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SP पारुल पर गंभीर आरोप: अफसरों के भ्रष्टाचार को एक्सपोज करने वाले कांस्टेबल की संदिग्ध मौत से सवालों में पुलिस…परिजनों का खुला आरोप…दुर्घटना नहीं यह हत्या है

SP पारुल पर गंभीर आरोप: अफसरों के भ्रष्टाचार को एक्सपोज करने वाले कांस्टेबल की संदिग्ध मौत से सवालों में पुलिस…परिजनों का खुला आरोप…दुर्घटना नहीं यह हत्या है
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By NPG News

“….अगर किसी भी तरह से मेरी मौत होती है तो मेरी मौत की जिम्मेदार जांजगीर की एसपी होंगी…! फेसबुक पर इस पोस्ट के कुछ माह बाद कांस्टेबल पुष्पराज सिंह की लाश बीच सड़क पर पड़ी मिली। पुलिस बता रही है ये हादसा है…परिजन कह रहे हैं ये हत्या है।”

रायपुर 17 मई 2021। …..इसे सिर्फ संयोग कैसे माना जा सकता कि कोई अपनी हत्या की आशंका जताये और 20वें दिन उसकी लाश बीच सड़क पर पड़ी मिले। पुष्पराज ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा था “मेरे उपर किसी भी तरह का फर्जी एफआईआर होता है, या किसी भी परिस्थिति में मेरी मौत होती है तो मेरी मौत की जिम्मेदार जांजगीर एसपी पारूल माथुर होंगी”…..और फिर 13 मई को पुष्पराज की बीच सड़क पर लाश मिली।
लाश जिस हालात में मिली, उसने मौत पर शक खड़ा कर दिया है। कोई कांस्टेबल अपनी हत्या की आशंका जताए और रात में स्कूटी से जाते समय बिजली की तार उसके गले में लिपट जाए…फिर स्पॉट डेथ। प्रत्यक्षदर्शी भी कोई और नहीं… शराब भट्टी का गार्ड। वही प्रथम दृष्टया बनते हुए पुलिस को फोन करता है। मौके पर पहुंचकर पुलिस उसे दुर्घटना का मामला दर्ज कर लिया।

कांस्टेबल की मौत से उठे सवाल

सवाल इस बात का है कि ऐसी कौन सी बातें थीं कि कांस्टेबल ने अपनी हत्या की आशंका जताई थी। खबर ये भी है, पुष्पराज पुलिस सिस्टम की पोल-पट्टी खोलने वाला था। पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में जांजगीर जिले में जुआ, सट्टा, अवैध शराब का संगठित कारोबार चल रहा है, फेसबुक के माध्यम से उसे भी उजागर कर रहा था। और इसी दौरान उसकी मौत हो गई। कानून के जानकारों का कहना है, जांच में सभी पहलुओं को लेना चाहिए। वकीलों का मानना है प्रकरण में विस्तृत जांच की गुंजाईश बनती है।
दूसरी बात ये कि वो सिस्टम के खिलाफ सोशल मीडिया में लगातार लिख रहा था। इस वजह से उसके ही महकमे के कई अफसर दुश्मन हो गये थे। उसके सोशल मीडिया में पोस्ट में पुष्पराज ने इसका जिक्र भी किया था। तीसरी बात ये कि सक्ती थाने में पदस्थ रहते पुष्पराज को सक्ती इलाके में चल रहे जुआ, सट्टा कारोबार की जानकारी थी। उसने सक्ती के टीआई रविद्र अनंत के संरक्षण में जुआ, सट्टा चलने का आरोप लगाया था। इस मामले की जानकारी उसने उच्चाधिकारियों को भी दी थी। लेकिन उसे चुप करा दिया गया और उलटे धमकी दे दी गयी। और सबसे खास बात ये कि जिस दिन उसकी मौत हुई, उसके अगले दिन वो विभाग में चल रहे गोरखधंधे की जानकारी सार्वजनिक करने वाला था। ये वो बिंदु हैं, जो इशारा करते हैं कि पुष्पराज की मौत को हादसा बताकर जिस तरह फाइल क्लोज कर दी गयी, दरअसल में काफी सारे पेंच अभी भी हैं, जिसकी जांच बेहद जरूरी है।

सीबीआई जांच की मांग

परिजन लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। दरअसल, इस पूरे प्रकरण में सीनियर अफसरों पर आरोप हैं, लिहाजा मजिस्ट्रियल जांच के आधार पर कोई निष्कर्ष निकलना तो बेमानी ही है। SDM आखिर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की क्या जांच करेगा।
पुष्पराज के परिजनों का कहना है, मामले की सीबीआई जांच से कम कोई जांच उन्हें स्वीकार नहीं। पुष्पराज की मौत के लिए परिजनों ने जांजगीर की एसपी, एसडीओपी और सक्ती के टीआई को जिम्मेदार बताया है।

विभागीय अनुग्रह राशि भी लौटायी

परिजनों ने विभाग से मिलने वाली राशि को भी लौटा दिया है। मृतक पुष्पराज सिंह के भाई का कहना है कि वो अपने भाई को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ता रहेगा, उसे पैसा नहीं चाहिये। इसलिए परिवार ने विभाग की अनुग्रह राशि को भी वापस कर दिया है। परिजनों ने अनुग्रह राशि लेकर आये विभाग के अफसरों को ये कहकर वापस लौटा दिया कि ” ये पैसा फलां-फलां अधिकारियों को दे दिया जाए, क्योंकि उन्हें पैसों की बहुत जरूरत होती है।”
पुष्पराज के भाई ने वीडियो जारी कर बड़े पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो NPG के पास है। मगर आरोप ऐसे हैं कि बिना तथ्य उसका ज़िक्र करना मुनासिब नहीं।
उधर, इस मामले में जांजगीर की पुलिस अधीक्षक पारुल माथुर से मोबाइल पर सम्पर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन, उनसे बात हो नहीं पाई।

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