अर्थी उठने ही वाली थी….कि मां की चित्कार से बेटे की चलने लगी सांस……आनन-फानन में कराया गया मृत घोषित युवक को अस्पताल में भर्ती … मां बोली- जिउतिया व्रत के दिन मेरी आस नहीं टूटने दी भगवान ने

पटना 11 सितंबर 2020। जिउतिया (जीवित पुत्रिका व्रत)  के दिन एक मां की आस को ईश्वर ने टूटने नहीं दिया। बच्चे की लंबी उम्र के लिए मनाये जाने वाले इस व्रत के दिन ही एक युवक इलाज के दौरान डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने शव घर लाकर अर्थी सजायी, इधर मां को मृत बेटे के आखिरी दर्शन केलिए लाया गया तो वो दहाड़ मारकर रोने लगी, वो अर्थी के पास ही बैठ गयी। अचानक से 17 वर्षीय मृत घोषित युवक की सांसे चलने लगी। आनन-फानन में परिजनों ने युवक को पीएमसीएच में भर्ती कराया है, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

घटना कंकड़बाग इलाके के हरदास बिगहा के कटौना गांव की है, जहां युवक की दाह संस्कार की तैयारी पूरी हो गयी थी। अर्थी साजकर उसे बस ले जाने की ही तैयारी थी, लेकिन तभी एक चमत्कार ने लोगों की आस्था को और भी गहरा कर दिया।

परिजन बताते हैं कि सौरभ (17) सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। जिसे  कंकड़बाग के एक निजी अस्पताल में 7 तारीख की रात दस बजे उसे भर्ती कराया गया था। जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। 2 दिनों में निजी अस्पताल में लगभग दो लाख रुपये का बिल चुकाने के बाद अस्पताल ने हाथ खड़े कर दिए। बाद में वेंटिलेटर से उतार कर उसकी बॉडी को पैक करके एंबुलेंस में डाला गया।

घर पर शव पहुंचा तो, उसकी मां और परिजन दहाड़ मारकर रो रहे थे। कुछ ही देर बाद उसकी अर्थी को गंगा किनारे घाट पर जलाने ले जाने वाले थे। लेकिन अचानक अर्थी पर पड़े सौरभ की ऊंगलियां हिलने लगीं और धड़कन चलने लगीं। सौरभ की आंखें भी कुछ देर के लिये खुलीं।  इतना देख परिजनों में उत्साह जगा। रोना-धोना रुक गया। परिजन उसे पीएमसीएच लेकर आए। पीएमसीएच की इमरजेंसी में भर्ती सौरव का इलाज चल रहा है।

इमरजेंसी के प्रभारी डॉ अभिजीत सिंह सिंह ने बताया कि सौरभ की कहानी सुन बहुत अजीब लगा। उन्होंने बताया कि जब वह यहां पहुंचा तो उसकी सांसें चल रही थी। हालांकि लड़का बेहोश था लेकिन शरीर में हल्की हलचल थी। उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उसे बचाने में लगी हुई है। हालांकि उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

 

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