कलेक्टर पर जब राज्यपाल अनसुईया उइके हुई नाराज, बरसात में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष का मकान तोड़ने पर जांच करने का दिया आदेश…बोलीं, अतिक्रमण हटाते मानवीय दृष्टिकोण रखें

कलेक्टर पर जब राज्यपाल अनसुईया उइके हुई नाराज, बरसात में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष का मकान तोड़ने पर जांच करने का दिया आदेश…बोलीं, अतिक्रमण हटाते मानवीय दृष्टिकोण रखें
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रायपुर, 17 जुलाई 2020। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कांकेर जिले के पखांजुर विकासखंड में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष असीम राय के मकान को बिना नोटिस के तोड़े जाने पर नाराजगी जाहिर की और उन्होंने पीड़ित पक्ष को शासन से जांच कराने का आश्वासन दिया है। राज्यपाल ने इस संबंध में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

राज्यपाल ने कांकेर के जिला कलेक्टर से दूरभाष में चर्चा कर इस विषय की जानकारी ली और कहा कि वर्तमान में बरसात का समय है। ऐसे में पर्याप्त समय दिए बिना किसी भी व्यक्ति के मकान को तोड़ा जाना उचित नहीं है। मुझे बताया गया कि श्री राय दिव्यांग है और उनकी पुत्री भी कैंसर बीमारी से ग्रस्त हैं। उनके साथ तथा अन्य प्रकरणों में भी अतिक्रमण हटाते समय मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए कार्यवाही की जानी चाहिए। शासन को कोई भी कार्यवाही करते समय सामने वाले पक्ष को सुनने का पर्याप्त समय देना चाहिए और सभी पहलुओं का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जाना चाहिए।

राज्यपाल से आज राजभवन में नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, सांसद लोकसभा मोहन मंडावी, पूर्व विधायक सुमित्रा मरकोले ने पीड़ित पक्ष पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष असीम राय के साथ मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को बताया कि प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुल्डोजर चलाकर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्री राय के मकान को तोड़ दिया है। जबकि इस मामले में एक दिन पूर्व ही नोटिस दिया गया था और पर्याप्त समय दिये बिना ही उस दिन ही रात 10 बजे अतिक्रमण हटाने का नोटिस दे दिया और अगले दिन दोपहर ही प्रशासन ने अतिक्रमण हटा दिया। इसके साथ ही कांकेर नगर में पुराने बस स्टैण्ड में सड़क बनाने के नाम पर वर्षों से व्यवसाय कर रहे व्यापारियों की दुकान पर बुल्डोजर चलाने की तैयारी की जा रही है। जबकि इसी तरह के दूसरे मामले में अवैध कब्जा होने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी नियमों को ताक पर रखकर सड़क की ऊंचाइयां मकानों की नीव से ऊपर निर्माण करवाया जा रहा है, जबकि उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ में एक मामले में रोक भी लगाई है। प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल से न्याय दिलाने का आग्रह किया है।

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