लोकसभा में गूंजा सीपत परियोजना का मुद्दा….सांसद अरुण साव ने कहा- भू विस्थापितों को जल्द नौकरी दे एनटीपीसी… 

626 में से 395 को ही मिल सका अब तक रोजगार
सांसद ने कहा- हस्तक्षेप करे सरकार

बिलासपुर 18 सितम्बर 2020। एनटीपीसी सीपत के भू-विस्थापितों को नौकरी देने में की जा रही लेटलतीफी से नाराज सांसद अरुण साव ने गुरुवार को इस मामले को लोकसभा में उठाया। साथ ही दो दशकों से रोजगार मिलने की आश लगाए बैठे भू-विस्थापितों को एनटीपीसी में शीघ्र नौकरी दिलाने की मांग की।

सीपत में एनटीपीसी का संयंत्र लगाने 3765 भू-स्वामियों से कुल 2318.84 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसके लिए बनाई गई पुनर्वास नीति के तहत् सभी पात्र खातेदारों को भूमि मुआवजा राशि का भुगतान जिला प्रशासन के माध्यम से करा दिया गया। राज्य सरकार की गाइड लाइन के अनुसार कुल 626 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों को एनटीपीसी संयंत्र में रोजगार देने को लेकर सहमति भी बनी, लेकिन कई दौर की त्रिपक्षीय बैठकों के बाद अब तक 395 भू-विस्थापितों को ही नौकरी मिल सकी है। इस मामले को सांसद श्री साव ने गुरुवार को अतारांकित प्रश्न संख्या 831 के माध्यम से लोकसभा में उठाया। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि “भूमि के लिए भूमि (एलएफएल)” का प्रावधान एनटीपीसी सीपत की अनुमोदित पुनर्वास कार्य योजना 2000 में किया गया था। यह विकल्प 3765 में से 3725 खातेदारों ने चुना था।

40 खातेदारों ने एलएफएल का विकल्प नहीं दिया था। भूमि के लिए भूमि का विकल्प चुनने वाले 3725 में से 624 खातेदार पात्र नहीं थे। इस तरह कुल 3101 खातेदार पुनर्वास अनुदान के लिए पात्र पाए गए थे। इनमें से 3011 खातेदारों को पुनर्वास अनुदान और भूमि मुआवजा राशि मिल चुकी है। शेष 90 खातेदारों का भुगतान व्यक्तिगत विवादों और न्यायालयीन मुकदमों के कारण लंबित है। केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा बताया गया कि हकदारी भूमि मुआवजा और पुनर्वास अनुदान के अलावा पात्र परियोजना प्रभावितों को अन्य लाभ भी दिए गए हैं। पात्र 3101 परियोजना प्रभावितों में से अब तक 395 लोगों को स्थायी रोजगार, 500 लोगों को संविदा एजेंसियों के साथ द्वितियक रोजगार दिया गया है। साथ ही 16 लोगों को दुकानें आबंटित की गईं हैं। 33 परियोजना प्रभावितों से किराए पर वाहन लिया गया है। 273 लोगों को सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से जोड़ा गया है। वहीं 1884 परियोजना प्रभावितों ने कोई अतिरिक्त लाभ नहीं लिया है। कौशल विकास के अंतर्गत् 248 परियोजना प्रभावितों को आईटीआई प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें से 228 लोगों स्थायी रोजगार मिल गया है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार जिन 626 परियोजना प्रभावितों को संयंत्र में रोजगार देने पर सहमति बनी थी, उनमें से 395 को स्थायी नौकरी मिल चुकी है।

30 भू-विस्थापितों का प्रकरण व्यक्तिगत विवाद या दस्तावेजों के अभाव के कारण लंबित है। शेष 201 रिक्तियों में 47 अनारक्षित या अन्य श्रेणियों और बैकलाॅग सहित अनुसूचित जनजाति के 154 आरक्षित पद शामिल हैं। इसलिए शेष एसटी वर्ग के पदों को भरने जिला प्रशासन से मार्गदर्शन मांगा गया है। वहीं 47 पदों को भरने प्रक्रिया जारी है। स्टाफ नर्स, कनिष्ठ आशुलिपिक आदि पदों के लिए वरीयता सूची में योग्य उम्मीदवार नहीं होने कारण इन पदों पर भर्ती के लिए एनटीपीसी ने जिला प्रशासन से प्रशिक्षण की व्यवस्था के लिए मदद मांगा है। फलतः प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत ही इन पदों को भरा जा सकेगा। इस पर सांसद साव ने कहा है कि पात्र सभी भू-विस्थापितों को जल्द से जल्द एनटीपीसी सीपत में नौकरी दिलाने केन्द्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे।

मनरेगा : छत्तीसगढ़ का कोई भुगतान लंबित नहीं

सांसद अरुण साव द्वारा लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 446 के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना के मजदूरी भुगतान को लेकर पूछे गए एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया है कि 11 सितंबर 2020 की स्थिति में मनरेगा योजना का कोई भुगतान छत्तीसगढ़ सरकार को किया जाना बाकी नहीं है। मांग अनुसार समस्त राशि जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मनरेगा मांग आधारित मजदूरी कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत् राज्य सरकारों को उनकी मांग के आधार पर मजदूरी भुगतान के लिए निरंतर राशि की जा रही है।

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