डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सरकार सख्त, WhatsApp पर डिवाइस ID ब्लॉक करने की तैयारी,

WhatsApp Device ID Block
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फोटो सोर्स- इंटरनेट, एडिट- NPG.NEWS      
साइबर फ्रॉड व्हाट्सप्प (WhatsApp) के जरिेए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करते हैं, जिसे रोकने के लिए सरकार ने व्हाट्सप्प (WhatsApp) को डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल हो रहे डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का आदेश दिया है।

व्हाट्सप्प (WhatsApp) पॉपुलर मैसेजिंग एप है, जिसका इस्तेमाल भारत में करोड़ों लोग करते हैं। इसी का फायदा उठाकर साइबर फ्रॉड व्हाट्सप्प (WhatsApp) के जरिेए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी की घटना को अंजाम देते हैं, जिसे रोकने के लिए सरकार ने व्हाट्सप्प (WhatsApp) को डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल हो रहे डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का आदेश दिया है।

डिजीटल अरेस्ट स्कैम को रोकने क्या है बड़ा कदम ?

भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजीटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र की गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की रिपोर्ट के आधार पर अब इस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म खासकर व्हाट्सप्प (WhatsApp) पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। सरकार ने ऐसे डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठग बार-बार नए अकाउंट बनाने में कर रहे हैं।

ठगी के लिए कैसे होता है WhatsApp का इस्तेमाल ?

बता दें कि डिजिटल अरेस्ट में साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डरा धमकाकर उनके पैसे ऐंठते हैं। इस ठगी के लिए व्हाट्सप्प (WhatsApp) कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। बार-बार अकाउंट बदलने की समस्या के देखते हुए सरकार डिवाइस लेवल पर रोक लगाने की योजना बना रही है।

सरकार की योजना क्या है ?

सरकार IT Rules 2021 के तहत डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा 108 दिनों तक सुरक्षित रखने पर जोर दे सकती है, ताकि जांच एजेंसियों को अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिल सके। इसके अलावा फर्जी ऐप्स और मैलिशियस APK फाइल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की भी योजना है।

मुख्य उद्देश्य क्या है ?

डिवाइस ID किसी भी गैजेट की एक यूनिक पहचान होती है। यह बिल्कुल आधार नंबर की तरह हर डिवाइस को अलग पहचान देती है। इसमें IMEI नंबर, MAC ए़़ड्रेस, डिवाइस सिरियल नंबर और विज्ञापन आईडी शामिल है। सरकार का मानना है कि डिवाइस ID ब्लॉकिंग से साइबर ठगों की गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी और आम लोगों की सुरक्षा मजबूत होगी।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचे ?

“पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा कभी भी मोबाइल कॉल, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते हैं। इस प्रकार के कॉल पूरी तरह साइबर ठगी का हिस्सा होते हैं। नागरिक ऐसे कॉल से सावधान रहें, किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।”

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