Elon Musk का बड़ा दांव: क्या 2026 से सुपर-ह्यूमन बनेगा इंसान? Neuralink चिप का मास प्रोडक्शन और बड़ा खतरा!
Neuralink Latest Update News 2026: Elon Musk की Neuralink कंपनी इस साल यानि 2026 से इंसानी दिमाग में लगने वाली ब्रेन चिप का मास प्रोडक्शन शुरू करने जा रही है। रोबोटिक सर्जरी, AI कनेक्शन और सुपर-ह्यूमन क्षमता के दावे के साथ यह तकनीक जितनी रिवोल्यूशनरी है, उतनी ही जोखिम भरी भी मानी जा रही है।

Photo: AI-Generated Representational Image
Neuralink Latest Update News 2026: एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक (Neuralink) ने पूरी दुनिया को चौंकाते हुए एलान किया है कि इस साल यानि 2026 से इंसानी दिमाग में लगने वाली चिप का मास प्रोडक्शन शुरू कर दिया जाएगा। अब यह तकनीक सिर्फ ट्रायल तक सीमित नहीं रहेगी। मस्क का विजन साफ है, इंसानी दिमाग को सीधे कंप्यूटर और AI से जोड़ना। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब यह सर्जरी इंसान नहीं बल्कि 'रोबोटिक सर्जन' करेंगे। क्या हम एक ऐसे युग की ओर बढ़ रहे हैं जहां इंसान और कंप्यूटर के बीच का अंतर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा?
2026 की डेडलाइन और ₹5,850 करोड़ का दांव
न्यूरालिंक ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 650 मिलियन डॉलर यानि लगभग ₹5,850 करोड़ का फंड जुटाया है। कंपनी का लक्ष्य 2026 तक हजारों की संख्या में 'ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस' (BCI) डिवाइस तैयार करना है। एलन मस्क का दावा है कि ऑटोमेटेड सर्जरी के जरिए इस चिप को दिमाग में फिट करना एक 'लेसिक' (Lasik) आई सर्जरी जितना आसान हो जाएगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स इस 'हाई-स्पीड' और 'हाई-वॉल्यूम' प्रोडक्शन को लेकर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठा रहे हैं।
लैपटॉप और डिजिटल वर्ल्ड पर सीधा कंट्रोल
न्यूरालिंक के डिवाइस का सबसे बड़ा असर गैजेट्स के इस्तेमाल पर पड़ रहा है। जो लोग पैरालिसिस की वजह से हिल नहीं सकते, वे अब दो अलग-अलग तरीकों से तकनीक को कंट्रोल कर रहे हैं:
▪︎ हाइ-एंड लैपटॉप कंट्रोल: मरीज बिना कीबोर्ड छुए लैपटॉप पर ब्राउजिंग और जटिल सॉफ्टवेयर चला रहे हैं।
▪︎ गेमिंग एंड सोशल मीडिया: ट्रायल में शामिल लोग अपनी सोच से गेम खेल रहे हैं और सोशल मीडिया पोस्ट लिख रहे हैं।
ये डिवाइस दिमाग के सिग्नल्स को सीधे डिजिटल कमांड में बदल देते हैं, जिससे माउस और कीबोर्ड की जरूरत खत्म हो जाती है।
12 मरीजों पर सफल ट्रायल और FDA की चुनौतियां
न्यूरालिंक का सफर विवादों से भरा रहा है। 2022 में सुरक्षा चिंताओं के कारण FDA ने इसे रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन 2024 में मंजूरी मिलने के बाद से कंपनी ने रफ्तार पकड़ ली है। अब तक दुनिया भर में 12 मरीजों के दिमाग में यह चिप सफलतापूर्वक लगाई जा चुकी है। ये मरीज अब केवल 'सोच' के जरिए बाहरी उपकरणों को कंट्रोल कर रहे हैं। मस्क का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में अंधेपन और सुनने की शक्ति खो चुके लोगों के लिए भी मददगार साबित होगी।
रिस्क फैक्टर: क्या ये सुरक्षित है?
भले ही यह तकनीक किसी चमत्कार जैसी लगे, लेकिन इसके 'डार्क साइड' को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मास प्रोडक्शन का मतलब है कि लाखों लोगों के दिमाग में एक इलेक्ट्रॉनिक चिप होगी। डेटा प्राइवेसी, हैकिंग का खतरा और लंबे समय में दिमाग पर होने वाले जैविक असर (बायोलॉजिकल इम्पैक्ट) पर अभी भी पर्याप्त डेटा मौजूद नहीं है। एलन मस्क की यह आक्रामक टाइमलाइन टेक और मेडिकल जगत में एक नई बहस छेड़ चुकी है कि क्या हम वास्तव में इस बदलाव के लिए तैयार हैं?
