टूरिज्म का नया स्पॉट बन गया राजधानी का बुढ़ातालाब…. फ्लोटिंग डेक से लेकर बोटिंग तक बड़े और बच्चों को कर रहे हैं आकर्षित…. जिला प्रशासन की पहल और निगम व स्मार्ट सिटी की कोशिशों से बुढ़ातालाब की तस्वीर और तकदीर संवर गयी

रायपुर 31 दिसम्बर 2020। दुधिया रोशनी में राजधानी का बुढ़ातालाब इन दिनों बेपनाह खुबसूरती बिखेर रहा है। मदमाती हवाओं का सर्द झोंका…पानी में अठखेलियां करती मछलियां…बलखाती पानी की लहरें और उस पर जगमग करती बिजली की लरियां। स्मार्ट सिटी ने तो गुमनाम हो गये बुढ़ा तालाब की तो तकदीर और तस्वीर पूरी ही बदल दी है। नगर निगम रायपुर व रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की तरफ से मनोरंजन औैर पर्यटन के नजरिये से संवारे गये बुढ़ातालाब को राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को समर्पित किया गया।

राज्यपाल अनुसुईया उइके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया बूढ़ा तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का ई-लोकार्पण....मुख्यमंत्री ने नौका विहार कर ...

खुद प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने जब बुढ़ातालाब की इन रंगनियों को देखा तो वो भी इसके मुरीद हो गये। महापौर एजाज ढेबर, कलेक्टर एस भारतीदासन और निगम कमिश्नर सौरव कुमार के साथ जिला पंचायत सीईओ गौरव सिंह ने इस बुढ़ातालाब के जीर्णोद्धार के काम की सतत निगरानी की, तो वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और तत्कालीन मुख्य सचिव आरपी मंडल ने भी इस काम की लगातार समीक्षा की।

विश्व का दूसरा बड़ा फाउंटेन

बूढ़ातालाब-विवेकानंद सरोवर की खूबसूरती में चार-चांद लगा रहा है। तालाब के किनारे नव-निर्मित संरचना से स्वामी विवेकानंद जी की विशाल प्रतिमा तक पहुंचने के लिए तैयार किया गया फ्लोटिंग डेक ‘जल सेतु‘ का अहसास कराता हैं। आकर्षक प्रवेश द्वार, दो स्तरीय पाथवें, म्यूजिकल फाउंटेन, टबल फाउंटेन, आकर्षक लैंड स्केपिंग और जगमगाती रोशनी से तालाब की खूबसूरती का आनंद रायपुरवासियों के साथ देश भर से पहुंचने वाले पर्यटक ले सकते हैं।

बूढ़ा तालाब-स्वामी विवेकानंद सरोवर अपने लोकार्पण के साथ ही सभी को आकर्षित करेगी। बच्चों से लेकर बड़े सभी यहां सुकून महसूस करेंगे। बच्चों के लिए बनाए गए चिल्ड्रन पार्क में उनकी जरूरतों को विशेष ध्यान रखा गया है। बच्चे यहां भरपूर मनोरंजन करेंगे। साथ ही शहर के नागरिकों के लिए ओपन जिम के उपकरण भी लगाए गए हैं। जहां वे अपना शरीर को तंदुरुस्त रख सकते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को ट्रैफिक की समस्या का सामना न करना पड़े, इसलिए यहां बेहतर पार्किंग के साथ सड़क का चौड़ीकरण भी किया गया है।

ऐतिहासिक बुढ़ातालाब हो रहा था गुमनाम

दशकों तक अपनी ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसिद्धियों के लिए मशहूर बुढ़ातालाब पिछले कुछ सालों से गंदगी और रख रखाव की वजह से गुमनाम सा होता जा रहा था। बेशुमार गंदगी और प्रदूषण की वजह से इस तालाब के पास भी लोग फटकना पसंद नहीं करते थे, लिहाजा जिला प्रशासन की पहल और निगम व स्मार्ट सिटी की कोशिशों ने बुढ़ा तालाब के जीर्णोद्धार की रूप रेखा तैयार की। आज प्रर्यटन और मनोरंजन के नजरिये से राजधानी रायपुर का मरीन ड्राइव और कटोरा तालाब के बुढ़ातालाब तीसरा ऐसा प्रर्यटन स्थल बन गया है। जो ना सिर्फ रात की रंगीनियों में भी स्वर्ग सी खुबसूरती बिखेर रहा है, बल्कि लोगों के मनोरंजन का भी बड़ा जरिया बन गया है।

