नियम विरुद्ध शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति का लाभ देने वाले जनपद सीईओ पर विभाग का कसा शिकंजा…. जिला पंचायत ने जारी किया कारण बताओ नोटिस…विभाग की छवि हुई एक बार फिर धूमिल, बड़ी कार्रवाई होना तय

रायपुर 28 फरवरी 2020। शासन के नियम विरुद्ध 52 शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने का आदेश जारी करने वाले छुरा जनपद सीईओ नारद कुमार मांझी पर जिला पंचायत गरियाबंद का शिकंजा कस गया है । मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गरियाबंद जनपद सीईओ नारद कुमार मांझी को कारण बताओ नोटिस जारी करके 3 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है और जवाब प्रस्तुत न करने की स्थिति में एक पक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दे दी गई है ।

दरअसल जनपद पंचायत सीईओ नारद कुमार मांझी ने 19 दिसंबर 2019 को नियम विरुद्ध छुरा ब्लाक के 52 शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान दिए जाने का आदेश जारी किया था और उसके बाद शिक्षाकर्मियों के बीच न्यायालय जाकर आदेश लाने की होड़ मच गई थी शिक्षाकर्मी नेता इदरीश खान समेत 37 शिक्षाकर्मियों ने भी जो कि गरियाबंद जिले के ही हैं न्यायालय से वही आदेश हासिल कर लिया इसके बाद सोशल मीडिया में वायरल हुए पे स्लिप और सवालों ने जिला पंचायत के संज्ञान में यह सारी बात ला दी…. आनन-फानन में जब जिला पंचायत ने पूरे मामले की जांच कराई तो प्रकरण को सही पाया और उसके बाद तत्काल नारद कुमार मांझी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है ।

आखिर न्यायालय के आदेश के बाद भी क्यों नहीं दिया जा रहा है क्रमोन्नत वेतनमान!

दरअसल हाइकोर्ट ने आज तक किसी भी शिक्षाकर्मी को क्रमोन्नत वेतनमान दिए जाने का स्पष्ट आदेश जारी ही नहीं किया है जो भी आदेश जारी हुआ है उसमें याचिकाकर्ताओं को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन सौंपने और विभाग को उसमें नियमानुसार निर्णय लिए जाने का डिसीजन देते हुए याचिका को निराकृत किया गया है , इस पूरे मामले में जिस पंचायत विभाग को निर्णय लेना है उसने आज तक शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति वेतनमान दिए जाने का कोई आदेश जारी किया ही नहीं है बावजूद इसके हाईकोर्ट के निर्णय को बिना ढंग से अध्ययन किए कई जनपद पंचायतों ने इस प्रकार के आदेश जारी कर दिए थे जो बाद में निरस्त भी किए गए और विभाग की इसके कारण किरकिरी भी हुई बाद में डीईओ हेमंत उपाध्याय समेत कई अधिकारियों ने स्पष्ट आदेश भी जारी किया था कि शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान की पात्रता नहीं है।

इसके बावजूद इन सारे प्रकरणों से बेखबर गरियाबंद जिले के ब्लॉक सीईओ ने वहां के शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान देने का आदेश जारी कर दिया और बाद में शिक्षाकर्मियों ने सोशल मीडिया में यह सवाल उठाए कि आखिर प्रदेश के 1 ब्लॉक में शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान दिया कैसे जा रहा है। जिले से प्रदेश की राजनीति करने वाले नेता उसके बाद उसी आदेश को आधार बनाकर शिक्षाकर्मियों को कोर्ट से न्याय दिलाने का आह्वान करने लगे और बाकायदा शुल्क लेकर कोर्ट से क्रमोन्नति का आदेश दिलवाने का दावा करने लगे तब जाकर यह पूरा प्रकरण जिला पंचायत के नजर में आ गया जिसके बाद आनन-फानन में जिला पंचायत ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है इधर इस पूरे मामले से पंचायत विभाग में भी हड़कंप है ।

कौन सा आदेश है क्रमोन्नति के मार्ग में बाधक

दरअसल शिक्षाकर्मियों के मामले में छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा आदेश क्रमांक 1094 दिनांक 2/11/2011 के जरिए 10 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण कर चुके शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ प्रदान करने का आदेश जारी किया गया था बाद में शिक्षाकर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान स्वीकृत होने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेश क्रमांक 8244 दिनांक 14/11/2014 के द्वारा पूर्व में 2011 में जारी किए गए आदेश को भूतलक्षी प्रभाव से दिनांक 1/5/2013 से निरस्त कर दिया गया . यानी शिक्षाकर्मियों को केवल नवंबर 2011 से मई 2013 तक ही क्रमोन्नत वेतनमान की पात्रता दी गई और उसके बाद आदेश को निरस्त कर दिया गया और वर्तमान में ऐसा कोई भी आदेश प्रभावशील नहीं है, उसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए जिस प्रकार सीईओ ने क्रमोन्नत वेतनमान जारी किया है और अपने आदेश में केवल 2011 के आदेश का हवाला दिया है इसका सीधा सा मतलब यह है कि 2013 के आदेश के विषय में जनपद सीईओ को पता ही नहीं है और इसी को आधार बनाकर विभाग अब उन पर कार्रवाई करने के मूड में है ।

Spread the love