माशूका का हाथ, हाथ में….

13 अक्टूबर 2019
भाजपा के भीतर आजकल पार्टी की स्थिति पर खूब तंज कसे जा रहे हैं। बीजेपी के लोग मान रहे हैं कि पार्टी की हालत दिलीप कुमार के मशहूर डॉयलाग….माशूका का हाथ, हाथ में आने पर हथियार छूट जाता है, सरीखी हो गई है। बात सही भी है। 15 साल सत्ता में रहने के बाद अब नेताओं में संघर्ष करने का माद्दा रहा नहीं। पार्टी सिरे से गायब है। दंतेवाड़ा में हारे ही चित्रकोट में भी पराजय तय दिख रहा है। इसी से समझा जा सकता है, बस्तर में चुनाव है और वहां से ताल्लुकात रखने वाले पार्टी के एक शीर्ष नेता सीएम हाउस का चक्कर लगा रहे हैं। जाहिर है, चित्रकोट इलेक्शन से पहिले ही भाजपा ने हथियार डाल दिया है। नगरीय निकाय में भी बीजेपी की स्थिति खास नहीं रहने वाली। वजह? कार्यकर्ताओं में उत्साह नदारत है। और, उनमें जोश जगाने के लिए पार्टी के पास कोई कार्यक्रम है और न ही कोई चेहरा।

तरकश का असर

15 सितंबर के तरकश स्तंभ में एक खबर थी, नौकरशाहों ने रायपुर, नया रायपुर के आवासों को बैंकों को ऑब्लाइज कर मोटी राशि में किराये में उठा दिया। हाउसिंग बोर्ड ने इस पर करीब दर्जन भर ब्यूरोक्रेट्स को नोटिस थमा दी है….हाउसिंग बोर्ड ने लिखा है कि आपने आवासीय उपयोग के लिए मकान खरीदा तो उसे कामर्सियल यूज के लिए कैसे दे दिया। अब अफसर परेशान हैं। और, हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर भीम सिंह भी। आखिर, लोग उन्हीं को फोन करेंगे न।

वीवीआईपी अफसर

छत्तीसगढ़ में 2012 बैच के आईएफएस अफसर हैं प्रणय मिश्रा। प्रणय रायबरेली से हैं। धरमजयगढ़ के डीएफओ रहते उन्होंने बलरामपुर का डीएफओ बनने के लिए ट्राय किया था। लेकिन, वन विभाग ने उन्हें हल्के में ले लिया। और, पिछले महीने बलरामपुर की बजाए उन्हें राजनांदगांव का डीएफओ बनाकर भेज दिया। मगर, प्रणय ठहरे रायबरेली वाले। रायबरेली का मतलब आप समझ सकते हैं। कहीं से फोन आया और अफसरों के हाथ-पांव फुल गए। मंत्रालय से तत्काल एक आर्डर निकाला गया। और, प्रणय 20 दिन से भी कम समय में राजनांदगांव से बलरामपुर के डीएफओ बन गए। बलरामपुपर याने यूपी का बॉर्डर। ठीक भी है। प्रणय का रायबरेली कनेक्शन बना रहेगा।

ये अपना छत्तीसगढ़िया…

अब छत्तीसढ़िया आईएफएस मनीष कश्यप की बात कर लें। मनीष बिलासपुर शहर में समाहित हो गए मंगला गांव के रहने वाले हैं। मंगला बोलें तो कुर्मी, काछी बहुल गांव। मनीष इन्हीं कुर्मी परिवार से आते हैं। खड़गपुर आईआईटी से सिविल में बीई किए हैं। कोरिया डीएफओ के रूप में वे जबर्दस्त काम कर रहे थे। लेकिन, पिछले महीने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने अचानक उन्हें उठाकर बिलासपुर के वन विस्तार मंडल में डंप कर दिया। एक ओर सरकार लोकल को अहमियत देने की बात कर रही, वहीं दूसरी ओर आईआईटीयन माटी पुत्र के साथ ऐसी नाइंसाफी?

भोपाल लॉबी 

राज्य बनने के 19 साल बाद मंत्रालय में भोपाल लॉबी का असर कुछ कम हुआ है। लेकिन, विधानसभा में अभी भी मजबूत पोजिशन में है। इसकी बानगी है एडिशनल सिकरेट्री शिवकुमार राय का एक्सटेंशन। शिवकुमार के रिटायरमेंट के पहिले से स्पीकर चरणदास महंत के सिकरेट्री दिनेश शर्मा का इस पद पर प्रमोशन तय माना जा रहा था। दिनेश स्पीकर के सिकरेट्री हैं। लेकिन, विधानसभा में उनका रैंक डिप्टी सिकरेट्री का है। शिवकुमार रिटायर होते तो दिनेश एडिशनल सिकरेट्री बन जाते। लेकिन, शिवकुमार को एक अक्टूबर से एक साल के लिए एक्सटेंशन मिल गया। और, दिनेश प्रमोशन की बाट जोहते रह गए। जांजगीर के रहने वाले दिनेश अब बिलासपुर के बाशिंदा हो गए हैं। याने विशुद्ध छत्तीसगढ़ियां। उपर से स्पीकर के सिकरेट्री। उसके बाद भी ये हालत!

एक बैच, एक विभाग

2006 बैच के भूवनेश यादव हेल्थ डिपार्टमेंट में पहिले से स्पेशल सिकरेट्री थे और अब उन्हीं के बैच के सीआर प्रसन्ना को स्पेशल सिकरेट्री हेल्थ बनाया गया है। याने एक बैच, एक विभाग। आमतौर पर ऐसा होता नहीं कि छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में एक बैच के आईएएस एक ही विभाग में रहे। इसमें मजेदार यह भी हुआ है कि प्रसन्ना मानव के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालेंगे और पशुओं के भी। उनके पास डायरेक्टर वेटनरी का तो चार्ज है ही, स्वस्थ्य विभाग एडिशनल मिल गया है। मंत्रालय में इस पर चुटकी ली जा रही…वेटनरी की दवाई कहीं गफलत में स्वास्थ्य विभाग को सप्लाई हो गया तो क्या होगा।

सिंहदेव का निशाना

भोपाल के नेशनल शूटिंग एकेडमी में आज सूबे के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव का अचूक निशाना देखकर लोग हतप्रभ रह गए। उन्होंने बंदूक से पोजिशन ली और टारगेट पर फायर कर दिया। इस पर लोग मजे लेने से नहीं चूके…. सियासत में उनका निशाना कैसे चूक गया। जाहिर है, छत्तीसगढ़ का सीएम डिसाइड होने के दौरान एक नाम टीएस का भी था। लेकिन, सियासी निशानेबाजी में भूपेश बघेल बाजी मार ले गए।

कलेक्टर का खेद

कांकेर कलेक्टर केएल चौहान ने पीडब्लूडी के ईई एपीसोड में खेद व्यक्त कर बड़ा दिल दिखाया। वरना, मामला बिगड़ता जा रहा था। कलेक्टर ने सीएम के कार्यक्रम में तैयारियों में लापरवाही के लिए ईई को थाने में बिठा दिया। ऐसा काम सूबे में तेज-तर्रार कलेक्टरी के लिए याद किए जाने वाले कलेक्टरों ने भी कभी नहीं किया। चलिये, ये अच्छा है। कलेक्टर ने मामला खतम कर दिया।

अंत में दो सवाल आपसे

1. रिटायर आईएएस हेमंत पहारे को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग किसकी सिफारिश पर मिली?
2. 31 अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे एसीएस केडीपी राव को क्या पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग मिलेगी?

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