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जवानों का दिल जीत लेने वाला मानवीय चेहरा आया सामने….नक्सलियों के मांद से ग्रामीण को कंधे पर टांगकर 10 किलोमीटर पैदल चले जवान…. स्पाईक होल में घायल हुआ था जवान

जवानों का दिल जीत लेने वाला मानवीय चेहरा आया सामने….नक्सलियों के मांद से ग्रामीण को कंधे पर टांगकर 10 किलोमीटर पैदल चले जवान…. स्पाईक होल में घायल हुआ था जवान
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By NPG News

जगदलपुर 19 मार्च 2021। नक्सलियों के गढ़ में जवानों का दिल जीत लेने वाला मानवीय चेहरा आया है। जवानों ने खतरे की परवाह किये बगैर एक ग्रामीण की जान बचायी, जो नक्सलियों के बनाये स्पाईक होल में जा फंसा था। जवानों ने ना सिर्फ ग्रामीण को सुरक्षित गांव से निकाला, बल्कि कंधे पर लाद कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल भी पहुंचाया। ये मामला दरभा थाना क्षेत्र के कांदानार गांव के पयारभाटा पारा की है।

ग्रामीण सुकड़ा मुचाकी नक्सलियों के बिछाये स्पाईक होल में गिर गया था। ये होल चांदामेटा मुरियामी पारा एवं पयारभाटा के बीच पगडंडी रोड में माओवादियों द्वारा पुलिस पार्टी को क्षति पहुॅचाने की मंशा से लगाया गया था। गंभीर रूप से घायल सुकड़ा को ग्रामीणों ने किसी तरह से निकाला, लेकिन ना तो उसे अस्पताल ले जा पाये और ना ही पुलिस को इसकी सूचना दी।

इधर पुलिस तक जब ये जानकारी पहुंची, तो SSP दीपक झा ने पुलिस टीम को ग्रामीण की तलाश में भेजा, जिसके बाद ग्रामीण को जवानों ने वहां से निकालकर कई किलोमीटर पैदल चलते हुए जंगल के रास्ते से अस्पताल पहुंचाया। पुलिस टीम ने लगभग 10 किलोमीटर का सफर नक्सलियों के साये में किया और फिर कोलेंग कैम्प लाकर प्रारंभिक उपचार किया गया। बेहतर उपचार हेतु सुकड़ा मुचाकी को पुलिस एम्बुलेंस से शासकीय मेडिकल काॅलेज डिमरापाल में भर्ती करवाया गया है जहाॅ उसका उपचार जारी है।

क्या होता है स्पाईक होल

स्पाईक होल नक्सलियों का एक गुप्त हथियार है। नक्सली फोर्स के आने-जाने के रास्तों में एक गडढा खोदकर उसमें लोहे की नुकीली-नुकीली जहर बुझे कील डाल देते हैं। कील के अलावे नुकीले बांस और अन्य चीजों को गाड़ दिया जाता है। बाद में गडढ़े के उपर से पत्तियों व बोरे से ढक दिया जाता है, ताकि देखने में वो सामान्य रास्ता लगे। जैसे ही फोर्स उन रास्तों से गुजरती है अचानक से वो उसमें गिर जाती है। ये स्पाईक होल इतना खतरनाक होता है कि कई लोगों की अब तक इससे मौत हो जाती है। पहले तो नुकीले कील से पैर और शरीर में पूरी तरह कील धंस जाता है। फिर अगर वक्त पर इलाज ना हो तो जंग लगे कील से टेटनेस और जहर बुझे कीलों की वजह से इंफेक्शन की आशंका गहरा जाती है।

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