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केंद्र पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: दिल्ली में ऑक्सीजन सप्लाई पर केंद्र सरकार को फटकार…कहा- कड़े फैसले लेने पर न करें मजबूर

नईदिल्ली 7 मई 2021. ऑक्सीजन सप्लाई के मुद्दे पर कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जाने वाली केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के 1200 MT ऑक्सीजन देने के आदेश खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को राज्य के लिए 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का कर्नाटक उच्च न्यायालय का आदेश अच्छी तरह से जांचने के बाद और शक्ति के विवेकपूर्ण प्रयोग के तहत दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘हम कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं देंगे।’ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘3.95 लाख मामलों पर कर्नाटक के अनुसार 1700 मीट्रिक टन आवश्यकता है। 1100 मीट्रिक टन न्यूनतम आवश्यकता है. हाईकोर्ट ने इस मामले में असाधारण कैलिब्रेटिड अभ्यास किया है। हाईकोर्ट इस समय आंख मींच कर नहीं बैठे रह सकते।

केंद्र ने दलील दी कि ‘हमें पहले ही 700 MT ऑक्सीजन दिल्ली को देने के लिए कहा गया है। इसका मतलब रोजाना 700 MT, ये हमें कहां ले जा रहा है?’ इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘हम साफ करना चाहते हैं कि अगले आदेशों तक आपको 700 MT ऑक्सीजन रोजाना दिल्ली को देनी होगी। कृपया हमें ऐसी स्थिति में न ले जाएं, जहां हमें सरकार के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी पड़े।’

केंद्र ने कहा कि ‘तो फिर हाईकोर्ट को ही ऑक्सीजन का वितरण करने दें. मद्रास, तेलंगाना सभी हाईकोर्ट आदेश दे रहे हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया, कोर्ट ने कहा कि ‘हम सही मौके पर दखल देंगे. हम कर्नाटक के लोगों को बीच में लटकाकर नहीं रख सकते.’

बता दें कि बीते दिनों कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए राज्य में तरल चिकित्सकीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की रोजाना आपूर्ति 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामेल की सुनवाई हुई और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ के समक्ष सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य को इस समय 965 मीट्रिक टन एलएमओ की आपूर्ति की जा रही है और उस आदेश पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। इसके बाद पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले वह दस्तावेजों को देखेगी।

 

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