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Palo Alto Networks ने लॉन्च किया NGTS: अब ऑटोमैटिक रिन्यू होंगे डिजिटल सर्टिफिकेट, नहीं रुकेगा काम

Palo Alto Networks Security: Palo Alto Networks ने नया नेक्स्ट-जनरेशन ट्रस्ट सिक्योरिटी (NGTS) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो डिजिटल सर्टिफिकेट्स को ऑटोमैटिक रिन्यू करेगा। अब कंपनियों को मैन्युअल मैनेजमेंट और एक्सपायर्ड सर्टिफिकेट्स के कारण होने वाले आउटेज की चिंता नहीं होगी।

Palo Alto Networks Security
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By swapnilkavinkar

Palo Alto Networks Security: साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र की बड़ी कंपनी Palo Alto Networks ने सांता क्लारा, कैलिफोर्निया में आयोजित एक इवेंट के दौरान अपना नया प्लेटफॉर्म Next-Generation Trust Security (NGTS) लॉन्च किया है। इसका मुख्य फोकस कंपनियों के डिजिटल कामकाज को बिना किसी रुकावट के चलाने पर है।

दरअसल, आधुनिक बिजनेस में डिजिटल सर्टिफिकेट एक पासपोर्ट की तरह काम करते हैं। लेकिन इनका मैनेजमेंट आज भी काफी हद तक पुराने और मैन्युअल तरीकों पर निर्भर है, जिससे सुरक्षा का खतरा बना रहता है।

क्यों पड़ी इस नए सिस्टम की जरूरत

डिजिटल वर्ल्ड में बदलाव की रफ्तार बहुत तेज हो गई है। पहले जहां सुरक्षा सर्टिफिकेट सालों तक चलते थे, अब उनकी वैलिडिटी 90 प्रतिशत तक कम हो गई है। आने वाले समय में कंपनियों को हर 47 दिन में अपने सर्टिफिकेट रिन्यू करने पड़ सकते हैं।

यही वजह है कि Palo Alto Networks ने इस प्रोसेस को पूरी तरह ऑटोमैटिक बनाने का फैसला किया है। अगर ये सर्टिफिकेट समय पर अपडेट नहीं होते, तो पूरी वेबसाइट या क्लाउड सर्विस अचानक बंद हो सकती है।

मैन्युअल मैनेजमेंट से होने वाला नुकसान

कंपनी के एआई और नेटवर्क सिक्योरिटी हेड आनंद ओसवाल (Anand Oswal) का कहना है कि जब डिजिटल भरोसा टूटता है, तो बिजनेस पूरी तरह ठप हो जाता है। उनके मुताबिक, अगर एक भी जरूरी सर्टिफिकेट एक्सपायर होता है, तो पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफलाइन जा सकता है।

अभी तक ज्यादातर कंपनियां हजारों सर्टिफिकेट्स का रिकॉर्ड मैन्युअल तरीके से रखती हैं। इस प्रक्रिया में मानवीय चूक की संभावना हमेशा बनी रहती है, जो बड़े आउटेज का कारण बनती है।

कैसे काम करता है NGTS प्लेटफॉर्म

NGTS को सीधे नेटवर्क लेयर पर डेप्लोएड किया गया है। यह टूल खुद ही पहचान लेता है कि नेटवर्क में कहां-कहां सुरक्षा कमियां हैं। यह उन 'शैडो' सर्टिफिकेट्स को भी ढूंढ निकालता है जिनके बारे में आईटी टीम को जानकारी नहीं होती।

अब कंपनियों को स्प्रेडशीट पर घंटों बिताने की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम एक्सपायरी से पहले ही क्रेडेंशियल्स को रिफ्रेश कर देता है, जिससे ग्राहकों के ट्रांजैक्शन और इंटरनल सर्विस में कोई बाधा नहीं आती।

भविष्य की सुरक्षा और क्वांटम कंप्यूटिंग

तकनीकी दुनिया अब पोस्ट-क्वांटम युग की तरफ बढ़ रही है। इसका मतलब है कि एन्क्रिप्शन के पुराने तरीके जल्द ही असुरक्षित हो जाएंगे। यही कारण है कि नए समाधान को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

IDC के रिसर्च एनालिस्ट इमैनुएल फिगुएरोआ (Emanuel Figueroa) का मानना है कि अब पुराने सिक्योरिटी मॉडल पर भरोसा करना ठीक नहीं है। डिजिटल माहौल जितनी तेजी से बदल रहा है, ट्रस्ट सिक्योरिटी को भी उतनी ही रफ्तार से अपडेट होना होगा।

साइबरआर्क (CyberArk) के साथ पार्टनरशिप

इस टूल को और बेहतर बनाने के लिए Palo Alto ने CyberArk के साथ हाथ मिलाया है। इसकी मशीन आइडेंटिटी इंटेलिजेंस को सीधे नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे उन टीमों के बीच तालमेल बेहतर होगा जो डेटा सुरक्षा और नेटवर्क की जिम्मेदारी संभालती हैं।

यह प्लेटफॉर्म अब सभी बिजनेस ग्राहकों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से न केवल समय बचेगा, बल्कि साइबर हमलों के प्रति सुरक्षा भी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। अब देखना होगा कि कंपनियां इसे कितनी जल्दी अपनाती हैं।

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