कांकेर में सुपोषण अभियान से संवरी जिंदगी…प्रशासन की शानदार पहल से सुपोषण योजना के कारण ग्रामीण जीवन स्तर में आए क्रांतिकारी बदलाव…

कांकेर 27 जनवरी 2021।कांकेर जिले में सुपोषण अभियान को 15 महीने हो गए हैं। इसके यहां सकारात्मक परिणाम नजर आ रहे हैं। इस योजना की वजह से 5673 बच्चे कुपोषण से बाहर आए हैं। साथ ही इस दौरान 7308 महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर गंभीर एनीमिया के स्तर से ऊपर आ गया है। कुल मिलाकर यहां सुपोषण योजना शुरू होने के बाद लोगों की जिंदगी संवर गई है और एक बार फिर से वो खिलकर मुस्कुरा उठे हैं।

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छत्तीसगढ़ का उत्तर बस्तर कांकेर एक अति नक्सलप्रभावित जिला है जिसमें अधिकांश आबादी आदिवासी हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण4 के अनुसार, कांकेर जिले में 49.5% बच्चे उम्र के अनुपात मेंकम वजन के, 35.5% बच्चे बौनेपन (आयु के अनुपात में कम कद) से पीड़ित, और 15.5% निर्बलता (कद के अनुपात में कम वजन) से पीड़ित पाए गए थे और लगभग 67.5% महिलाएँ जिले में एनीमिक पाई गई थीं। क्षेत्र के लोगों की आहार की आदतों में प्रमुख रूप से चावल, दाल और सब्जियां शामिल हैं, किन्तु खाद्य विविधता और पोषक आहार का अभाव है। कृषि और श्रम आजीविका के मुख्य स्रोत हैं एवं अनिवार्य पोषक तत्वों की आवश्यकता वर्तमान में लिए जा रहे आहार द्वारा पूरी नहीं हो पाती। कुछ पारंपरिक प्रथाएं और अंधविश्वासभी आहार की आदतों से सम्बंधित व्यवहार परिवर्तन में बाधा काकार्य करते हैं। गर्भावस्था के दौरान या पश्चात स्तनपान नहीं कराने या पर्याप्त मात्र में भोजन नहीं करने से जुड़े अंधविश्वास काफी आम हैं। स्थानीय रूप से उत्पादित शराब की उपलब्धता के कारण, महिलाओं में भी शराब के सेवन की प्रथा है। उचित पोषण की कमी से न केवल स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह जीवन के अन्य पहलुओं को भी प्रभावित करता है। कुपोषित बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना कठिन लगता है, और ये उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं को विशेष रूप से प्रभावित करता है। समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए कुपोषण से निपटना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है। गंभीर अनीमिक महिलाओं और कुपोषित बच्चों को गर्म पके हुए पौष्टिक भोजन का प्रावधान उनकी तात्कालिक पोषण आवश्यकता को संबोधित करता है। इसके अलावा, कार्यक्रम पारंपरिक खाद्य प्रथाओं पर जागरूकता और ध्यान केंद्रित करके लोगों में व्यवहार परिवर्तन लाने पर केंद्रित है।

 

 

 

पांच पंचायतों में शुरु हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

जिला प्रशासन की ओर से 5 जुलाई 2019 को कांकेर किलकारी सुपोषण अभियान की शुरुआत पांच ग्राम पंचायतों में पायलट के रूप में की गई थी। ताकि जमीनी स्तर पर आने वाली कठिनाइयों का पता लगाया जा सके। इस परियोजना को 2 सितंबर 2019 को पूरे जिले में विस्तारित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अति, मध्यम कुपोषित एवं कम वजन वाले बच्चों और एनीमिक महिलाओं की संख्या को कम करके उन्हें गर्म पकापौष्टिक भोजन प्रदान करके जिले की समग्र पोषण स्थिति में सुधार करना। सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैला कर आहार की आदतों में बदलाव लाना और खाद्य विविधता सुनिश्चित करना। स्तनपान, हैंडवाशिंग, आयरन एवं फोलिक एसिड टैबलेट और अन्य महत्वपूर्ण उपचारों के संबंध में व्यवहार परिवर्तन करना था। शुरुआत में दो महीनों के लिए पांच पंचायतों में ये योजना चलाई गई थी, जिसका उद्देश्य 800 लाभार्थियों के मध्य समुदायिक भागीदारी एवं स्वीकृति देखना था।

