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Arctic Wolf ने लॉन्च किया दुनिया का सबसे बड़ा AI-पावर्ड Aurora Agentic SOC, जानें कैसे रोकेगा साइबर अटैक

Arctic Wolf ने दुनिया का सबसे बड़ा AI-पावर्ड 'Aurora Agentic SOC' लॉन्च किया है। यह नया सिस्टम साइबर हमलों से निपटने के लिए AI एजेंट्स का इस्तेमाल करता है, जिससे सुरक्षा 15 गुना ज्यादा तेज हो जाती है। अब कंपनियां बिना किसी भारी सेटअप के एडवांस साइबर सिक्योरिटी का फायदा उठा सकेंगी।

Arctic Wolf Aurora Agentic SOC Launch
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AI-Generated Representational Image

By swapnilkavinkar

Arctic Wolf Aurora Agentic SOC Launch: साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए मशहूर टेक फर्म Arctic Wolf (आर्कटिक वुल्फ) ने एक बड़ी घोषणा की है। कंपनी ने 'Aurora Agentic SOC' पेश किया है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा कमर्शियल एजेंटिक सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर बताया जा रहा है। दरअसल, यह नया सिस्टम सुरक्षा के पुराने तरीकों को बदलकर AI-आधारित मॉडल पर काम करेगा।

क्यों पड़ी इस नए सिस्टम की जरूरत

आजकल हैकर्स खुद AI का सहारा लेकर कंपनियों के डेटा में अटैक कर रहे हैं। ऐसे में IT टीमों पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है। ISC2.org रिपोर्ट के मुताबिक, अभी सिर्फ 30% टीमें ही सुरक्षा में AI का सही इस्तेमाल कर पा रही हैं। इसकी मुख्य वजह AI को सेटअप करने में आने वाला भारी खर्च और तकनीकी जटिलताएं हैं।

यही वजह है कि Arctic Wolf ने इस समस्या का सीधा समाधान निकाला है। उनका यह नया सिस्टम 'टर्नकी' मॉडल पर आधारित है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब खुद से कोई जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत नहीं होगी।

कैसे काम करेगा 'Swarm of Experts' मॉडल

इस पूरे सिस्टम को 'Swarm of Experts' का नाम दिया गया है, जिसमें तीन अलग-अलग तरह के AI एजेंट्स मिलकर काम करते हैं:

▪︎Oversight Agents: इनका काम पूरे ऑपरेशन की निगरानी करना और यह देखना है कि सब कुछ सही दिशा में जा रहा है या नहीं।

▪︎Authoritative Agents: ये एक्सपर्ट्स की तरह काम करते हैं। खतरों की जांच करना और उन पर तुरंत एक्शन लेना इनकी जिम्मेदारी है।

▪︎Process Agents: इनका काम रोज के उन कामों को निपटाना है जो बार-बार दोहराए जाते हैं, ताकि टीम का समय बच सके।

दिलचस्प बात यह है कि इस मॉडल में AI भले ही फ्रंट पर रहे, लेकिन अंतिम कंट्रोल हमेशा इंसानी हाथों में ही रहता है।

तेज सर्विस और कम खर्च का दावा

Arctic Wolf कंपनी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निक श्नाइडर (Nick Schneider) का कहना है कि आज के दौर में क्लाइंट्स को ऐसे भरोसेमंद समाधान चाहिए जो चलाने में आसान हों। आंकड़ों की मानें तो इस नए सिस्टम की मदद से अब साइबर सिक्योरिटी से जुड़े केस 15 गुना ज्यादा तेजी से सुलझाए जा रहे हैं।

लेकिन सबसे खास बात इसकी स्पीड है। दावा किया जा रहा है कि यह हाई-टेक सिक्योरिटी सेटअप किसी भी बड़े संस्थान में मात्र 10 दिनों के भीतर चालू किया जा सकता है। इससे कंपनियों का न केवल कीमती समय बचेगा, बल्कि सिक्योरिटी बजट पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

पुराने ग्राहकों को मिलेगा सीधा फायदा

जो कंपनियां पहले से Arctic Wolf की सर्विसेज़ ले रही हैं, उनके लिए अच्छी खबर है। उन्हें इस नए AI फीचर के लिए अलग से कोई फीस नहीं देनी होगी। यह अपडेट उनके मौजूदा प्लान में अपने आप जोड़ दिया जाएगा।

साइबर सुरक्षा में बदलता रुख

अब देखना होगा कि AI का यह नया सिस्टम साइबर अपराधियों पर कितना असर डालता है। दरअसल, हमलों के तरीके लगातार बदल रहे हैं, इसलिए सुरक्षा को भी उसी गति से अपडेट करना जरूरी है।

इतना तय है कि अब साइबर सुरक्षा का तरीका बदल रहा है। यह प्रक्रिया पहले से ज्यादा डिजिटल और स्मार्ट होती जा रही है, और आने वाले समय में यही दिशा बनी रह सकती है।

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