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सेक्स रैकेट : कोड वर्ड का खुलासा, व्हाइट सीमेंट और ब्लैक कॉफी के नाम से आती थीं लड़कियां… मोबाइल पर होती थी बुकिंग

नईदिल्ली 15 फरवरी 2012। ‘व्हाइट सीमेंट’ और ‘ब्लैक कॉफी’ की डिमांड से पुलिस परेशान है। ताजनगरी बदनाम हो रही है। आखिर व्हाइट सीमेंट है क्या। यह जेल भेजे गए देसी और विदेशी बालाओं के एजेंट भीमा ने पुलिस को बताया। पूछताछ में उसने कई राज खोले। पुलिस को बताया कि एजेंटों के बीच ज्यादातर बातचीत व्हाट्स एप चैट पर होती है। फोन पर बात करते हैं तो कभी लड़की शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। पता नहीं कौन किसकी रिकार्डिंग कर रहा हो। कौन उसे सुन रहा हो। विदेशी युवती को व्हाइट सीमेंट और देसी युवती को ब्लैक कॉफी बुलाते हैं।

एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि ताजगंज स्थित शुभ रिसोर्ट से गिरफ्तार भीमा बेहद शातिर है। इस धंधे में लंबे समय से है। दिल्ली के एक नहीं कई एजेंट उसके संपर्क में हैं। जयपुर, गोवा आदि जगह के एजेंट भी उसके मिलने वाले हैं। साल में एक बार सभी जगह के एजेंट आपस में मिलते हैं। धंधे के नियम बनाए जाते हैं। वैसे पूरा धंधा फोन पर चलता है।

एसपी सिटी ने बताया कि भीमा का मोबाइल कब्जे में है। गलीच धंधे पर शिकंजे के लिए उन होटलों और एजेंट पर कार्रवाई की जाएगी जो युवतियों को रुकवाने और सप्लाई करने का काम करते हैं। एसपी सिटी ने बताया कि भीमा से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां हुईं। उसने बताया कि पुलिस को भी पता होता है कि कहां कौन एजेंट है। पुलिस भी उन पर नजर रखती है। सर्विलांस के जरिए पुलिस यह पता लगा सकती है कि कौन किससे क्या बात कर रहा है। इसलिए वे आपस में बातचीत के दौरान विशेष सावधानी बरते हैं। ग्राहकों से व्हाट्स एप कॉल पर बातचीत करते हैं। युवती का ऑर्डर भी कोड वर्ड में दिया जाता है। व्हाट्स सीमेंट के पांच पैकेट और ब्लैक कॉफी के छह डिब्बे चाहिए। इसका मतलब है कि पांच विदेशी और छह देसी युवतियां चाहिए। समय न बताने पर यह माना जाता है कि सात दिन की बुकिंग है। इससे ज्यादा दिन के लिए चाहिए होती हैं तो यह भी दूसरे अंदाज में बताया जाता है।

भीमा ने पुलिस को एक दर्जन से अधिक उन लोगों के नाम बताए हैं जो शहर में युवतियों को ठेके पर बुलाकर देह व्यापार कराते हैं। पुलिस उन लोगों की कुंडली बनाने में जुट गई है। उन होटलों को भी चिन्हित किया गया है जिनके नाम भीमा ने बताए हैं। उन होटलों पर नजर रखने के लिए सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है। वहां अवैध गतिविधि दिखने पर छापा मारा जाएगा।

रोशनी पर शिकंजे से घबरा गए थे एजेंट
भीमा ने पुलिस को बताया कि पुलिस ने रोशनी और उसके साथियों पर शिकंजा कसा तो दूसरे एजेंट भी घबरा गए थे। सभी भूमिगत हो गए थे। पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण कई महीने तक काम बंद रहा। सभी घरों में कैद थे। लॉकडाउन खुलने के बाद पहले डांस पार्टियां आयोजित कराईं, ताकि लोगों को दोबारा जोड़ा जा सके। लोग ऐसे माहौल में दोबारा आना शुरू करें। पिछले कुछ माह से देह व्यापार का काम फिर से शुरू हो गया था। डिमांड पर युवतियां बुलाई जाने लगी थीं।
भीमा को पुलिस ने जनवरी 2020 में चरस रखने के आरोप में जेल भेजा था। तब वह अकेला पकड़ा गया था। उस समय भी पुलिस को पता था कि वह युवतियों का दलाल है। उस समय युवतियां साथ नहीं पकड़ी गई थीं इसलिए देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई नहीं हुई थी।

डायरी में है लेनदेन का रिकॉर्ड
पुलिस ने विदेशी युवतियों के कमरे से आपत्तिजनक चीजों के साथ दो डायरी भी बरामद की थी। बताया जाता है इस डायरी में युवतियों द्वारा होटल मालिकों से लेकर रैकेट के अन्य सदस्यों से किए गए लेनदेन का लेखाजोखा है।

शादी की बात नहीं कर सकी साबित
पुलिस द्वारा गिरफ्तार एक युवती के पास से आधार कार्ड मिला था। इस पर पूर्वी दिल्ली का पता लिखा हुआ था। युवती से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह वर्ष 2016 में भारत आई थी। इसके बाद से यहीं पर है। युवती ने दावा किया कि उसने भारतीय नागरिक से शादी कर ली है। इसीलिए यहां का आधार कार्ड बनवाया। वह शादी का कोई प्रमाण पेश नहीं कर पाई। अपना पासपोर्ट तक नहीं दिखा पाई। इसलिए उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

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