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Apple की बड़ी जीत: iPhone और iPad बने NATO अप्रूव्ड डिवाइस, दुनिया की कोई और कंपनी नहीं पहुंच पाई इस मुकाम तक!

Apple iPhone iPad NATO Security Certification: NATO ने Apple के iPhone और iPad को आधिकारिक सिक्योरिटी सर्टिफिकेट दिया है। अब ये डिवाइस NATO Restricted लेवल की गोपनीय जानकारी रख सकते हैं। जर्मनी की BSI एजेंसी ने सख्त जांच के बाद यह मंजूरी दी है। Samsung और Google का कोई डिवाइस अभी तक यह मुकाम हासिल नहीं कर पाया है।

Apple iPhone iPad NATO Security Certification
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AI-Generated Representational Image

By swapnilkavinkar

Apple iPhone iPad NATO Security Certification: टेक इंडस्ट्री में Apple ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो अपने प्रतिद्वंद्वियों से कितना आगे है। NATO यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन ने Apple के iPhone और iPad को अपना आधिकारिक इंफॉर्मेशन एश्योरेंस सर्टिफिकेट दे दिया है जो कि एक बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इस सर्टिफिकेशन का मतलब यह है कि अब ये दोनों डिवाइस NATO Restricted कैटेगरी की गोपनीय और संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित तरीके से स्टोर और हैंडल करने में सक्षम हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके लिए यूजर्स को कोई अलग से थर्ड पार्टी सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही किसी स्पेशल सेटिंग को ऑन करना होगा।

Apple ने अपने आधिकारिक बयान में दावा किया है कि इस स्तर का गवर्नमेंट सर्टिफिकेशन पाने वाले ये दुनिया के पहले और इकलौते कंज्यूमर मोबाइल डिवाइस हैं। यह बात Samsung हो, Google हो या फिर कोई भी दूसरी कंपनी हो, किसी पर भी लागू नहीं होती है।

जर्मनी की टॉप सिक्योरिटी एजेंसी BSI ने की थी सख्त जांच पड़ताल

यह मंजूरी Apple को यूं ही नहीं मिल गई है क्योंकि इसके पीछे एक बेहद लंबी और कठोर जांच प्रक्रिया चली है। जर्मनी की फेडरल ऑफिस फॉर इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी जिसे जर्मन भाषा में Bundesamt für Sicherheit in der Informationstechnik कहते हैं और आम भाषा में BSI के नाम से जाना जाता है, उसने Apple के इन डिवाइसेज की गहन तकनीकी परीक्षा ली थी।

BSI के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने पहले तकनीकी जांच का दौर चलाया और उसके बाद सिक्योरिटी एनालिसिस की बारी आई। हर एक फीचर को अलग अलग करके परखा गया और यह देखा गया कि कहीं कोई कमजोर कड़ी तो नहीं है।

यहां बताना जरूरी है कि BSI पहले भी iPhone और iPad की जांच कर चुकी है और उस वक्त एजेंसी ने इन डिवाइसेज को जर्मन सरकार का क्लासिफाइड डेटा रखने की इजाजत दी थी। उस समय भी सिर्फ iOS और iPadOS की अपनी बिल्ट-इन सिक्योरिटी पर भरोसा किया गया था और बाहर से कोई एक्सट्रा सॉफ्टवेयर नहीं डाला गया था।

NATO का नया सर्टिफिकेशन सिर्फ iOS 26 और iPadOS 26 वाले डिवाइसेज पर होगा लागू

एक बात जो सभी Apple यूजर्स को समझ लेनी चाहिए वो यह है कि हर iPhone और iPad को यह मंजूरी नहीं मिली है। NATO का नया सर्टिफिकेशन खासतौर पर उन्हीं डिवाइसेज के लिए है जो iOS 26 या iPadOS 26 पर अपडेट हो चुके हैं। अगर किसी यूजर का फोन या टैबलेट पुराने सॉफ्टवेयर वर्जन पर चल रहा है तो वो इस सर्टिफिकेशन के दायरे में नहीं आएगा।

BSI ने अपना मूल्यांकन पूरा करने के बाद इन दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम्स को NATO के ऑफिशियल इंफॉर्मेशन एश्योरेंस प्रोडक्ट कैटलॉग में आधिकारिक तौर पर दर्ज कर दिया है। यह कैटलॉग NATO के भीतर मान्यता प्राप्त सुरक्षित उत्पादों की एक आधिकारिक सूची होती है।

इसमें नाम आने का मतलब यह है कि NATO के सभी सदस्य देश अब इन Apple डिवाइसेज को रिस्ट्रिक्टेड डेटा के लिए पूरे भरोसे के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। पहले यह अप्रूवल सिर्फ जर्मनी तक सीमित था लेकिन अब यह पूरे NATO गठबंधन पर लागू हो चुका है।

Apple Silicon प्रोसेसर से लेकर Face ID तक इन दमदार फीचर्स ने दिलाई NATO की मंजूरी

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि NATO ने Apple की इनबिल्ट सिक्योरिटी पर भरोसा किया है। कोई बाहरी सॉफ्टवेयर नहीं लगाना पड़ा। कोई एक्स्ट्रा सिक्योरिटी लेयर नहीं जोड़नी पड़ी। BSI की टीम ने जांच के दौरान पाया कि Apple का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक दूसरे से इतनी गहराई से जुड़े हैं कि इन्हें तोड़ना बेहद मुश्किल है।

Apple Silicon प्रोसेसर ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। चिप लेवल पर ही कई सारे सिक्योरिटी फीचर्स डाले गए हैं। डिवाइस का एन्क्रिप्शन सिस्टम दो तरह से काम करता है। पहला जब डेटा फोन में रखा होता है तब। दूसरा जब डेटा कहीं भेजा जा रहा होता है तब। दोनों स्थितियों में पूरी सुरक्षा मिलती है।

Face ID की बात करें तो यह Apple का बायोमेट्रिक सिस्टम है। इसकी वजह से डिवाइस का एक्सेस कंट्रोल काफी मजबूत हो जाता है। बिना यूजर के चेहरे के फोन खोलना लगभग नामुमकिन है। Memory Integrity Enforcement जैसे फीचर्स भी हैं जो साइबर अटैक को मेमोरी तक पहुंचने से पहले ही रोक देते हैं।

Samsung और Google के लिए बढ़ी मुश्किलें

इस सर्टिफिकेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह सिर्फ Apple की जीत नहीं है। पूरी स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए एक नया स्टैंडर्ड बन गया है। सोचिए एक आम आदमी के लिए बना फोन मिलिट्री लेवल सिक्योरिटी दे रहा है। अब दूसरी कंपनियां क्या बहाना देंगी।

सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स और डिफेंस सेक्टर की डील्स में Apple को जबरदस्त फायदा मिलेगा। यह बढ़त इतनी बड़ी है कि कोई प्रतिद्वंद्वी जल्दी टक्कर नहीं दे पाएगा। Samsung और Google को अब सोचना पड़ेगा। अपने Android फोन की सिक्योरिटी में बड़े बदलाव करने होंगे। तभी वो इस लेवल के सर्टिफिकेशन की उम्मीद रख सकते हैं।

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