शुक्रवार को लगेगा साल का पहला चंद्रगहण…. साल के पहले चंद्र ग्रहण पर नहीं दिखेगा ‘सुपरमून’, जानें क्या है वजह…. इस चंद्रगहण से जुड़ी ये होगी खास बातें

रायपुर 8 जनवरी 2020। 2020 का पहला चंद्र ग्रहण 10 जनवरी को लगने जा रहा है. यह चंद्र ग्रहण शुक्रवार रात तकरीबन 10 बजकर 37 मिनट पर होगा. चंद्र ग्रहण की रात को कई लोगों में सुपरमून देखने की तलब अभी से जाग रही है. हालांकि इसके लिए उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा. इस तारीख को रात में चांद निकलेगा जरूर, लेकिन ये ‘सुपरमून’ नहीं होगा. यह एक वलयाकार चंद्र ग्रहण होगा.

यह कैसा चंद्र ग्रहण है?
साल 2020 का यह पहला उपच्छाया चंद्र ग्रहण है. यह चंद्र ग्रहण 10 जनवरी को लगेगा.

क्या होता है उपच्छाया चंद्र ग्रहण?
उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) तब होता है जब सूरज और चांद के बीच पृथ्‍वी घूमते हुए आती है, लेकिन वे तीनों एक सीधी लाइन में नहीं होते. ऐसी स्थिति में चांद की छोटी सी सतह पर अंब्र (Umbra) नहीं पड़ती. बता दें, पृथ्वी के बीच के हिस्से से पड़ने वाली छाया को अंब्र (Umbra) कहते हैं. चांद के बाकी हिस्‍से में पृथ्‍वी के बाहरी हिस्‍से की छाया पड़ती है, जिसे पिनम्‍ब्र या उपच्छाया (Penumbra) कहते हैं.

किन देशों में दिखेगा चंद्र ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा. दुनिया भर में यह ग्रहण एशिया, यूरोप और ऑस्‍ट्रेलिया के अधिकतर हिस्‍सों में दिखाई देगा.

किस समय दिखेगा उपच्छाया चंद्र ग्रहण?
चंद्र ग्रहण कुल 4 घंटे 01 मिनट का होगा. भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण 10 जनवरी की रात 10 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगा और 11 जनवरी को 2 बजकर 42 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगा.

कैसे लगता है चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण
असल में यह एक खगोलीय घटना होती है. चंद्र ग्रहण उस खगोलिय घटना को कहा जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है. वहीं, सूर्य ग्रहण तब माना जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता.

इस ग्रहण को कैसे देख सकते हैं?
चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं होती है. चंद्र ग्रहण पूरी तरह से सुरक्षित होता है इसलिए आप इसे नंगी आंखों से देख सकते हैं. अगर आप टेलिस्‍कोप की मदद से चंद्र ग्रहण देखेंगे तो आपको बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई देगा.

क्या है ग्रहण सूतक काल ?
ग्रणह शुरू होने के 9 घंटे पहले और ग्रहण पूरा होने के 9 घंटे के बाद तक का समय ग्रहण सूतक काल कहलाता है.

ग्रहण के दुष्‍प्रभाव से बचने के लिए क्‍या उपाय करें?
वैसे तो ग्रहण के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं, लेकिन धार्मिक मान्‍यताओं में ग्रहण का विशेष महत्‍व है. ग्रहण काल को अशुभ माना गया है. सूतक की वजह से इस दौरान कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किया जाता है. धार्मिक मान्‍यताओं में विश्‍वास रखने वाले लोग ग्रहण के वक्‍त शिव चालिसा का पाठ कर सकते हैं. साथ ही ग्रहण खत्‍म होने के बाद नहाकर गंगा जल से घर का शुद्धिकरण किया जाता है. फिर पूजा-पाठ कर दान-दक्षिणा देने का विधान है.

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