Begin typing your search above and press return to search.

VIDEO घोटाला- स्वास्थ विभाग का कारनामा – करोड़ो के मेडिकल उपकरण लावारिस हालात में धूल खा रहे ! एक साल से उपकरण की सील तक नही खोली, ठेकेदार को कर दिया गया करोड़ो का भुगतान

VIDEO घोटाला- स्वास्थ विभाग का कारनामा – करोड़ो के मेडिकल उपकरण लावारिस हालात में धूल खा रहे !  एक साल से उपकरण की सील तक नही खोली, ठेकेदार को कर दिया गया करोड़ो का भुगतान
X
By NPG News

कोरबा 18 अगस्त 2021। आपदा में अवसर की चांदी कैसे काटी जाती है, इसकी बानगी कोरबा के स्वास्थ विभाग में देखी जा सकती है। जीं हां यहां कोरोना काल में शहरी और ग्रामीण स्वास्थ सेवाओं को अप टू डेट करने के लिए स्वास्थ विभाग के अफसरों ने डीएमएफ मद से करोड़ो रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर की खरीदी तो कर ली, लेकिन उसका उपयोग करना ही भूल गये, अब आलम ये है साल भर से मेडिकल कालेज-जिला अस्पताल परिसर में बने नये बिल्डिंग और प्राथमिक स्वास्थ केंद्रो में डीएमएफ मद से खरीदे गये करोड़ो रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर जहां लावारिश हालात में धूल खा रहे है, वही स्वास्थ विभाग ने संबंधित एजेंसी को सामानों की बिना जांच किये ही करोड़ो रूपये का भुगतान भी कर दिया है।

कोरबा जिले में स्वास्थ विभाग का ये कारनामा उस वक्त सामने आया, जब मेडिकल कालेज के डीन डॉ. वाय.डी.बड़गैयया ने नये बिल्डिंग में रखे मेडिकल उपकरण और फर्नीचर को खाली करने का पत्र सीएमएचओं डॉ.बी.बी.बोर्डे को लिखा।

22 मार्च 2021 से 09 जून 2021 तक किये गये पत्राचार और स्मरण पत्र में डीन ने मेडिकल कालेज अस्पताल को नेशनल कमीशन के मापदण्डों के अनुसार तैयार करने हेतु भवन के प्रथम तल में रखे गए मेडिकल उपकरण और फर्नीचर अन्यत्र शिफट करने के लिए सीएमएचओं को पत्र लिखा गया। लेकिन डीन के लगातार किये गये स्मरण पत्र के बाद भी सीएमएचओं सामान हटाने को लेकर कोई जवाब नही दिया। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ.अरूण तिवारी को भी डीन ने पत्र जारी कर सामानों की जानकारी चाही गयी, लेकिन सीएमएचओ और सिविल सर्जन ने उक्त सामान को अपना बताने से इंकार कर दिया। ऐसे में अब डीन डॉ.वाय.डी.बड़गैयया का कहना है कि मेडिकल कालेज के नये भवन में करोड़ो रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर लावारिश हालत में पड़े हुए है, यहां किसके कहने पर रखा गया, ये कोई बताने को तैयार नही है….इसलिए उन्होने सारे सामानों को जप्ती बनाकर संचालक स्वास्थ सेवाएं को पत्र प्रेषित कर दिया है।

“पत्र में डीन ने साफ तौर पर उल्लेख किया है कि चिकित्सालय परिसर में आई.सी.यू-बर्न यूनिट हेतु बने नये भवन के प्रथम तल में करोड़ो रूपये मेडिकल उपकरण,फर्नीचर एवं कन्जूमेबल लावारिस हालत में रखा हुआ पाया गया है, जिन सामानों की सूची संलग्न है। उक्त सामानों के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी कोरबा एवं सिविल सर्जन से पत्र व्यवहार किया गया, परन्तु उनके द्वारा किसी भी प्रकार का जवाब आज दिनांक प्राप्त नही हुआ है।”

10 अगस्त 2021 को मेडिकल कालेज के डीन डॉ.बाय.डी.बड़गैयया के लिखे गये इस पत्र से साफ है कि कोरबा जिला में स्वास्थ सेवाओं को लेकर अफसर संजीदा नही है। मेडिकल उपकरण और फर्नीचर के धूल खाने की कहानी यहीं खत्म नही होती, शहर के ही रानी धनराज कुंवर प्राथमिक स्वास्थ केेेंद्र में अप्रैल 2020 में डीएमएफ मद से लाखों रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर की सप्लाई कराई गयी थी, इन सामानों की खरीदी के पीछे मंशा ये थी कि शहरी क्षेत्र में स्वास्थ सेवांए बेहतर हो सके। लेकिन आज 16 महीने बाद भी स्वास्थ केंद्र के तीसरी मंजिल में लाखों रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर धूल खा रहे है। स्टोर इंचार्ज से जब इसकी जानकारी चाही गयी तो उसने बताया कि ये सारे सामान डीपीएम और सीपीएम के कहने पर यहां रखवाया गया है। सामानों में क्या क्या शामिल है, उन्हे खुद पता नही है, सामान की लिस्ट तक उन्हे नही सौंपी गयी है……जैसा डीपीएम और सीपीएम ने कहा, उन्होंने उसे अस्पताल परिसर में रखवा दिया। खैर स्वास्थ्य विभाग का ये कारनामा जब शहर के बीचों बीच ऐसा है, तो आप अनुमान लगा ही सकते है कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ सेवाओं के नाम पर किस हद तक धांधली की गयी होगी। मेडिकल कालेज के डीन ने जिस तरह से स्वास्थ व्यवस्था के नाम शासन को करोड़ो रूपये का चूना लगाने वाले अफसरों की पोल खोल दी है, ऐसे में देखने वाली बात होगी कि क्या ऐसे अफसरो पर शासन-प्रशासन अपनी निगाहे टेढ़ी करता है ? ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

