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रोज़ाना सत्रह घंटे की लगातार मेहनत.. नालंदा परिसर का अहम योगदान.. और फिर मिली सफलता..नीरनिधि नंदेहा की कहानी उसके पिता की जुबानी

रायपुर,17 सितंबर 2021। ”दरअसल इन्होंने NIT रायपुर से सिविल इंजीनियरिंग की और इनका कैंपस सलेक्शन हुआ और जबकि ये गुजरात गए तो काम के दौरान इन्हें लगा कि इतनी मेहनत खुद के लिए करुं तो कहीं और बेहतर चला जाउंगा.. ये वापस लौटे और खुद को पढ़ाई में डूबो दिया.. ये हमारे लिए गौरव का […]

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रोज़ाना सत्रह घंटे की लगातार मेहनत.. नालंदा परिसर का अहम योगदान.. और फिर मिली सफलता..नीरनिधि नंदेहा की कहानी उसके पिता की जुबानी
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रायपुर,17 सितंबर 2021। ”दरअसल इन्होंने NIT रायपुर से सिविल इंजीनियरिंग की और इनका कैंपस सलेक्शन हुआ और जबकि ये गुजरात गए तो काम के दौरान इन्हें लगा कि इतनी मेहनत खुद के लिए करुं तो कहीं और बेहतर चला जाउंगा.. ये वापस लौटे और खुद को पढ़ाई में डूबो दिया.. ये हमारे लिए गौरव का दिन तो है ही.. हम सब बेहद खुश हैं”

ये उद्गार है पीएससी के टॉपर्स में शुमार नीलनिधि नंदेहा के पिता डॉक्टर नंदेहा के। पीएचडी डॉक्टर नंदेहा कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं। डॉक्टर नंदेहा ने बताया
”नीलनिधि छोटे हैं उनसे बड़ी बिटिया हैं जो एग्रीकल्चर में पीएचडी हैं, वे भोपाल में भारत सरकार में कार्यरत हैं, नीलनिधि की माँ गृहणी हैं पर समाजशास्त्र में पीजी हैं”

नीलनिधि को लेकर उनके पिता डॉक्टर नंदेहा ने कहा
”नील रोज़ अपनी स्टडी में पंद्रह से सोलह घंटे लगाते थे, ज़्यादातर नालंदा परिसर की लायब्रेरी में जाकर पढते थे,सुबह आठ नौ बजे निकलते और कई बार रात को दो बजे तक पढ़कर लौटते, हमने देखा है उनकी मेहनत को.. बहुत मेहनत की उन्होंने..“

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