अपोलो अस्पताल में कोविड से निबटने विशेष इंतजाम, होम आइसोलेशन की सुविधा भी

देवेश गोपाल, जनसंपर्क अधिकारी

अपोलो अस्पताल

कोविड महामारी में समाज के साथ खड़ा, सेवा के लिए प्रतिबद्ध अपोलो अस्पताल बिलासपुर हमेशा से समुदाय की सेवा हेतु तत्पर रहा है। कोविड महामारी के इस भीषण संक्रमण के दौर में भी अपोलो अस्पताल बिलासपुर द्वारा कोविड एवं नॉन कोविड वाले मरीजों की, सिमित संसाधन, अधोसंरचना एवं कर्मचारी होते हुए भी, पूर्ण सुरक्षात्मक देखभाल व उचित उपचार किया जा रहा है। यह एक अत्यधिक चुनौती पूर्ण कार्य है। पहली चुनौती थी की अधोसंरचना में कैसे परिवर्तन किया जाये ताकि अन्य मरीजों में संक्रमण न फैले। समय की मांग को देखते हुए अस्पताल परिसर में संरचनात्मक व कार्य प्रणाली में कुछ परिवर्तन किये गए ताकि कोविड व नॉन कोविड वाले मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कोविड संक्रमित मरीजों के लिए पृथक वार्डो का सृजन किया गया है। इन वार्डो में आवक जावक मूल अस्पताल से पृथक है ताकि अन्य मरीजों को संक्रमण का खतरा न हो। एमर्जेन्सी वार्ड में भी संभावित मरीजों को अलग से स्क्रीन किया जाता है। अस्पताल के प्रत्येक प्रवेश द्वार पर स्क्रीनिंग की जाती है। सारे कर्मचारियों व आगुन्तको को मास्क पहनना अनिवार्य है, साथ ही शारीरिक दूरिया बनाये रखने व हाथो की सफाई के लिए नियमित निगरानी की जाती है। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में आये ऐसे मरीजों, जिनमे कोविड के लक्षण हो उनका समुचित आकलन किया जाता है। कोविड पॉजिटिव मरीज को कोविड वार्ड / आई सी यु एवं संभावित संक्रमित मरीजों को सारी (सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन ) वार्ड में भर्ती किया जाता है। वार्ड में भी मरीजों को दूर दूर रखा जाता है। सारी एवं कोविड मरीजों, विशेष रूप से गंभीर मरीजों के लिए, विश्वस्तरीय जीवनरक्षक उपकरण एवं साधन उपलब्ध कराया गया है। इन सभी व्यवस्थाओ को करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जैसे कि जरुरत अनुसार एयर फ्लो, पृथक डोनिंग / डॉफिंग क्षेत्र इत्यादि। इन कार्यो को इंजीनियरिंग विभाग के कर्मियों ने सफलता पूर्वक किया। दूसरी चुनौती थी कर्मचारी प्रबंधन। अपोलो अस्पताल बिलासपुर की नर्सिंग हेड सुश्री स्वाति डेनियल ने कहा कि ‘‘ स्टाफ का प्रबंधन कोविड के लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि एक तरफ हमें स्टाफ को सुरक्षित रखना था तो दूसरी तरफ यह भी देखना था कि कोविड के मरीजों का सही देखभाल हो। ‘‘ तीसरी चुनौती यह थी कि पी पी ई किट पहन कर लम्बे समय तक कार्य करने में असुविधा। इसलिए हमने कई कदम उठाये जैसे स्टाफ के ड्यूटी को कुछ घंटे कम किया ताकि स्टाफ को राहत मिल सके, कोविड वार्ड में ड्यूटी करने वाले कर्मियों को अस्पताल परिसर में ही पृथक रहने व खाने कि व्यवस्था की, स्टाफ को क्रमशः प्रशिक्षण दिया ताकि उनका हौसला बढ़ा रहे। स्टाफ के रक्षात्मक प्रणाली को बनाये रखने हेतु आवश्यक कदम उठाये । यहाँ बताना आवश्यक हो जाता है कि कोविड मरीजों कि देखभाल में लगे स्टाफ कि संख्या, सामान्य मरीजों कि तुलना में अधिक होती है और साथ ही कई स्टाफ इस दौरान कोविड संक्रमित हो जाते है जिससे स्टाफ कि कमी लगातार बनी रहती है। संक्रमित स्टाफों को अस्पताल में पृथक व्यवस्था कर उनकी देखभाल करना भी एक चुनौती है। इस विपदा कि घडी में प्रत्येक सदस्य, हाउस कीपिंग के छोटे से छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े से बड़े डॉक्टरों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी आपातकालीन मामले जैसे सिजेरियन प्रसूति, ह््रदय कि सर्जरी, एंजिओप्लास्टी आदि संक्रमित मरीजों का भी सफलतापूर्वक इलाज किया गया। यह बताना अत्यंत तर्कसंगत है कि इस वैश्विक महामारी के शुरू से अब तक किसी भी डॉक्टर, नर्सिंग कर्मी या अन्य कर्मी ने संक्रमण के डर से अकारण छुट्टी नहीं ली है जिसके फलस्वरूप अपोलो में मरीजों के स्वस्थ होने कि दर लगभग ९० प्रतिशत है। जितनी भी मृत्यु हुई है वे सभी अन्य बीमारियों से भी ग्रसित थे। ऐसे ही एक मरीज श्रीमती गायत्री देवी ५२ वर्षीय महिला कोविड १९ से संक्रमित थी, विशेषज्ञों एवं सभी कर्मियों के अथक परिश्रम एवं सही उपचार के परिणाम स्वरुप ३२ दिनों के भारी संघर्ष के बाद स्वस्थ होकर घर गई। यह अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर के कोरोना वारियर्स के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है कि इतने लम्बे संघर्ष के बाद कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ होकर घर गई। इसके अतिरिक्त कोरोना संक्रमित मरीज की सीजेरिएन प्रसूति की गई जिसमे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे, इसमें अत्यंत चुनौती पूर्ण था की माँ के कोरोना संक्रमित होने के बाद भी बच्चे को कोरोना के संक्रमण से बचाया गया। ऐसे ही अनेक उदहारण अपोलो कोरोना वारियर्स ने स्थापित किये है।