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अफसरों की लापरवाही की पराकाष्ठाः मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शिलालेख में आठ ऐसी गलतियां कि देखकर हिंदी भी शरमा जाए, प्रदेश और सांसद का नाम भी सही नहीं

अफसरों की लापरवाही की पराकाष्ठाः मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शिलालेख में आठ ऐसी गलतियां कि देखकर हिंदी भी शरमा जाए, प्रदेश और सांसद का नाम भी सही नहीं
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By NPG News

रायपुर 22 मई 2021। एक वो भी समय था जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर कलेक्टरों को रात की नींद नहीं आती थी। कोरोना काल में अब भले ही वो आॅनलाइन हो रहा हो मगर इससे सीएम प्रोग्राम की गंभीरता कम नहीं हो जाती। आज गौरेला-पेंड्रा जिले के उद्घाटन कार्यक्रम में जो हुआ, वह अफसरों की लापरवाही उजागर कर दी।छत्तीसगढ़ के अफसरों के सामान्य ज्ञान की पोल तो दो दिन पहले प्रधानमंत्री के सामने खुली ही थी, आज मुख्यमंत्री के सामने अफसरों के हिंदी ज्ञान की भी पोल खुल गयी।

ऐसे भी आये दिन कुछ ना कुछ अफसरों के कारनामे सामने आ रहे हैं, जिसने सरकार की भद पिटवाई है, लेकिन आज तो इंतहा ही हो गयी। मुख्यमंत्री से आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जिस कोविड हास्पीटल का उदघाटन कराया गया, उस हॉस्पीटल के शिलालेख में इतनी गलतियां लिखी थी, कि हिंदी भी शरमा जाये। ना शिलालेख में किसी का नाम सही लिखा था, ना ही पदनाम। पूरे शिलालेख ही गलतियों से भरा हुआ था।


दरअसल आज पेंड्रा-गौरेला-मरवाही में 66 बेड के कोविड अस्पताल का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वर्चुअल लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने रिमोट के जरिये जैसे ही शिलालेख का पर्दा खोला, अफसरों की हिंदी की पूरी पोल ही खुल गयी। शिलालेख में जिस तरह की गलतियां लिखी थी, उसे तो अच्छी हिंदी कोई तीसरी क्लास का बच्चा भी लिख लेता। छत्तीसगढ़ को “छत्तीसढ” लिख दिया गया, लोकार्पण में प के बजाय ण पर रेफ लगा दिया। हद तो तब हो गयी, जब अस्पताल में स्वास्थ्य को ही गलत लिख दिया। स्वास्थ्य की जगह स्वास्थय लिखा था। सांसद ज्योत्सना महंत के नाम में मंहत लिख दिया। सांसद और विधानसभा तक गलत लिखे गये हैं। यहां तक की मुख्यमंत्री भी गलत लिखा था। मुख्यमंत्री के म के उपर बिंदी गायब थी।

अब शिलालेख को लेकर प्रदेश भर में मजाक उड़ रहा है। इधर विभाग है कि एक-दूसरे पर ठिकरा फोड़ रहा है। कोई इसे स्वास्थ्य विभाग की गलती बता रहा तो कोई पीडब्ल्यूडी की, हालांकि इस मामले में गलतियां जिस भी स्तर पर हुई हो, आखिरी गलती तो जिला प्रशासन की है, जिसने ना सिर्फ गलतियों से भरे शिलालेख को रि-चेक नहीं किया और उसी गलतियों से भरे पट का मुख्यमंत्री के हाथों इनगोरेशन भी करा दिया।

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