आईएएस तीन, काम ढेला का नहीं

12 जनवरी 2020
एक वो भी समय था जब पांच साल पहले पंचायत चुनाव के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त के बिना परमिशन लिए दंतेवाड़ा कलेक्टर केसी देवसेनापति अवार्ड लेने दिल्ली चले गए थे। इसको लेकर तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त पीसी दलेई तब काफी नाराज हुए थे। उन्होंने सेनापति को नोटिस भी थमा दी थी। लेकिन, समरथ को नहीं दोष गोसाई….दलेई की नाराजगी के बाद भी सेनापति का बाल बांका नहीं हुआ। लेकिन, वक्त, वक्त की बात है। एडिशनल इलेक्शन आफिसर के लिए सरकार ने पिछले महीने भारत निर्वाचन आयोग को तीन नामों का पेनल भेजा, उसमें सेनापति का नाम सबसे उपर था। दूसरे नम्बर पर हिमशिखर गुप्ता और राजेश राणा थे। जाहिर है, सेनापति का नाम उपर होने से आयोग ने उनके नाम पर मुहर लगा दी। आयोग से एप्रूवल मिलने के बाद सरकार ने कल सेनापति को चिप्स से हटाकर आयोग में भेज दिया। सवाल यह है कि अब वे वहां करेंगे क्या। दो-दो आईएएस पहले से वहां बिना काम के बैठे हैं। रीना बाबा कंगाले ने हाल ही में चीफ इलेक्शन आफिसर के रूप में ज्वाईन किया है और ज्वाइंट सीईओ समीर विश्नोई का ये तीसरा साल है। याने इलेक्शन में आईएएस तीन और काम एक ढेला का नहीं। क्योंकि, अब 2022 तक कोई मूवमेंट नहीं होने वाला। बहरहाल, चिप्स से बाहरी लोगों ने मिलकर कुछ छत्तीसगढ़ियां कर्मचारियों को बर्खास्त करवा दिया, सेनापति को इलेक्शन में बिठाने का मतलब यह तो नहीं है।

रीना कंगाले मुश्किल में

अजीत जोगी की जाति को फर्जी करार देने वाला साहसिक आदेश देकर चर्चा में आईं आईएएस रीना बाबा कंगाले मुश्किलों में घिर गईं हैं। इलेक्शन कमीशन ने उन्हें राज्य निर्वाचन पदाधिकारी बनाने के लिए सलेक्ट किया था। लेकिन, राज्य सरकार ने उनकी पोस्टिंग का आदेश निकाला नहीं। सरकार को उम्मीद थी कि रीना को एडिशनल तौर पर मंत्रालय में सिकरेट्री के रूप में काम करने के लिए आयोग इजाजत दे देगा। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने इलेक्शन कमीशन को पत्र भेज आग्रह किया था। लेकिन, आयोग इसे अन्यथा ले लिया। आयोग ने अनुमति देने की बजाए उल्टे सवाल कर दिया कि अभी तक उन्होंने निर्वाचन में ज्वाईन किया क्यों नहीं। आयोग का पत्र आते ही मंत्रालय में हड़कंप मचा….रीना को फौरन निर्वाचन में जाकर ज्वाईनिंग देनी पड़ी। आयोग ने चूकि एडिशनल पोस्टिंग के लिए अनुमति देने से फिलहाल मना कर दिया है। इसलिए, मंत्रालय में वाणिज्यिक कर सचिव की उनकी पोस्टिंग भी एक तरह से कहें तो स्वयमेव खतम समझी जानी चाहिए। क्योंकि, निर्वाचन में ज्वाईनिंग के बाद वे अब इलेक्शन कमीशन की इम्प्लाई हो गई हैं। सरकार से उन्हें वेतन जरूर मिलेगा लेकिन, छुट्टी देने से लेकर सीआर लिखने का काम अब आयोग करेगा। हालांकि, राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है, जब आयोग इतना सख्त हुआ है। इससे पहिले सभी सीईओ को आयोग एडिशनल पोस्टिंग की अनुमति दे चुका है। केके चक्रवर्ती, डा0 आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, निधि छिब्बर, सुब्रत साहू इनमें शामिल हैं। सुब्रत तो विधानसभा चुनाव के चार महीने पहिले तक प्रिंसिपल सिकरेट्री हेल्थ रहे। सुब्रत ने आयोग को मैनेज भी बढ़ियां किया था। तमाम शिकायतों के बाद भी दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव के समय वहां के कलेक्टर टीपी वर्मा को बचा लिया। सरकार के पास डा0 आलोक शुक्ला भी हैं। वे पांच साल इलेक्शन कमीशन में रहे हैं। इसमें आलोक और सुब्रत की मदद लेनी चाहिए।

ओएसएडी होम के मायने

राज्य सरकार ने दो दिन पहले खुफिया चीफ हिमांशु गुप्ता को गृह विभाग में ओएसडी बनाने का आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा क्योंकि भारत सरकार ने प्रायवेट सिक्यूरिटी एजेंसियों को लायसेंस देने का अधिकार गृह विभाग के ज्वाइंट सिकरेट्री लेवल के अफसर को अनिवार्य कर दिया है। मंत्रालय में सेटअप क्यों बढ़ाया जाए, इसलिए सरकार ने रास्ता निकालते हुए हिमांशु को ही ओएसडी बना दिया। वैसे, पहले खुफिया चीफ ही एजेंसियों को लायसेंस जारी करते थे। अब वे ओएसडी के रूप में यही काम करेंगे।

