सेक्स रैकेट की सबसे बड़ी लेडी डॉन सोनू पंजाबन को 24 साल की जेल…..गीता अरोड़ा से सोनू पंजाबन बनी लेडी ने जिस्मफरोशी से बनाये अरबों की संपत्ति….एक बच्ची ने पहुंचाया सलाखों के पीछे, पढ़िये

नई दिल्ली 23 जुलाई 2020। जिस्मफरोशी के सबसे बड़े रैकेट की मालकिन सोनू पंजाबन को 24 साल जेल की सजा सुनाई गयी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे क्रूर और डरावना काम करने वालों को सभ्य समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रीतम सिंह ने गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन को अनैतिक तस्करी (निषेध) कानून के तहत 14 साल और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में 10 साल की सजा सुनाई, इनमें नाबालिग बच्ची को वेश्यावृत्ति के लिए खरीदने, बेचने और आपराधिक षड्यंत्र रचने का अपराध शामिल है. अदालत ने कहा कि दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी।

मिली जानकारी के मुताबिक, पश्चिमी दिल्ली स्थित द्वारका कोर्ट ने 12 साल की बच्ची के अपहरण, देह व्यापार और मानव तस्करी के मामले में सोनू पंजाबन 24 साल की सजा सुनाई है। आरोप है कि सोनू पंजाबन के इशारे पर संदीप बेदवाल ने वर्ष 2009 में 12 साल की बच्ची को प्यार और शादी का झांसा देकर सीमा नाम की एक महिला के घर ले गया था। यहां पर 12 वर्षीय बच्ची के साथ दरिंदगी हुई। उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद संदीप ने सीमा नाम की महिला को अच्छे खासे दाम में 12 साल की बच्ची को बेच दिया। इसके बाद सीमा ने बच्ची से देह व्यापार कराना शुरू कर दिया। 11 सितंबर 2009 को पीड़ित बच्ची का अपहरण किया गया था, इसके बाद दिल्ली पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी।

न्यायाधीश ने सह-आरोपी संदीप बेडवाल को भी अपहरण, बलात्कार और नाबालिग बच्ची को वेश्यावृत्ति के लिए बेचने के जुर्म में 20 साल कैद की सजा सुनायी. अदालत ने पंजाबन और बेडवाल पर क्रमश: 64 हजार और 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. अदालत ने दिल्ली कानूनी सेवा प्राधिकार को निर्देश दिया कि वह नाबालिग बच्ची को सात लाख रुपये की अनुग्रह राशि दे. दोनों को 16 जुलाई को दोषी करार दिया था.

गीता अरोड़ा नाम की कॉलगर्ल उस वक्त सुर्खियों में आई थी जब एक बड़े व्यापारी की लाश उसकी गाड़ी में मिली थी. पुलिस की जांच में से गीता बेहद खूबसूरती से निकल गई. उसकी दोस्ती रोहतक के विजय से हो गई. कहते हैं दोनों ने शादी भी कर ली थी. थोड़े ही दिन बाद विजय यूपी पुलिस के हाथों मारा गया. इसके बाद गीता की दोस्ती दीपक से हुई. पुलिस पीछे पड़ी तो दीपक असम भाग गया और वहीं एनकाउंटर में मारा गया. दीपक के भाई हेमंत उर्फ सोनू की निगाह में गीता चढ़ गई थी. हेमंत बड़ा अपराधी था उसकी सरपरस्ती में गीता जिस्म के कारोबार की सीढ़ियां चढ़ती चली गई.

कहते हैं दोनों ने शादी कर ली थी. इसी वजह से उसे सोनू पंजाबन कहा जाता है. सोनू हेमंत सोनू के कारण और पंजाबन उसके सरनेम अरोड़ा के कारण. 2006 में गुड़गांव में हेमंत सोनू भी एनकाउंटर में मारा गया. इसके बाद सोनू ने हाथ थामा अशोक उर्फ बंटी का. बंटी भी दिलशाद गार्डन इलाके में पुलिस के हाथों मारा गया. कहा जाता है कि सोनू पंजाबन ने ही इन चारों की मुखबिरी पुलिस से की थी.

कहा जाता है कि अपराधियों की बेनामी संपत्ति के कारण सोनू ने ये काम किया. किसी वक्त ठोकरें खाने को मजबूर पंजाबन ने देखते देखते कई फ्लैट खरीद लिए और करोड़ों की संपत्ति की मालकिन बन गई. माना जाता है कि पुलिस उसके धंधे में टांग ना लगाए इसलिए भी सोनू ने ये काम किया.

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