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1000 करोड़ के समाज कल्याण घोटाले में रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांड औऱ एमके राउत पर एफआईआर दर्ज करने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त

1000 करोड़ के समाज कल्याण घोटाले में रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांड औऱ एमके राउत पर एफआईआर दर्ज करने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त
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By NPG News

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रायपुर, 8 अक्टूबर 2021। समाज कल्याण विभाग में एक हजार करोड़ के कथित घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर आईएएस अधिकारी विवेक ढांड और एमके राउत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को दोनों अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने कहा था।
हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ रिटायर्ड मुख्य सचिव विवेक ढांड व एमके राउत सुप्रीम कोर्ट गए थे जहां उन्होंने स्पेशल लिव पिटीशन दायर कर कोर्ट को बताया था कि बिना हमे नोटिस जारी किए व हमारा पक्ष सुने उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। तर्को को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षो को सुनते हुए विधि सम्मत तरीके से मामले की सुनवाई करने व सुनवाई पूरी होते तक सीबीआई को किसी भी तरह की एफआईआर समेत विपरीत कार्यवाही नही करने के आदेश दिए हैं।
ज्ञातव्य है, समाज कल्याण विभाग में एक हजार करोड़ के घोटाले करने का आरोप लगाते हुए छतीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगी थी, जिसकी सुनवाई करते हुए अदालत ने सीबीआई को एफआईआर कर जांच करने हेतु निर्देशित किया था। आदेश के खिलाफ पूर्व आईएएस विवेक ढांड व एमके राउत ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दायर की थी।लीव पिटीशन पर तीन न्यायाधीशो की बेंच ने सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है।याचिकाकर्ताओ की तरफ से अधिवक्ता परमजीत सिंग पटवालिया व अवि सिंग ने पैरवी की। जिसमे उन्होंने बताया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत आदेश जारी करने के पूर्व अफसरों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष नही सुना गया हैं।विभाग के ही असंतुष्ट कर्मचारियों के द्वारा कपोल कल्पित आंकड़ों के आधार पर याचिका दायर करवाई गई हैं। जिसकी बिना जांच के ही आदेश जारी हुआ है। तर्को को सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश जारी करने की प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण मानते हुए एफआईआर के आदेश को अमान्य कर दिया। व हाइकोर्ट को निर्देशित किया कि सभी पक्षो को विधिसम्मत तरीके से मौका दे कर सुना जाए। इस दौरान सीबीआई को किसी भी किस्म की विपरीत कार्यवाही से रोक दिया गया हैं।

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