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स्कूल बिग न्यूज : शिक्षा विभाग ने जारी किया था, बच्चों को स्कूल नहीं बुलाने का आदेश….. DEO ने जारी किया फरमान- स्कूल के गेट तक आओ……..आदेश देखकर बड़ों-बड़ों का सर चकरा जायेगा

स्कूल बिग न्यूज : शिक्षा विभाग ने जारी किया था, बच्चों को स्कूल नहीं बुलाने का आदेश….. DEO ने जारी किया फरमान- स्कूल के गेट तक आओ……..आदेश देखकर बड़ों-बड़ों का सर चकरा जायेगा
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By NPG News

रायपुर 24 मार्च 2021। शिक्षा विभाग का अपने ही अफसरों के आदेश का पोस्टमार्टम कर देने में कोई जवाब नहीं है। अब ये जानबूझकर किया जाता है…या फिर वाकई में अफसरों को आदेश समझ नहीं आता…ये तो मालूम नहीं…लेकिन हकीकत यही है कि शिक्षा विभाग का हर आदेश पर प्रदेश के अधिकारी अपने-अपने तरीके से मतलब निकाल लेते हैं। अब जशपुर को ही देख लीजिये…जहां DEO ने प्री बोर्ड का आदेश जारी कर दिया है।

प्री बोर्ड परीक्षा का आदेश जितना कमाल का नहीं है, उससे ज्यादा कमाल उस परीक्षा का दिशा निर्देश है। जहां परीक्षार्थियों को हर दिन प्रश्न पत्र लेकर घर जाकर उसे हल करने को कहा गया है। हद तो ये है कि परीक्षार्थियों को पर्चा लेने के लिए स्कूल के गेट पर बुलाया जा रहा है, जिसके बाद वो घर जायेंगे और फिर तीन घंटे में पर्चा हलकर उसे अपलोड करेंगे। अब समझ नहीं आ रहा है कि जब परीक्षार्थी गेट तक आ ही जायेंगे तो फिर वो स्कूल के अंदर क्यों नहीं आयेंगे, और तो और जब वो प्रश्न पत्र लेने के लिए स्कूल आयेंगे ही तो फिर स्कूल में ही बैठक परीक्षा क्यों नहीं दे देंगे।

डीईओ का ये अजीबो गरीब आदेश तब जारी हुआ है जब कोरोना के बढ़े खतरे के बीच मुख्यमंत्री ने स्कूल, कॉलेजों और आंगनबाड़ी बंद करने के निर्देश दिये हैं। आदेश है कि किसी भी प्रकार की कोई ऑफलाइन पढ़ाई नहीं होगी, सिर्फ बोर्ड परीक्षा पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुरूप होगी। अब मुख्यमंत्री के उस आदेश पर की अहमियत जशपुर जिला शिक्षा अधिकारी की नजर में क्या है इसका अंदाजा खुद आप लगा सकते हैं।

अजब-गजब है डीईओ का आदेश

डीईओ साहब ने दसवीं प्री बोर्ड आयोजित करने का आदेश जारी कर दिया है और यदि सरकार और उच्च अधिकारियों ने इस मामले पर संज्ञान नहीं लिया तो परसों से जशपुर जिले में यह परीक्षा भी शुरू हो जाएगी । अब एक नजर नियम कायदों पर डालें तो जिला शिक्षा अधिकारी ने जो निर्देश बनाए हैं वह यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या पूरी व्यवस्था कोरोना को घर- घर तक पहुंचाने के लिए की गई है क्योंकि उन्होंने नियम ही ऐसे बनाए हैं जिसके अंतर्गत प्री बोर्ड में शामिल होने वाले बच्चे एकसाथ सुबह 10 बजे अपने विद्यालय के गेट पर पहुंचेंगे और उन्हें उत्तर पुस्तिकाएं दी जाएंगी फिर वह घर जाएंगे और 3 घंटों में उत्तर पुस्तिकाएं लिखकर ग्रुप में अपलोड करेंगे।

यही नहीं, अगले दिन जब फिर नई उत्तर पुस्तिकाएं लेने छात्र आएंगे तो पुरानी उत्तर पुस्तिकाएं जमा करेंगे । अब सोच कर देखिए कि यदि कोई शिक्षक या बच्चों के परिवार में से कोई भी कोरोना से इनफेक्टेड होता है और उस के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं के जरिए कोरोना का संक्रमण फैलता है तो एक ही झटके में उत्तर पुस्तिकाओं के आदान-प्रदान से सभी टीचर , स्टूडेंट और उनके परिजन इसकी जद में आ सकते हैं । यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर जब प्रदेश के मुखिया, मंत्री और राज्य के उच्च अधिकारियों ने घंटों मंथन के बाद यह निर्णय लिया है कि किसी भी प्रकार ऑफलाइन परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी और तत्काल प्रभाव से विद्यार्थियों के लिए विद्यालय बंद है तो इसके पीछे का तर्क केवल उन्हें कोरोना से बचाना है ऐसे में विद्वान जिला शिक्षा अधिकारी क्या यह साबित करना चाहते हैं कि राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय गलत है और उनके तरीके से ऑफलाइन स्टडी करवाई जा सकती है।

कुल मिलाकर जिला शिक्षा अधिकारी का यह निर्णय विभाग के उच्च अधिकारियों की बुद्धिमता पर कहीं न कहीं प्रश्नचिन्ह खड़ा करता हुआ नजर आ रहा है और यदि ऐसा नहीं है तो आवश्यकता है इस बात की कि बार-बार सरकार और उच्च अधिकारियों के निर्णय को कटघरे में खड़ा करने वाले जिला स्तर के अधिकारियों पर नकेल कसी जाए ताकि बार-बार यह हास्यपद सी स्थिति निर्मित न हो ।

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