शादियों का महीना

इस महीने ब्यूरोक्रेसी में कई शादियां होंगी। 14 जनवरी को डायरेक्टर इंडस्ट्री अनिल टुटेजा के बेटे यश की शादी है और 15 को रिशेप्सन। इसके बाद 18 जनवरी को तीन शादियां है। पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी तथा लघु वनोपज संघ के एमडी संजय शुक्ला के बेटे, डायरेक्टर पंचायत जितेंद्र शुक्ला और आईएफएस जयसिंह महस्के की बेटी की इसी दिन शादी है। संजय शुक्ला और महस्के समधी बन रहे हैं। इसके बाद 2 फरवरी को एक बड़ी शादी और होगी। चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के बेटे गौरांग भी इस दिन परिणय सूत्र में बंधेंगे।

तीसरे दर्जे की सर्विस

वैसे तो ऑल इंडिया सर्विसेज में पहले नम्बर पर आईएएस, फिर आईपीएस और आईएफएस आते हैं। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों का प्रमोशन जिस तरह से पिछड़ता जा रहा है, आईपीएस अफसर कहने लगे हैं, अपनी सर्विस अब तीसरे नम्बर की हो गई है। आईएएस का समय चाहे जैसा भी चल रहा हो, प्रमोशन आदि का काम समय पर निबटवा लेते हैं। इस बार तो पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी ने आईएफएस का प्रमोशन और पोस्टिंग दोनों हो गई। आईएफएस में तो थोक में पदोन्नतियां हुई। आईपीएस ही जो लंबे समय से लटका हुआ है। डिमोशन हुए डीजी के लिए 11 दिसंबर को भारत सरकार से अनुमति आने के बाद प्रमोशन नहीं हो रहा तो फिर बाकी को आईजी, डीआईजी को कौन पूछता है।

आंखें पथराई जा रही

राज्य में सरकार बनने के बाद से बोर्ड और निगमों में पोस्टिंग को लेकर कांग्रेसी सीएम भूपेश बघेल पर टकटकी लगाए हुए हैं। और, सीएम हैं कि हर चुनाव के बाद टाईम एक्सटेंड कर देते हैं। विधानसभा चुनाव के बाद बोले लोकसभा के बाद। लोकसभा गुजरा तो नगरीय चुनाव के बाद। अब तो ये भी निबट गया। निगमों की कुर्सियों पर कब से रुमाल रखे कांग्रेसियों का दिल अब बैठा जा रहा है….पता नहीं, दाउ का दिल कब पसीजेगा?

मंडल का मोटिवेशन

ट्राईबल फेस्टिवल के आयोजन में वाहवाही बटोर चुके संस्कृति सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के सामने युवा महोत्सव का आयोजन भी चुनौती से कम नहीं है। सरकार की कोशिश है कि किसी मायने में युवा महोत्सव कमतर न हो। यही वजह है कि चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल भी लगातार इसकी समीक्षा कर रहे हैं। हाल ही में मंत्रालय में हुई एक मीटिंग में परदेशी के प्रेजेंटेशन के बाद मंडल ने पहले मैच में घुंआधार सेंचुरी ठोकने वाले दो क्रिकेटरों के बारे में अफसरों से सवाल कर दिया। कोई जवाब न मिलने पर मंडल बोले, दोनों बैट्समैन बाद के मैच में जीरो पर आउट हो गए….हाल ये है कि उन्हें आज आपलोगों की तरह कोई नहीं जानता। वे फिर सिद्धार्थ की ओर मुखातिब हुए, बोले….तुमने ट्राईबल महोत्सव में बढ़ियां काम किया है, इसका ये मतलब ये नहीं कि उन क्रिकेटरों की तरह ट्राईबल महोत्सव में सेंचुरी मारकर युवा महोत्सव में आउट हो जाओ….तुमको अब डबल सेंचुरी मारना है। मंडल इसी अंदाज में मीटिंग लेते हैं और मोटिवेट भी करते हैं अफसरों को।

जादू की छड़ी

राजधानी पुलिस के कुछ दिनों से लाटरी निकल आए हैं। क्राइम होते हैं मगर एक से दो दिन में आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ जा रहे हैं। चाहे पार्षद का चुनाव जीतने के लिए खुद की कार पर गोली चलाने का मामला हो या माना में युवती और उसके बच्चे को जला देने का मामला। राजधानी में दो बहनों पर अटैक के केस में भी पुलिस ने 24 घंटे में आरोपियों को पकड़ लिया। मंत्री कवासी लकमा को धमकी देने वाले मुजरिम भी तीसरे दिन शिमला में धरे गए। नारियल व्यापारी की गोली मारने का खुलासा भी मात्र 12 घंटे में। आलम यह है कि दूसरे जिलों के कप्तान अब पूछ रहे हैं रायपुर पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी आ गई है क्या। हालांकि, सिलतरा से उद्योगपति का अपहरण राजधानी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। इसे अगर पुलिस ने जल्द सुलझा लिया तो वास्तव में जादू की छड़ी वाली बात स्थापित हो जाएगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस जिले के कलेक्टर से सरकार नाराज है और उसकी कभी भी छुट्टी हो सकती है?
2. मंत्रालय में सचिव लेवल के ट्रांसफर क्या अब युवा महोत्सव के बाद होंगे?

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