छत्तीसगढ़ लौटेंगे सुब्रमणियम?

संजय के दीक्षित
तरकश, 11 अक्टूबर 2020
आईएएस बीवीआर सुब्रमणियम के जम्मू-कश्मीर से लौटने की अटकलें तेज होती जा रही है। ब्यूरोक्रेसी में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि वे छत्तीसगढ़ के अगले चीफ सिकरेट्री बनेंगे। सुब्रमणियम जेके के चीफ सिकेरट्री हैं। भारत सरकार ने 2018 में उन्हें डेपुटेशन पर श्रीनगर भेजा था। सुब्रमणियम लंबे समय तक पीएमओ में रहे जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। 2018 में जब छत्तीसगढ में सरकार बदली तो उस दौरान भी मुख्य सचिव के लिए उनका नाम चर्चा में रहा। लेकिन, इस समय जब सुब्रमणियम छत्तीसगढ़ लौटेंगे, इसमेें संशय है। जम्मू-कश्मीर के सीएस से हटे भी तो छत्तीसगढ़ आने की बजाए उनकी प्रायरिटी होगी कि भारत सरकार में कोई अच्छा पोर्टफोलियो मिल जाए। फिर, आरपी मंडल के एक्सटेंशन के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को प्रपोजल भेजा है। ऐसे में, सुब्रमणियम के लौटने की अटकलें जरूर लगाई जा रही है लेकिन, सुब्रमणियम अब शायद ही छत्तीसगढ़ लौटें। उनको अगर लौटना ही होता तो अपनी आईएफएस पत्नी का छत्तीसगढ़ से दिल्ली डेपुटेशन नहीं कराया होता।

डेपुटेशन की तैयारी

आईएएस सोनमणि बोरा से सरकार ने वर्क लोड कम करना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते हुए फेरबदल में उनसे श्रम विभाग लेकर अंबलगन पी को सौंप दिया। बोरा की अब मूल पोस्टिंग अब सिकरेट्री संसदीय कार्य है। साथ में राजभवन सिकरेट्री का अतिरिक्त प्रभार। जाहिर है, बोरा सेंट्रल डेपुटेशन पर दिल्ली जा रहे हैं। राज्य सरकार ने उन्हें एनओसी दे दिया है। भारत सरकार से पोस्टिंग आर्डर निकलने के बाद बोरा दिल्ली की फ्लाइट पकड़ लेंगे। इसको देखते सरकार ने बोरा के विभागों को हल्का करना शुरू कर दिया है। उनके रिलीव होने पर सरकार किसी आईएएस को संसदीय कार्य के साथ राजभवन सिकरेट्री का चार्ज सौंप देगी। बोरा की जगह राजभवन का सिकरेट्री कौन होगा, इस पर अटकलों का दौर जारी है। आमतौर पर राजभवन सिकरेट्री के लिए राज्यपाल की पसंद को वेटेज दिया जाता है। अब देखना है, सरकार किसे राजभवन भेजती है।

अमित पर संशय!

छजपा सुप्रीमो अमित जोगी ने मरवाही विधानसभा उपचुनाव में जोर-शोर से कैम्पेनिंग प्रारंभ कर दिया है। कांग्रेस और सरकार पर हमला करने का वे कोई मौका नहीं छोड रहे। मगर लाख टके का सवाल है क्या वे चुनाव लड़ पाएंगे? दरअसल, सियासी पंडितों को उनके चुनाव लड़ने पर संशय दिखाई पड़ रहा है। ऐसा मानना है कि जाति मामला अमित के लिए भारी पड़ सकता है। हो सकता है कि ऐन चुनाव के समय उन्हें चुनाव प्रक्रिया से अलग होना पड़ जाए।

डाॅक्टर के खिलाफ डाॅक्टर

मरवाही से कांग्रेस के डाॅ0 केके ध्रुव को उम्मीदवार बनाया जाना लगभग पक्का हो गया है। बीजेपी से डाॅ0 गंभीर को टिकिट मिल सकती है। बीजेपी से अभी दो नाम है। गंभीर और समीरा पैकरा। लेकिन, गंभीर की संभावना अधिक है। अगर अमित जोगी किन्ही परिस्थितियों में चुनाव से हट गए तो जाहिर है चुनाव ट्रेंगुलर की बजाए कांग्रेस-भाजपा के बीच बदल जाएगा। याने डाॅक्टर के खिलाफ डाॅक्टर।

