संजय शर्मा फिर आए शिक्षाकर्मियों के निशाने पर…. जमकर फूटा गुस्सा , संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों ने कहा – बंद करो अपनी गंदी राजनीति

रायपुर 24 फरवरी 2020. बजट सत्र से ठीक पहले क्रमोन्नति की मांग को सर्वोपरि बता कर शिक्षाकर्मी नेता संजय शर्मा उन लोगों के निशाने पर आ गए हैं जिनका संविलियन नहीं हुआ है और जो तीन तीन चार चार महीने तक वेतन नहीं पा रहे हैं । छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कल एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बजट से पहले शिक्षाकर्मियों की मांग को लेकर यह कहा था की शिक्षाकर्मियों के लिए क्रमोन्नति की मांग सर्वोपरि है हालांकि उन्होंने शिक्षाकर्मियों के संविलियन की भी मांग की थी लेकिन उन्होंने क्रमोन्नति की मांग को सर्वोपरि बताया था और इसी को लेकर संविलियन से वंचित जिन शिक्षाकर्मियों ने पिछली लड़ाई में उनका खुलकर साथ दिया था उनका गुस्सा फूट पड़ा और उनके फेसबुक पेज पर और शिक्षाकर्मियों के व्हाट्सएप ग्रुप पर संविलियन से वंचित और वेतन विसंगति की पीड़ा झेल रहे शिक्षाकर्मियों ने खासतौर पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

यह पहली बार नहीं है कि संजय शर्मा शिक्षाकर्मियों के निशाने पर आए हैं वह अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर शिक्षाकर्मियों के निशाने पर आते रहे है , इधर इस मुद्दे पर शिक्षाकर्मी मोर्चा के अन्य प्रदेश संचालक जिन्होंने 2018 की लड़ाई में नेतृत्व किया था यानी केदार जैन, वीरेंद्र दुबे और विकास राजपूत वह संविलियन की ही मांग को सर्वोपरि रखकर चल रहे हैं और उनका मानना है कि प्रदेश में बचे हुए शिक्षाकर्मियों का संविलियन पहले होना चाहिए यही वजह है कि तीनो के तीनो नेता किसी भी प्रकार का कोई भी विवादित बयान देने से बच रहे हैं और गाहे-बगाहे शिक्षाकर्मियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं ।

जहां वीरेंद्र दुबे खुले मंच से कई बार मुख्यमंत्री के समक्ष संविलियन की मांग को लेकर अपने सवाल दोहरा चुके हैं वही केदार जैन ने रायगढ़ के सार्वजनिक मंच से संविलियन अधिकार मंच के प्रयास की तारीफ की थी और उन्हें अपना हर संभव मदद देने की बात की थी वहीं विकास राजपूत भी संविलियन की मांग को ही सर्वोपरि रख रहे हैं । बाकी बचे अन्य संगठनों में जहां फेडरेशन की मुख्य मांग वेतन विसंगति दूर करना है और इसके अतिरिक्त उनके तीन मांग है वही संविलियन अधिकार मंच केवल संविलियन की 1 सूत्रीय मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहा है।

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