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एसपी के दावेदार

संजय के दीक्षित तरकश के तीर, 28 फरवरी 2021 पुलिस अधीक्षकों की बहुप्रतीक्षित तबादला सूची विधानसभा का बजट सत्र प्रारंभ होने के एक रोज पहिले याने रविवार शाम निकलने की पूरी तैयारी थी। एक आईपीएस ने तो मंदिर जाने के लिए मिठाइयां भी मंगवा ली थी। मगर ऐन वक्त पर किन्हीं कारणों से लिस्ट फिर […]

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एसपी के दावेदार
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संजय के दीक्षित
तरकश के तीर, 28 फरवरी 2021
पुलिस अधीक्षकों की बहुप्रतीक्षित तबादला सूची विधानसभा का बजट सत्र प्रारंभ होने के एक रोज पहिले याने रविवार शाम निकलने की पूरी तैयारी थी। एक आईपीएस ने तो मंदिर जाने के लिए मिठाइयां भी मंगवा ली थी। मगर ऐन वक्त पर किन्हीं कारणों से लिस्ट फिर रुक गई। अब सुनने में आ रहा है, अगले हफ्ते कुछ हो। अगले सप्ताह नहीं हुआ तो फिर समझिए होली के बाद ही होगा। बहरहाल, एसपी के प्रबल दावेदारों में आधा दर्जन से अधिक नाम गिनाए जा रहे हैं। सुजीत कुमार, राजेश अग्रवाल, लाल उम्मेद सिंह, गिरिजाशंकर, सदानंद समेत और भी कई। बेचारे गिरिजाशंकर का हर बार लक हार्ड हो जाता है। 2019 में उनका बिलासपुर एसपी बनना तय हो गया था। मगर प्रशांत अग्रवाल ने ऐन वक्त पर उन्हें आउट कर दिया। सदानंद के ग्रह-नक्षत्र भी साथ नहीं दे रहे। पिछली सरकार में आईएएस लाॅबी से कंफ्यूज होकर सरकार ने उन्हें एकेडमी भेज दिया था। इस सरकार में भी वे अच्छी स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में, लोगों की उत्सुकता इन दोनों नामों को लेकर ज्यादा है।

नाॅट आउट!

दंतेवाड़ा एसपी डाॅ0 अभिषेक पल्लव सूबे के ऐसे आईपीएस हैं, जो पिछली सरकार में कप्तान पोस्ट हुए और अभी भी क्रीज पर नाॅट आउट हैं। जबकि, सरकार बदलने के बाद ऐसा होता नहीं। जोगी सरकार के समय रायगढ़ कलेक्टर रहे सुबोध सिंह को बीजेपी ने कंटीन्यू किया था। बाकी सभी को एक सिरे से बदल दिया था। कांग्रेस की नई सरकार बनने के बाद कई जिलों में दो-तीन एसपी बदल गए। कलेक्टरों में भी एक भी पुराना नहीं होगा। एमबीबीएस करने के बाद आईपीएस बनें अभिषेक ने दंतेवाडा में नक्सलियों को डोमिनेट करने का ऐसा काम किया कि नई सरकार ने भी उन्हें कंटीन्यू करना बेहतर समझा। अभिषेक आज प्रभारी आईजी सुंदरराज पी के बाद बस्तर पुलिस का एक भरोसेमंद चेहरा हैं। अभिषेक को दंतेवाड़ा में करीब तीन साल होने जा रहा है। निश्चित तौर पर सरकार की नोटिस में ये होगा। अब देखना है कि अभिषेक दंतेवाडा में आगे भी कंटीन्यू करेंगे या सरकार उन्हें कोई ठीक-ठाक मैदानी जिला दे देगी।

कलेक्टर का विकल्प?

कलेक्टरों की लिस्ट निकलने की चर्चा भी पिछले महीने से चल रही है। लिस्ट अगर अंजाम तक पहुंची तो छोटे जिलों के कलेक्टरों के नाम अधिक होंगे। हालांकि, इस सरकार में कौन अफसर कितने दिन रहेगा, इसका कोई दावा नहीं कर सकता….दो साल में जमीन से दो इंच उपर रहने वाले अफसरों को भी औंधे मुंह गिरते लोगो ने देखा है। फिर भी अरपा प्रोजेेक्ट के चलते बिलासपुर कलेक्टर सारांश मित्तर को माना जा रहा, उन्हें अभी और मौका मिलेगा। कोरबा में किरण कौशल का भी ठीक-ठाक चल रहा। जगदलपुर में रजत बंसल सुरक्षित स्थिति में हैं तो दुर्ग में डाॅ0 सर्वेश भूरे भी ठीक-ठाक दिखाई पड़ रहे हैं। रायपुर कलेक्टर भारतीदासन जरूर काफी सीनियर हो गए हैं। मगर उनका कोई विकल्प नहीं मिल रहा…जिसे रायपुर की जिम्मेदारी सौंपी जा सकें। भारतीदासन रायपुर को ठीक-ठाक संभाले हुए हैं, ऐसे में हो सकता है उन्हें कुछ दिन और कंटीन्यू किया जाए।

