सब्जी बेचने को मजबूर हुए बालिका वधु के डायरेक्टर…….कभी फिल्मी सितारों से घिरे रहने वाले डायरेक्टर आज यूपी के गांव में ठेले पर लगाते हैं दुकान….लाखों कमाने वाले को आज 150 रूपया भी नसीब नहीं

आजमगढ़ 27 सितंबर 2020। कोरोना वायरस महामारी ने पूरी दुनिया में जमकर कहर मचाया है. लाखों लोग इस महामारी में असमय काल के गाल में समा चुके हैं. करोड़ों का रोजगार छिन गया है. फिल्म और टीवी इंड्रस्ट्री को भी कोरोना पैनडेमिक ने काफी ज्यादा प्रभावित किया है. फिल्मों और टीवी सीरियल्स की शूटिंग बंद है. मायनगरी मुंबई में फिल्म और टीवी उद्योग से जुड़े कर्मियों के सामने भी आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. इसका उदाहरण आजमगढ़ में देखने को मिला है, जहां ”बालिका वधु” और ”कुछ तो लोग कहेंगे” जैसे मशहूर टीवी सीरियल्स के निर्देशक रह चुके राम वृक्ष गौड़ आज सब्जी बेचने को मजबूर हैं.

रामवृक्ष को परिवार का पेट पालने के लिए सब्जी बेचनी पड़ रही है। हालांकि इस परिस्थिति में डायरेक्टर रामवृक्ष ने बताया कि रियल लाइफ और रील लाइफ दोनों चलती हैं। लॉकडाउन में अपने बच्चे की परीक्षा दिलाने आए रामवृक्ष अब मुंबई नहीं जा पा रहे हैं।

परिवार की जिम्मेदारियों ने इस कदर जकड़ रखा है, कि वह अब सब्जी बेचकर पेट पाल रहे हैं। क्योंकि लाॉकडाउन की वजह से मुंबई में फिल्मों का काम भी बंद हो गया है। रामवृक्ष ने यशपाल शर्मा, मिलिंद गुणाजी, राजपाल यादव, रणदीप हुडा, सुनील शेट्टी जैसे बड़े कलाकारों की फिल्म में बतौर सहायक निर्देशक का काम भी किया। उन्हें फिल्मी दुनिया का 22 साल का अनुभव है।

आजमगढ़ जिले के निजामाबाद कस्बे के फरहाबाद निवासी रामवृक्ष 2002 में अपने दोस्त की मदद से मुंबई पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में खुद को बनाए रखने के लिए काफी मेहनत की। उन्होंने पहले बिजली विभाग में काम किया, इसके बाद टीवी प्रोडक्शन में कई अन्य विभागों में भाग्य आजमाया।

इन सीरियलों के लिए किया काम 

बालिका वधु के पचास से अधिक एपिसोड में बतौर यूनिट डायरेक्टर काम करने वाले रामवृक्ष इसके अलावा इस प्यार को क्या नाम दूं, कुछ तो लोग कहेंगे, हमार सौतन हमार सहेली, झटपट चटपट, सलाम जिंदगी, हमारी देवरानी, थोडी खुशी थोडा गम, पूरब पश्चिम, जूनियर जी जैसे धारावाहिकों के अलावा यशपाल शर्मा, मिलिंद गुणाजी, राजपाल यादव, रणदीप हुडा, सुनील शेट्टी की फिल्मों के निर्देशकों के साथ सहायक निर्देशन की भूमिका भी निभाई। आने वाले दिनों के लिए एक भोजपुरी व एक हिन्दी फिल्म का काम रामवृक्ष के पास है, वे कहते हैं कि अब इसी पर वह फोकस कर रहे हैं।

 डेढ़ लाख रुपये महीने तक हो जाती थी इनकम 

रामवृक्ष गोंड, टीवी सीरियल डायरेक्टर कहते हैं टीवी उद्योग में काफी अनिश्चितता रहती है। हालाकि मेरा काम अच्छा चलता था। काम खूब था। काम आता था तो प्रोडक्शन हाउस के हिसाब से साठ हजार से लेकर डेढ़ लाख प्रतिमाह कमा लेता था। अब तो सब्जी के काम में महीने में बमुश्किल बीस हजार कमाता हूं। ये काम मेरे लिए कोई नया नहीं है, मेरे परिवार में यही काम होता है। मैं मुंबई जाने से पहले यही करता था। काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता है। मैं खुश हूं। मुंबई में हालात सुधरेंगे तो फिर से वापस फिर से उसी दुनिया में लौट जाउंगा।

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