कई ऐतिहासिक कहानियों का गवाह रहा है ये तालाब

शहर के बीचाें बीच स्थित बूढ़ातालाब से कई ऐतिहासिक यादें जुड़ी हैं। कल्चुरी वंश के राजाओं, स्वामी विवेकानंद और ऐतिहासिक शिलालेख की वजह से यह तालाब देशभर में फेमस है। अंग्रेज थकान मिटाने और सुकून के लिए यहां आते थे।तालाब का इतिहास लगभग 600 साल पुराना है। उस वक्त कल्चुरी राजाओं का शासन था। खूबसूरती और हरियाली के शौकीन कल्चुरी राजाओं ने तालाब विकसित किया। कहने को हम अभी आधुनिक हुए हैं लेकिन उस दौर के कारीगर अभी के इंजीनियरों से कम नहीं थे। सीमित संसाधनों में उन्होंने ऐसा सिस्टम तैयार किया जिससे तालाब में हमेशा पानी भरा रहे। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि यह तालाब महाराज बंध तालाब से जुड़ा हुआ है। दोनों तालाब के बीच से पानी निकासी की व्यवस्था की गई है।

स्वामी विवेकानंद से जुड़ी हैं यादें

तालाब इसलिए भी खास है क्योंकि इससे स्वामी विवेकानंद का नाम जुड़ा है। स्वामी विवेकानंद जब रायपुर में रहा करते थे, तब वो काफी समय यहां बिताया करते थे। उन्हें यहां बहुत सुकून मिलता था। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि वे तालाब तैरकर पार करते थे, हालांकि ये पुष्ट नहीं है। इन यादों की वजह से ही यहां उनकी प्रतिमा लगाकर तालाब का नाम विवेकानंद सरोवर रखा गया है।

 

किले के साथ हुआ था तालाब का निर्माण

रायपुर की गोद में बसे बूढ़ातालाब को राजाओं ने अपने किले की सुरक्षा के लिए खुदवाया था। इतिहासकारों की मानें तो कल्चुरि राजा ब्रह्मदेव ने खल्लारी को छोड़कर रायपुर से सटी खारुन नदी के समीप अपनी राजधानी बनाई। उसके बाद रायपुर के बूढ़ातालाब के पास राजधानी बनाई, जहां उन्होंने किले के साथ तालाब भी खुदवाया। इतिहासविद् कहते हैं कि भोसले कालीन रघुजी राव भोसले के दस्तावेजों के मुताबिक किले के नीचे बूढ़ातालाब पूरब खाई के नीचे होने के उल्लेख मिलते हैं।

कमल से निखरती थी खूबसूरती

कहने को चारों ओर विकास की बयार बह रही है। इस विकास पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च भी किए जा रहे हैं, लेकिन तालाब की स्थिति पहले की तुलना में बहुत खराब है। दशकों पहले तालाब में कमल के फूल खिला करते थे। चांदनी रात में ठहरे पानी के बीच खिले कमल की खूबसूरती देखने शहर के हजारों लोग यहां आते थे। लेकिन अब यहां कमल फूल का नामोनिशां तक नहीं है। अभी जिस तरफ दानी स्कूल बना हुआ है, उस तरफ कभी नारियल के पेड़ थे। यह राजसी ठाठ का अहसास कराते थे।

 

तालाब की तारीफ में गढ़े कसीदे

इतिहासविद रमेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार बूढ़ातालाब देखकर अहमदाबाद स्थित कांकरिया झील की याद आती है। दोनों में काफी समानता है। नागपुर में मिले एक दस्तावेज के अनुसार कल्चुरी वंश के राजाओं के बाद अंग्रेजों को भी बूढ़ातालाब की खूबसूरती अट्रेक्ट करती थी। यूरोप से आए कुछ यात्रियों ने इसकी तारीफ में कसीदे गढ़े हैं। उस दस्तावेज में लिखा हुआ है कि इस तालाब से 1402 का एक शिला निकला था। इस पर रायपुर और इस ऐतिहासिक तालाब के बारे में काफी कुछ लिखा हुआ है।
राज्यपाल ने बूढ़ा तालाब का किया भ्रमण, कहा- रायपुर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव है यह तालाब-glibs.in

 

40 सीसीटीवी कैमरे के निगरानी में तालाब

तालाब में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कुल 40 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके लिए एक कंट्रोल रूम है। साथ ही मेंटेनेंस आदि कार्य के लिए एक नोडल अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बताया जाता है कि इसका मेंटेनेंस अभी ठेका लिए हुए कंपनी द्वारा तीन से पांच साल तक करेंगे।

पुलिस लाइन तक फैला था तालाब

दशकों पहले तालाब का आकार बहुत बड़ा हुआ करता था। वक्त के साथ-साथ तालाब के हिस्से में निर्माण कार्य हाते गए और यह सिमटता चल गया। लेकिन अब आस-पास हुए निर्माण कार्य के कारण तालाब का स्वरूप पहले से और छोटा हो गया है। आपको जानकर हैरत होगी कि पहले बूढ़ातालाब का विस्तार पुलिस लाइन तक था। जो निर्माण कार्य के कारण छोटा होता गया।
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