टिकिट पर असंतोष

कांग्रेस डाॅ0 केके ध्र्रुव को मरवाही उपचुनाव में उतारने जा रही है लेकिन, उनको लेकर पार्टी में अभी से असंतोष की स्थिति निर्मित होने लगी है। पार्टी नेताओं का मानना है कि ध्रुव का बाहरी होना नुकसान हो सकता है। वे बलौदा बाजार से हैं। इसके अलावा अजीत जोगी का उन पर संरक्षण रहा है। इसीलिए वे 15 साल से मरवाही बीएमओ पद पर बने हुए हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार इसको लेकर भी सतर्क हैं कि डाॅ0 ध्रुव को टिकिट देने पर बीजेपी कहीं समीरा पैकरा को मैदान में न उतार दे। समीरा लोकल हैं। इससे चुनाव लोकल वर्सेज बाहरी में बदल जाएगा। जाहिर है, इससे कांग्रेस को नुकसान होगा।

संदीपन या धमेंद्र?

गरियाबंद के कलेक्टर छतर सिंह डेहरे इस महीने 30 तारीख को रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह पर सरकार किसे कलेक्टर बनाकर भेजेगी इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है। सरकार अगर डायरेक्ट आईएएस में से किसी को भेजना चाहेगी तो इनमें एक नाम विलास संदीपन भोस्कर का हो सकता है। वे कोरिया कलेक्टर से डेढ़ महीने में राजधानी वापिस बुला लिए गए थे। और, प्रमोटी की कहीं बात आई तो धर्मेंद्र साहू का पलड़ा भारी रहेगा। धर्मेद्र 96 बैच के राप्रसे अधिकारी हैं। उनके बैच के लगभग सभी कलेक्टर बन गए हैं। रमेश शर्मा, केएल चैहान, सुनील जैन और पी एल्मा सभी धर्मेंद्र के समकक्ष हैं। हालांकि, एक विपीन मांझी भी हैं। लेकिन, गरियाबंद उनका गृह जिला है, इसलिए उनकी संभावना नही ंके बराबर है।

2013 बैच की वेटिंग

कई राज्यों में 2014 बैच के आईएएस कलेक्टर बन गए हैं। उड़ीसा में तो 2015 बैच चालू हो गया है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में 2013 बैच वेटिंग में चल रहा है। वैसे, अविभाजित मध्यप्रदेश में भी आईएएस बनने के पांच से छह वर्ष के भीतर कलेक्टरी मिल जाती थी। लेकिन, छत्तीसगढ़ में 2009 बैच से यह ट्रेंड टूट गया। 2010, 2011 और 2012 तीनों ही बैच काफी लेट से कलेक्टर बना। दरअसल, वजह यह है कि कुछ सालों से हर साल छह-छह, सात-सात आईएएस छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। लिहाजा, दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। फिर, प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पहले सिर्फ चुनाव के समय सरकार 12 से 13 जिलों में प्रमोटी आईएएस को कलेक्टर बनाती थी। बाकी समय इनकी संख्या सात-आठ होती थी। एक समय तो सिर्फ चार रह गए थे। लेकिन, अभी प्रमोटी आईएएस का वेटेज बढ़ा है। इस समय 10 जिलों में प्रमोटी कलेक्टर हैं। इनमें कोरिया, बलरामपुर, जशपुर, मरवाही, बलौदा बाजार, गरियाबंद, राजनांदगांव, कवर्धा, बालोद और कांकेर शामिल हैं। हालांकि, प्रमोटी में भी 2010 से लेकर 2012 तक में अभी कई आईएएस कलेक्टरी के वेटिंग में है। सरकार को उन्हें भी देखना होगा। बहरहाल, 2013 बैच में रेगुलर रिक्रूट्ड सात आईएएस हैं। नम्रता गांधी, गौरव सिंह, अजीत बसंत, विनीत नंदनवार, इंद्रजीत चंद्रवाल, जगदीश सोनकर और राजेंद्र कटारा। ये सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. राजभवन का अगला सचिव कौन बनेगा?
2. क्या अमित जोगी मरवाही उपचुनाव लड़ पाएंगे और नहीं लड़े तो किस पार्टी को सपोर्ट करेंगे?

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