आस्था का केंद्र कोटेश्वर तीर्थ फिर खुलकर तैयार… कोटेश्वर तीर्थ में सजने लगी दुकाने, फिर से दिखने लगी चहल पहल

कुक्षी 29 जनवरी 2020। सरदार सरोवर डेम के पानी से जलमग्न हुआ कुक्षी क्षेत्र का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल फिर से दिखने लगा
कुक्षी सहित अपने आसपास के जिलों में अपनी विशेष पहचान से जानने वाला क्षेत्र कोटेश्वर आस्था का केंद्र भी माना जाता है दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतो को लेकर यहां आते हैं।
लगातार 6 महीने तक पानी में डूबे इस कोटेश्वर तीर्थ दर्शन फिर उसी प्रकार से हम मां नर्मदा मैया के दर्शन कर सकते हैं, मां नर्मदा मैया के चमत्कार से यह तीर्थ स्थान फिर उसी समय जैसा हमें नजर आने लगा जैसा हम पहले देखते थे यह मां नर्मदा मैया का चमत्कार ही है, सरदार सरोवर बांध का पानी कम होते ही कोटेश्वर तीर्थ फिर से अपने रंग में दिखने लगा। कोटेश्वर क्षेत्र में मां नर्मदा की आस्था के चलते दूर-दूर से लोग यहां मां नर्मदा मैया के दर्शन करने के लिए आते हैं, लगातार यह क्षेत्र जलमग्न होने से क्षेत्र वीरान सा लगने लगा था।

जलमग्न होने से आश्रमों की व्यवस्था गड़बड़ाई मंदिरों की मूर्तियां रही जस की तस

सरदार सरोवर बांध के पानी से कोटेश्वर तीर्थ डूबने के कारण संत निवास, राम धुन जैसे आश्रमों की व्यवस्थाएं गड़बड़ाई लेकिन वहां के मंदिरों में मूर्तियां उसी स्थान पर वैसे ही अभी दिखाई दे रही है जैसे पहले थी चमत्कार से कम नहीं है।
मां नर्मदा की महिमा अपार है
कुक्षी क्षेत्र में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा मैया के दर्शन के लिए जाते हैं, मां नर्मदा को सुख दायिनी भी कहा जाता है जो कि सभी के दुख दर्द को दूर कर उनकी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती होती है।
सरदार सरोवर डैम का पानी कोटेश्वर तीर्थ सहित समीपस्थ क्षेत्र निसरपुर तक जल मग्न रहा दोनों ही पानी में डूबे निसरपुर क्षेत्र देखने में पूरी तरह से वीरान नजर आ रहे थे कई घर पूरी तरह से तहस नहस हो चुके है, लेकिन कोटेश्वर तीर्थ में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया, पानी में पूरी तरह से मंदिर डूबने के बाद भी मंदिर में भगवान की मूर्तियां उसी तरह दिखाई दी, जिस तरह पहले थी। लंबे समय के बाद कोटेश्वर तीर्थ वैसा ही नजर आया जैसा पहले दिखाई देता था। फिर से दुकानें सजने लगी, साथ ही चहल पहल दिखाई दी।

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