अपोलो अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ सुशील कुमार एवं डॉ इंदिरा मिश्रा ने जानकारी दी कि ‘‘ अभी भले ही बच्चो में कोविड के लक्षण वाले बहुत ज्यादा मामले सामने नहीं आ रहे है किन्तु सावधानी में ही सुरक्षा है। सबसे बड़ी चुनौती संक्रमित माता से शिशु को संक्रमण से बचाना है। सरकार के निर्देशों के अनुसार बच्चे को माँ से पृथक नहीं किया जा सकता एवं अनेक बार माँ और बच्चे में संपर्क होता है, ऐसे में यह चुनौती और बड़ी हो जाती है। “कोविड मरीजों के उचित उपचार के लिए इंटरनल मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के अतिरिक्त छाती रोग विशेषज्ञ एवं गुर्दा रोग विशेषज्ञ रोज पूर्ण रूप से सुरक्षात्मक विधियों को अपनाते हुए मरीजों से प्रतिदिन मिलते है व मरीजों की स्थितियों की निगरानी के अनुरूप यथोचित उपचार करते है। इसके अतिरिक्त यदि कोई मरीज किसी अन्य विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में भर्ती है तो वो विशेषज्ञ भी इंटरनल मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों से तालमेल कर उपचार उपलब्ध करते है। इन वार्डो में भर्ती मरीजों के परिजनों को प्रत्येक दिन उपचार करने वाले विशेषज्ञ टेलीफोन द्वारा मरीज की स्थिति की सम्पूर्ण जानकारी देते है। डॉ मनोज राय, वरिष्ठ सलाहकार, इंटरनल मेडिसिन विभाग, जिन्होंने अब तक कोविड के लगभग १०० से अधिक मरीजों का उपचार किया है, के अनुसार ‘‘ जिस तरह यह बीमारी अभी छत्तीसगढ़ और हमारे शहर बिलासपुर में फैल रही है, वैसे स्थिति में यदि किसी का रैपिड टेस्ट या आर टी पी सी आर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उन्हें घबराना नहीं चाहिए। यदि सामान्य लक्षण जैसे कि बुखार, दस्त, शरीर में दर्द, खांसी आदि है तो होम आइसोलेशन ही बेहतर है। केवल ऐसे मरीज जिनको सांस लेने में तकलीफ है या जिनका ऑक्सीजन सैचुरेशन 94 प्रतिषत से कम है उन्हें ही अस्पताल में भर्ती होना चाहिये ताकि गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में उपचार हेतु जगह मिल सके। शुगर, बी पी वाले मरीजों को अपना शुगर, बी पी नियंत्रण में रखना चाहिए तथा नियमित जांच करवाना चाहिए। अस्थमा वाले मरीजों को नियमित नेबुलाइजेशन, इनहेलर आदि का समुचित उपयोग करना चाहिए। सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए जैसे कि मास्क का उपयोग, हाथो कि सफाई एवं शारीरिक दुरी।‘‘ अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर के यूनिट हेड डॉ दीप ज्योति दास ने आम जनता से विनम्र विनती की है कि, ‘‘इस विश्व्यापी संक्रमण के दौर में अपना व अपने परिवार का पूर्ण ख्याल रखे। मास्क का उपयोग करे, भीड़ वाली जगह पर जाने से बचे, आपस में शारीरिक दूरिया बनाये रखे, दिग्भ्रमित करने वाले भ्रांतियों से बचे, पैनिक न करे व सही जानकारी छुपाने की कोशिश न करे। शासन द्वारा की जा रही टेस्टिंग में पूर्ण सहयोग करे।‘‘ अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर में कोविड के इलाज हेतु कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है। अस्पताल में सामान्य मरीजों के निर्धारित दर का ही उपयोग किया जा रहा है, जो कि शासन द्वारा निर्धारित दर के सामान है जिसमे पी पी ई किट भी शामिल है। अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर लगातार २० वर्षो से अपनी सेवाएं दे रहा है एवं यह बिलासपुर का गौरव है। कोविड मरीजों का भर्ती होना अस्पताल में बिस्तर के उपलब्धता पर निर्भर होता है, परन्तु सिमित बेड एवं संसाधनों के कारण कई बार ऐसी स्थिति निर्मित हो जाती है कि कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं कर पाते है। हम नहीं चाहते है कि लोगो में इस वजह से निराशा हो या उनका भरोसा टूटे। ऐसे कोविड पॉजिटिव मरीज जिनकी अवस्था स्थिर हो वे अपोलो द्वारा शुरू किये गए होम आइसोलेशन पैकेज का लाभ ले सकते है। आम जनता से अनुरोध है कि अफवाहों पर ध्यान न दे एवं इस विषम समय में सहयोग करके कोरोना वारियर्स का हौसला बढ़ाएं। हमारा पूर्ण प्रयास है कि आगे भी लोगो के विश्वास को हम बनाये रखे। अपोलो अस्पताल कोविड महामारी में समाज के साथ

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