NPG स्पेशल-सीएम भूपेश की सीख योजना नौनिहालों के बीच जला रही शिक्षा की अलख, सीख में गुणवतापूर्ण शिक्षा भी और उसका मूल्यांकन भी साथ-साथ

एनपीजी न्यूज
धमतरी 24 मई 2020। कोरोना का दंश आज पूरी दुनिया झेल रही है। अर्थव्यवस्था बिखरी पड़ी है, शहर सुनसान दिख रहे हैं… बाजार वीरान हो गये है…। कोरोना से जिंदगी पटरी पर कैसे लौटे ? इसे लेकर एक तरफ भूपेश बघेल सरकार ने पूरी ताकत झोंक रखी है…तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश के नौनिहालों की पढ़ाई कैसे बेहतर से बेहतर हो, इसके लिए भी सजग हैं। सीएम के निर्देश पर धमतरी में चल रहे आनलाइन, आफलाइन पढ़ाई और पढ़ाई के साथ-साथ उसकी मानिटरिंग व मूल्यांकन की अनूठी पहल प्रदेश में खूब चर्चित हो रही है।

पढ़ाई और मानिटरिंग दोनों इस जिले में बहुत कारगर तरीके से क्रियान्वित हो रही है। ऐसा इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि कलेक्टर रजत बंसल और जिला पंचायत CEO नम्रता गांधी खुद इसकी मानिटरिंग कर रही है। साल 2019 में धमतरी जिले में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए जिले में शुरू किया गया परख कार्यक्रम पूरे प्रदेश में जहां चर्चा में रहा। तो वहीं इस साल यूनिसेफ के साथ शुरू हुआ “सीख” कार्यक्रम भी नौनिहालों को रोचक तरीके से पढ़ाई की तरफ आकर्षित करने का जरिया बन गया।

धमतरी जिले में पढ़ाई को लेकर चलाये जा रहे अलग-अलग प्रोजेक्ट कोरोना संकट के बीच भी बेहद सुचारू रूप से क्रियान्वित हो रहे हैं। एक तरफ प्रदेश सरकार की तरफ से संचालित आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम पढ़ाई तुंहर द्वार के जरिये तो बच्चों की आनलाइन पढ़ाई चल ही रही है। सीख कार्यक्रम के जरिये  बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षा दी जा रही है। हाल ही में कलेक्टर रजत बंसल की पहल पर यूनिसेफ एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से सीख का पायलट प्रोजेक्ट धमतरी के कुरुद में भी शुरू किया गया है। प्राथमिक स्तर के बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए “सीख” कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है।

सीख बना रही पढ़ाई को रोचक

रोचक तरीके से छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई की तरफ आकर्षित करने का बेहतर माध्यम “सीख” है। प्रदेश में चुनिंदा चार जगहों में जिस “सीख” प्रोग्राम को शुरू किया है, उनमें धमतरी शामिल है। छत्तीसगढ़ के सुकमा (छींदगढ़), रायगढ़ (तमनार), जशपुर(दुलदुला) और धमतरी(कुरूद) में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है, जिनमें सबसे बेहतर क्रियान्वयन धमतरी के कुरुद में ही देखने को मिल रहा है। शिक्षक व छात्रों के बीच सीधे संवाद वाले इस माध्यम से बच्चों में घर और समाज के लोगों के सीखने सिखाने की प्रक्रिया को रोचक बनाने की कोशिश की जाती है।

कार्यक्रम का क्रियान्वयन सप्ताह के तीन दिन सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को भाषा, गणित एवं बुनियादी विज्ञान, खेल, जीवन कौशल एवं कोरोना जागरूकता के रूप में संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का समय सुबह सात से 10 बजे तक निर्धारित किया गया है। यहां बच्चों को 10 या उससे कम की संख्या में अलग-अलग समूह बनाकर शिक्षक, वॉलिंटियर के माध्यम से प्राप्त गतिविधि को समझाते हुए कराने की योजना है।

सीख कार्यक्रम में वालेंटियर दे रहे सेवा :

