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VIDEO: शिक्षक अभ्यर्थी ने मांगी “इच्छा मृत्यु” : राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा- “भूखमरी की हालात में पहुंच गया हूं… बैंक वाले EMI का तगादा कर रहे, पिता भी बीमार….इच्छा मृत्यु की इजाजत दीजिये”

रायपुर 9 जून 2021। 27 महीने से नियुक्ति का इंतजार कर रहे शिक्षक अभ्यर्थी अब भूखे मरने को मजबूर हैं। कहीं कोई मजदूरी कर पेट पाल रहा है…तो कोई चाय बेच रहा है। इधर सरकार भर्ती को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे रही है। इसी बीच एक शिक्षक चयनित अभ्यर्थी ने इच्छा मृत्यु की मांग की है। राज्यपाल को भेजे पत्र में शिक्षक अभ्यर्थी इंद्रजीत सिंह ने कहा है कि वो आर्थिक रूप से बेहद परेशान है, ऐसे में उसे इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाये।

इंद्रजीत ने NPG को बताया कि बड़ी मुश्किल से उसने पढ़ाई पूरी की है। पढ़ाई के लिए उसने करीब दो लाख का लोन लिया था, शिक्षक भर्ती में चयनित होने के बाद आस जगी कि वो जल्द ही अपना लोन चुका देना, लेकिन 27 महीने गुजर गये, अभी तक नियुक्ति को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। इंद्रजीत बताता है कि उसके पिता आटा चक्की चलाते थे, लेकिन पिता की तबीयत खराब होने की वजह से आटा चक्की भी बंद हो गया है। वो खुद प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था, फिर कोचिंग क्लास लेता था, लेकिन कोरोना में सब बंद हो गया है। पूरा परिवार अब भूखमरी की हालत में आ गया है। उधर लोन को लेकर बैंक से भी लगातार तगादा आ रहा है।

इंद्रजीत कहता है कि उसे राज्यपाल के जवाब का इंतजार है, फिलहाल तो धारा 144 की वजह से वो प्रदर्शन नहीं कर पायेगा, लेकिन अगर उसे इच्छा मृत्यु की इजाजत नहीं मिली तो राजधानी में वो आमरण अनशन पर बैठक अपनी जान दे देगा। इंद्रजीत के मुताबिक वो अपनी नजरों के सामने परिवार के लोगों को भूखे प्यासे नहीं देख पा रहा है ऐसे में उसके पास इच्छा मृत्यु के अलावे कोई और चारा नहीं बच रहा है।

आपको बता दें कि इससे पहले कल शिक्षक अभ्यर्थियों का राजधानी रायपुर में प्रदर्शन भी प्रशासन ने डरा-धमकाकर खत्म करा दिया था। प्रदर्शनकारियों से वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री ने यही बात कही थी कि कोरोना का संक्रमण खत्म होगा और स्कूल खुलेंगे तब नियुक्ति दी जायेगी। मंत्री के जवाब पर इंद्रजीत का कहना है कि स्कूलों में आनलाइन पढ़ाई चल रही है, उन्हें नियुक्ति मिलती है तो वो सभी भी आनलाइन पढ़ाई करायेंगे। एक तरफ संविदा और अनुकंपा नियुक्ति दी जा रही है, लेकिन जो अभ्यर्थी चयनित हैं, उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

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