सीनियर अफसर, छोटा जिला

एसएसपी अजय यादव को छोड़ दें तो पुलिस अधीक्षकों में जीतेंद्र मीणा सबसे सीनियर आईपीएस हैं। 2007 बैच के इस आईपीएस को अगर टाईम पर प्रमोशन मिल गया होता तो वे पिछले महीने डीआईजी बन गए होते। जीतेंद्र फिलवक्त बालोद के एसपी हैं। बालोद का मतलब आप समझ सकते हैं। एसपी के तौर पर बालोद पहला जिला होता है। जीतेंद्र न केवल सबसे सीनियर आईपीएस हैं बल्कि कोरबा जैसे जिला कर चुके हैं। लेकिन, पिछली सरकार में आईएएस किरण कौशल को अंबिकापुर से बालोद का कलेक्टर बनाकर भेज दिया गया था। कुछ इसी तरह जीतेंद्र के साथ हुआ है।

यंग्री यंग मैन विधायक

अमितेश शुक्ल को मंत्री बनने का भले ही अवसर नहीं मिल सका लेकिन, वे इस बात से प्रसन्न होंगे कि विधानसभा में सीएम भूपेश बघेल ने उन्हें यंग्री यंग मैन विधायक की उपमा दे दी। दरअसल, किसानों के मुद्दे पर प्रश्नकाल में सवाल हो रहे थे और विपक्षी कैंप में टोका-टोकी के साथ हंसी-ठिठोली चल रही थी। इस पर अमितेश बिफर उठे। वे खड़े होकर विपक्ष पर तमतमाते हुए ऐसे डपटे कि पूरा सदन सन्न रह गया। अमितेश तीन से चार लाईन ही बोले…किसानों की बात चल रही है और आप लोग मजाक कर रहे हैं…उनके रौद्र रूप को देखकर लगा पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी विधायकों को डांट रहे हैं। छत्तीसगढ़ के 20 साल के इतिहास में कभी किसी स्पीकर, सीएम या नेता प्रतिपक्ष़्ा को भी इस अंदाज में विधायकों को डपटते नहीं देखा गया। राजेंद्र प्रसाद शुक्ला भी नहीं। ऐसे में, यंग्री यंग मैन विधायक….सीएम का इतना कहना तो बनता ही है।

उत्कृष्ट विधायक?

चार बार के विधायक धर्मजीत सिंह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में उत्कृष्ट विधायक रह चुके हैं। धर्मजीत कुशल वक्ता हैं। सदन में न केवल उनके लच्छेदार भाषण होते थे बल्कि बीच-बीच में चुटकी लेकर सदन को हल्का-फुल्का रखने में भी अहम किरदार निभाते थे। रमन सरकार की दूसरी पारी में रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर और धर्मजीत की तिकड़ी सरकार पर हमेशा भारी पड़ती थी। रमन सिंह के तीन साल पूरे होने पर दिसंबर 2006 में जब सरकार कमाल के तीन साल के पोस्टर से जब पूरा छत्तीसगढ़ पट गया था, तब 2007 के बजट सत्र का धर्मजीत का भाषण अब भी याद है। गजब का भाषण देते हुए उन्होंने कमाल के तीन साल को निशाने पर लिया था। लेकिन, धर्मजीत में वो बातें अब दिखाई नहीं पड़ रही। ऐसा तो नहीं कि पार्टी बदलने के साथ ही धर्मजीत के तेवर भी बदल गए। वे अगर किसी सियासी संशय में हैं, तो उन्हें जल्द निर्णय लेना चाहिए।

कमिश्नरों के ट्रांसफर

राज्य सरकार ने इस हफ्ते पांच नगर निगम कमिश्नरों समेत 10 राप्रसे अधिकारियों का ट्रांसफर किया। दुर्ग कमिश्नर से वहां के विधायक अरुण वोरा खुश नहीं थे तो राजनांदगांव के कमिश्नर का परफारमेंस भी बहुत बढ़ियां नहीं बताया जा रहा। अलबत्ता, सबसे आश्चर्यजनक बिलासपुर कमिश्नर प्रभाकर पाण्डेय का ट्रांसफर रहा। प्रभाकर का हालांकि, दो साल हो गया था। लेकिन, बिलासपुर से हटाकर अंबिकापुर नगर निगम भेजना किसी को समझ में नहीं आ रहा।

अजब पुलिस, गजब पुलिस

जांजगीर जिले के एक दलित युवक को न्याय के लिए आईजी आफिस में जहर खाना महंगा पड़ गया। पुलिस ने उसे न केवल आदतन अपराधी करार दिया बल्कि कुख्यात अपराधी दिखे, इसलिए बेहोशी की स्थिति में हथकड़ी पहना दी। युवक की पत्नी से रसूखदार सरपंच ने घर में घुसकर छेड़खानी की थी। युवक मालखरौदा थाने गया। वहां रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। जांजगीर के बड़े अफसरों ने उसे डांट-डपटकर लौटा दिया गया। ऐसे में, वो क्या करता। कोई आदमी जैसा भी हो अगर उसकी पत्नी पर बात आती है तो वह आन का सवाल बन जाता है। मगर लगता है जांजगीर पुलिस ने नया रेगुलेशन बना लिया है, अपराधी की पत्नी से अगर कोई दुव्र्यवहार करें तो क्या उसकी शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी। हालांकि, डीजीपी डीएम अवस्थी ने संज्ञान लेकर आईजी से रिपोर्ट मांगी है। अब देखना है, पुलिस दलित युवक की बात भी सुनती है या फिर विधानसभा सत्र के चलते मामले को दफन कर देगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. नया रायपुर से रेलवे स्टेशन बनाने वाली कंपनी काम समेट कर वापिस क्यों जा रही है?
2. क्या किसी मंत्री को दिल्ली में कांगे्रेस पार्टी का महासचिव बनाया जा सकता है?

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