सीख कार्यक्रम में प्रत्येक ग्राम स्तर पर वॉलिंटियर के रूप में उच्च कक्षा में पढ़ने वाले छात्र, कालेज स्टूडेंट, गांव के शिक्षित युवक व पालकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी, स्थानीय शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों की मदद ली जा रही है। स्मार्ट फोन उपलब्ध नहीं हो पाने की स्थिति में सीख किट (पठन सामग्री) उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम की शुरुआत 11 मई से हुई है, हालांकि इसका संचालन स्कूलों के बजाय गांव में स्थित सामुदायिक भवन, मंगल भवन, बाजार चौक छायादार सुरक्षित स्थान एवं निजी घरों में उपलब्ध बड़े आंगन अथवा पारिवारिक सदस्यों के साथ पालक अपने घरों में ही कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कोरोना संक्रमण की समस्या स्वरूप घरों में बंद एवं मानसिक यंत्रणा सह रहे बच्चों को बाहर निकलकर सीखने के अवसर के रूप में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक एवं मनोसामाजिक गुणों, दक्षता का विकास करना है।

पढ़ाई तुंहर द्वार हो रहा उपयोगी साबित

देश में लॉकडाउन के चलते हर चीज बंद हैं, ऐसे में पढ़ाई करने वाले छात्रों का समय बहुत ज्यादा खराब हो रहा है, ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा पोर्टल पढ़ई तुंहर दुआर पोर्टल बच्चों के लिए बेहद कारगर साबित हो रहा है। हालांकि नेटवर्क की वजह से कुछ ग्रामीणों इलाकों में इसकी उपयोगिता ज्यादा नहीं हो पा रही है, लेकिन अन्य जगहों पर ये बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कर बच्चे ना सिर्फ क्लास रूम की तर्ज पर घर बैठे पढ़ाई कर सक रहे हैं, बल्कि वो होमवर्क भी कर रहे हैं और स्टडी मैटेरियल को आसानी से डाउनलोड कर रहे हैं।  इस पोर्टल के जरिये ई-क्लास से लेकर, अकैडमिक खेलों तक सारी सुविधाओं का लाभ बच्चे उठा रहे हैं।

‘परख’ से विद्यार्थियों का लर्निंग आउटकम

आज के वक्त में पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है बच्चों का लर्निंग आउटकम। लिहाजा कलेक्टर रजत बंसल ने गुणवत्ता युक्त शिक्षा के प्रयासों को मजबूती देने के साथ-साथ पढ़ाई में मानिटरिंग का नया सिस्टम लागू किया। जिले में साल 2019 में उन्होंने परख कार्यक्रम की शुरुआत की, इसका बेहतर परिणाम भी देखने को मिला। परख कार्यक्रम के जरिये बच्चों की कमियों को भांपकर उनकी कमजोरी को दूर करने की कोशिश की गयी, तो वहीं अलग-अलग तरीकों से बच्चों को आधुनिक शिक्षा की तरफ भी मोडा गया। बच्चों के साथ सामंजस्य मजबूत करने के लिए स्थानीय बोली के जरिये बच्चों को पढ़ाई करायी जा रही है। इस प्रोग्राम को तीन चरणों में बांटा गया, जिसके तहत स्कूल और बच्चों का मूल्यांकन की प्रणाली बनायी गयी और इसे जिले के सभी प्राथमिक, मीडिल और हाईस्कूल में लागू किया गया। खास बात ये कि इस कार्यक्रम के पहले स्टेज में स्कूल में पढ़ाई का माहौल तैयार करने और शैक्षिक ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया गया। वहीं लाइब्रेरी, पाठ्य सामिग्री जैसी जरूरतों को भी पूरा किया गया।

वहीं दूसरे चरण में उन बच्चों पर फोकस किया गया, जो पढ़ाई को बीच में छोड़ जाते हैं, उन्हें फिर से स्कूलों से जोड़ने और पढ़ाई की तरफ आकर्षित किया गया। जबकि तीसरे चरण में मूल्यांकन की प्रणाली लागू की गयी।

तहत स्कूलों को तीन अलग-अलग ग्रेड में बांटा गया। रेड, येलो और ग्रीन। दरअसल स्कूल में प्रवेश के साथ ही बच्चों को एक डायरी दी जाती थी। इस डायरी में हर दिन की गतिविधि के साथ-साथ पढ़ाई और बच्चों का शैक्षिक विकास और उनकी क्षमता की जानकारी दर्ज की जाती है। इसके जरिये ना सिर्फ बच्चों की क्षमता को परखा जाता है, बल्कि साल भर स्कूल में हुई गतिविधि और शैक्षिक स्तर का भी पता चलता है।

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