खरीदी में भी की गयी है मनमानी- डीन

मेडिकल कालेज के डीन डॉ.वाय.डी.बड़गैयया ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में मेडिकल उपकरण और फर्नीचर की खरीदी शासन के नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से किया गया है। उन्होने बताया कि शासन का नियम है कि किसी भी सामान की खरीदी सीएसआईडीसी से पंजीकृत संस्थान और मेडिकल उपकरण सीजीएमएससी के जरिये करना होता है। लेकिन कोरबा में करोड़ो रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर की खरीदी शासन के सारे नियमों को दरकिनार कर निविदा आमंत्रित कर निजी फर्मो से खरीदी की गयी है, जो कि गलत है। गौतरतलब है कि मेडिकल कालेज के डीन डॉ. बड़गैयया के इस कथन के बाद डीएमएफ मद से खरीदी करने वाले स्वास्थ विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। वही कुछ जवाबदार अफसर दबी जुबान में कोविड काल में आवश्यक होने के कारण निजी फर्मो से सामानों की खरीदी का हवाला दे रहे है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर कोविड काल में अति आवश्यकता के अनुसार सामानों की खरीदी की गयी, तो उन सामानो और मेडिकल उपकरणों का उपयोग उसी वक्त क्यों नही किया गया ? आखिर कोरोना काल में खरीदे गये करोड़ो रूपये के सामानों की सील साल भर बाद भी क्यों नही खोली जा सकी है ? ये वो सवाल है जो स्वास्थ विभाग के जवाबदार अफसरों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

बगैर सामान की जांच किये, दे दिया संतुष्टि प्रमाण पत्र

कोरबा मेें स्वास्थ विभाग द्वारा डीएमएफ मद से किये गये करोड़ो रूपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर की खरीदी में कई पोल सामने आ रहे है। जिला अस्पताल के नवीन भवन के प्रथम तल में लावारिश हालत में पड़े सामानों में 14 सील पैक मेडिकल उपकरण के बाक्स है। इन बक्सों में क्या उपकरण है इसकी किसी को कोई जानकारी नही है। लेकिन सामानों की जांच किये बगैर ही सीएचसी के फार्मासिस्ट व स्टोर इंचार्ज दुर्गा प्रसाद तिवारी ने ठेकेदार को संतुष्टि प्रमाण पत्र दे दिया। दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बकायदा ठेकेदार को यह लिखकर भी दे दिया कि कोरबा विकासखंड में डीएमएफ से मांग अनुरूप सामग्री प्राप्त कर लिया है एवं प्राप्त उपकरण एवं सामग्री की संख्या सही है और गुणवत्ता संतोषप्रद है। इस पूरे मसले पर एनपीजी ने जब दुर्गा प्रसाद तिवारी से जानकारी चाही तो उसने साफ किया कि उसने सिर्फ बेड, स्टेचर और डस्टबिन को ही देखा था, बाक्स में रखे मेडिकल उपकरण आज भी सील पैक है, उसे खोलकर जांच नही किया जा सका है। ठीक इसी तरह रानी धनराज कुंवर प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में तीसरी मंजिल में रखे उपकरणों के बाक्स भी अप्रैल 2020 से ही सील पैक पड़े हुए है। लेकिन इन सारे सामानों का भुगतान संबंधित एजेंसी को कर दिया गया है। मतलब साफ है स्वास्थ विभाग मे डीपीएम-सीपीएम और सीएमएचओं ने जैसा जहां चाहा वहां सामानों की सप्लाई तो करवा दी, लेकिन सामानों की उपयोगिता आज भी शून्य साबित हो रहा है। स्वास्थ विभाग के अफसरो ने आपदा के इस मौके को अवसर में तब्दील करने में कोई कसर नही छोड़ा, शायद यही वजह है कि जिन मेडिकल उपकरणों को मरीजों के बेहतर उपचार के लिए खरीदा गया था, वो आज भी डब्बो में बंद धूल खा रहे है, और अफसर और संबंधित एजेंसी एक बार फिर कोरोना के तीसरी लहर की तैयारी में जुटे हुए है।

Next Story