सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज के मुद्दे पर विधायक शैलेष पाण्डेय का समर्थन….. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखा पत्र….. संविलियन अधिकार मंच ने शासकीय कर्मचारियों को कैशलेस इलाज सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की है मुहिम

रायपुर 28 दिसंबर 2020। शिक्षकों के संगठन संविलियन अधिकार मंच ने प्रदेश के कर्मचारी जगत के हितों को ध्यान में रखते हुए शासकीय कर्मचारियों के लिए चयनित अस्पतालों में कैशलेस इलाज सुविधा की मांग रखी है जैसा कि आमतौर पर केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है इसके लिए संविलियन अधिकार मंच के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे ने स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव से मुलाकात करके ज्ञापन सौंपा था और अब धीरे-धीरे विधायकों को भी इसके लिए ज्ञापन सौंपा जा रहा है इसी कड़ी में बिलासपुर विधानसभा के विधायक शैलेष पाण्डेय को भी संविलियन अधिकार मंच ने कैशलेस कार्ड सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ज्ञापन सौंपा था जिसे अपना समर्थन देते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है और शिक्षक संगठन के मांग को उन तक पहुंचाया है ।

आखिर क्या है कैशलेस इलाज कार्ड सुविधा

प्रदेश में शासकीय कर्मचारियों और उनके परिजनों को बीमार होने की स्थिति में शासन के मान्यता प्राप्त हॉस्पिटलों में इलाज कराने की सुविधा प्राप्त है किंतु ऐसी परिस्थिति में पहले उन्हें अपने जेब से भुगतान करना होता है और बाद में वह बिल कर्मचारी द्वारा रिम्बर्समेंट (भुगतान) के लिए अपने कार्यालय में लगाया जाता है और यहीं से भ्रष्टाचार का असली खेल शुरू होता है । अपने ही इलाज के उस बिल को जिसका कर्मचारी द्वारा पहले ही भुगतान किया जा चुका है उसे पास कराने के लिए कर्मचारियों को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है और चढ़ावा भी देना पड़ता है उसके बाद बिल आगे बढ़ता है और फाइल राज्य कार्यालय को भेजी जाती है और जब वहां से राशि आती है तो स्थानीय कार्यालयों में चढ़ावा देने के बाद ही कर्मचारी को भुगतान हो पाता है कई बार तो ऐसा होता है कि राज्य कार्यालय से जिस कर्मचारी के लिए जो राशि आई होती है उसे संबंधित कर्मचारी को न देकर किसी अन्य कार्यालय को दे दिया जाता है । इस पूरी स्थिति को ध्यान में रखकर शिक्षकों के संगठन संविलियन अधिकार मंच ने मांग रखी है कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के लिए मान्यता प्राप्त हॉस्पिटलों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए यानी बीमारी की स्थिति में कर्मचारी सीधे अस्पताल में एडमिट हो इलाज कराएं और उनका भुगतान सीधे राज्य सरकार द्वारा हॉस्पिटल को किया जाए ताकि कर्मचारी को बीमारी की स्थिति में खुद के इलाज के लिए राशि जुटाने को भटकना न पड़े और न ही इलाज के बाद अपने ही बिल को पास कराने के लिए कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़े और चढ़ावा देना पड़े । निजी संस्थाएं और केंद्र सरकार के रेलवे जैसे कई कार्यालय अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर कैशलेस कार्ड ही देती हैं जिससे वह संबंधित अस्पतालों में बिना किसी भुगतान के आसानी से इलाज करा लेते हैं ।

 

इस मुद्दे पर संविलियन अधिकार मंच के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे ने बताया कि

” हमने अपनी बात विधायक महोदय के सामने रखी है और यह बहुत बड़ा मामला है क्योंकि हर साल कई सौ करोड़ की राशि शासन के द्वारा शासकीय कर्मचारियों की इलाज के नाम पर भुगतान किया जाता है यदि यह राशि बाद में कर्मचारी को देने के बजाय पहले ही कैशलेस कार्ड के माध्यम से कर्मचारी का इलाज करा दिया जाए तो कोई समस्या ही नहीं रहेगी क्योंकि अभी इलाज कराने के लिए हमें स्वयं पहले पैसों का इंतजाम करना पड़ता है और बाद में अपने ही पैसे के भुगतान के लिए कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है हमें इसी सिस्टम को बदलने का मांग किया है और अब विधायक महोदय ने भी इसे समर्थन दिया है , इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेगा।

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