन यह है कि बड़े जिलों के लिए अनुभवी अधिकारी चाहिए। कम-से-कम रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के लिए। अभी 2004 बैच के संजय अलंग बिलासपुर के कलेक्टर हैं। वे सिकरेट्री रैंक में आ चुके हैं। इसके बाद 2006 बैच के भारतीदासन और अंकित आनंद रायपुर तथा दुर्ग, 2007 बैच के यशवंत कुमार रायगढ़ और 2008 बैच की शिखा राजपूत गौरेला, पेंड्रा की कलेक्टर हैं। इनमें से कुछ कलेक्टरों का पारफारमेंस भी बढ़ियां हैं। लेकिन, सरकार ने अगर 2008 बैच तक क्लोज करने का निर्णय ले लिया तो इन पांचों अफसरों को राजधानी लौटना पड़ेगा। यही नहीं, 2007, 2008 बैचों के और दावेदारों को भी इससे धक्का लगेगा।

सिकरेट्री लेवल पर चेंजेस

कलेक्टरों के साथ सिकरेट्री की भी एक छोटी लिस्ट निकलेगी। संजय अलंग जैसे सीनियर कलेक्टर मंत्रालय लौटेंगे, तो उन्हें कोई-न-कोई विभाग मिलेगा ही। हालांकि, निहारिका बारिक सिंह को छोड़कर सारे सिकरेट्री के विभाग एक-एक, दो-दो बार बदल चुके हैं। निहारिका पहली सिकरेट्री होंगी, जो रमन सरकार में भी हेल्थ सिकरेट्री रहीं और इस सरकार में भी। मगर कोरोना के दौरान उनका विभाग बदलेगा, ऐसा प्रतीत नहीं होता।

आईपीएस प्रमोशन

डीजी के प्रमोशन में तकनीकी पेंच लग गया है, उससे लगता है अभी उनकी डीपीसी नहीं होगी। लेकिन, खबर है बाकी एसपी, डीआईजी, आईजी के प्रमोशन की तैयारी गृह विभाग ने कर ली है। किसी भी दिन मंत्रालय में इन पदों के लिए डीपीसी हो सकती है। इसमें आईजी प्रदीप गुप्ता आईजी से एडीजी, डीआईजी टीआर पैकरा डीआईजी से आईजी, बीएस ध्रुव, आरएन दास, मयंक श्रीवास्तव और टी एक्का डीआईजी प्रमोट होंगे।

सीएम जब मुस्कराए

सीएम हाउस में वन विभाग की समीक्षा बैठक चल रही थी। सीएम भूपेश बघेल ने पीसीसीएफ से पूछा, इस बार कितने पौधे लगाओगे। पीसीसीएफ ने कहा, सात करोड़। सीएम ने फिर पूछा, पिछले साल कितने लगाए गए थे, जवाब मिला…सात करोड। और, उसके पिछले साल…? सात करोड़। सात करोड़ की जादुई संख्या सुनकर सीएम मुस्करा दिए। बोले…इतने में तो छत्तीसगढ़ की एक इंच जमीन भी नहीं बची होती। इसके बाद वे गंभीर हुए। और फिर फॉरेस्ट अफसरों को बड़ा टास्क दिया। बोले, इस तरह पौधारोपण किया जाए कि मैं भी देख सकूं…लोग भी देख सकें कि वन विभाग प्लांटेशन किया है। छत्तीसगढ़ में जितने हाईवे हैं, अबकी बरसात में उसके दोनों ओर तीन-तीन लाईन में पौधे लगाए जाएं। सीएम ने बैठक में मौजूद चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल से कहा कि वे इसे कोआर्डिनेट करें। रिव्यू में यह भी तय हुआ कि इसमें जरा सी भी ढिलाई हुई तो संबंधित इलाके के डीएफओ और सीसीएफ जिम्मेदार होंगे। याने लघु वनोपज में बढ़ियां रिजल्ट देने वाले पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी को अब प्लांटेशन की चुनौती मिल गई है।

बोरा से वैर या चूक?

सरकार ने बाहर फंसे लोगों को छत्तीसगढ़ लाने के लिए तीन आईएएस अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया है। लेबर सिकरेट्री सोनमणि बोरा, पीडब्लूडी सिकरेट्री सिद्धार्थ परदेशी और ईरीगेशन सिकरेट्री अविनाश चंपावत को। इसमें दिलचस्प यह हुआ कि मंत्रालय से परदेशी और चंपावत के जो मोबाइल नम्बर जारी हुए, वो उनके स्टाफ अफिसर के थे, मगर बोरा का पर्सनल नम्बर रिलीज हो गया। जैसे ही ये नम्बर मूव हुए कि बोरा को दे दनादन फोन, व्हाट्सएप कॉल, व्हाट्सएप मैसेज…। पहले से ही लेबर इश्यू हैंडिल कर रहे बोरा का व्हाट्सएप नम्बर इसके कारण डेढ़ दिन तक हैंग रहा। बोरा को पता लगाना चाहिए कि उनका पर्सनल नम्बर चूकवश जारी हुआ या किसी ने उनसे वैर भंजा ली।

अंत में दो सवाल आपसे

1. लॉकडाउन में एक जिले के एसपी…महिला पुलिस अधिकारी…गेस्ट हाउस और शराब की खबर आ रही है। इसमें कितनी सच्चाई है?
2. पेंड्रा, गौरेला मरवाही अलग हो जाने के बाद भी कलेक्टरी के लिए सबसे अधिक डिमांड बिलासपुर की क्यों है?

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