 

सीएम के आदेश पर कलेक्टर ने गठित किया टास्क फोर्स
पायलट प्रोजेक्ट के बाद कार्यक्रम का अंतर विश्लेषण महिला और बाल विकास विभाग द्वारा किया गया। फिर परियोजना जिले के सभी 7 ब्लॉकों में लागू की गई। जिला स्तर पर जिला टास्क फोर्स समिति का गठन कलेक्टर की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें आठ विभाग शामिल थे। इसके साथ ही ब्लॉक स्तर और पंचायत स्तर समितियों का गठन क्रमशः उप-मंडल मजिस्ट्रेट और सरपंच की अध्यक्षता में किया गया।

एक लाख 9 हजार महिलाओं की एनीमिया टेस्ट
शून्य से 6 साल के कुपोषित बच्चे, गर्भवती महिलाओं और 15 से 49 साल की गंभीर एनीमिक महिलाओं को जिनका हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से कम है, ऐसे का चयन इस योजना का लाभ देने के लिए किया गया। बच्चों में मध्यम और गंभीर कुपोषण की पहचान करने के लिए, एक ग्राम स्तरीय अभियान,वजन त्योहार चलाया गया, और बच्चों का वजन मापा गया। इसी तरह एनीमिक महिलाओं की पहचान के लिए, एक विशेष कार्यक्रम, लालिमा- लोहा ले एनीमिया से की शुरुआत मई 2019 में हुई थी, जिसके तहत 1.9 लाख से अधिक महिलाओं का एनीमिया के लिए परीक्षण किया गया था एवं उनका इलाज किया जा रहा है।

 

 

ट्रेंड कार्यकर्ता दूर कर रहे कुपोषण
स्व सहायता समूह सदस्यों का चयन किया गया। जिन्हें गांव, आंगनवाड़ी स्तर पर भोजन के लिए राशन उपलब्ध कराना था। उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण आयोजित किए गए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा (मितानिन) कार्यकर्ता, एएनएम, सरपंच और सचिवों के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता और जनभावना को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रारंभिक अवधारणा और योजना के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों में कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से एनीमियाग्रस्त महिलाओं को गर्म पका भोजन देने की प्रक्रिया शुरू की गई।

549 किचन गार्डन भी बनाए गए
सुपोषण केंद्रों में कुपोषित बच्चों और गंभीर एनीमिक महिलाओं को गर्म पका भोजन परोसा जाता है। आपूर्ति श्रृंखला में 87 स्व सहायता समूहों को एकीकृत करके कच्चे माल का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित किया गया है। इन स्व सहायता समूहों को राशन की खरीद और आंगनवाड़ी केंद्रों में इसकी आपूर्ति के लिए जिम्मेदार बनाया गया। स्थानीय रूप से उपलब्ध पौष्टिक भोजन, जैसे महुआ लड्डू इत्यादिबच्चों को पूरक आहार के रूप में दिया जा रहा है। ये लड्डू प्रोटीन, आयरन के समृद्ध स्रोत हैं और पर्याप्त मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करते हैं। मुनगा अथवा सहजन, जिसे सुपर फूड के रूप में भी जाना जाता है, पोषण का एक समृद्ध स्रोत है। कार्यक्रम से जुड़े स्व सहायता समूह के सदस्य मुनगे के पत्तों का पाउडर सुपोषण केंद्रों को प्रदान कर रहे हैं, जिसे कुपोषण और एनीमिया से निपटने के लिए दिए जा रहे भोजन में जोड़ा जा रहा है। आहार में मुनगा पाउडर केसेवन की इस आदत को विकसित करने के लिए, गर्भवती महिलाओं, एनिमिक महिलाओं और कुपोषित बच्चों के परिवारों को पिछले 15 महीनों में 20,000 से अधिक सहजन पौधे वितरित किए गए हैं और वृक्षारोपण सुनिश्चित किया गया है। आंगनवाड़ियों और स्कूलों में किचन गार्डन को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक, दोनों स्तरों पर 549 किचन गार्डन सफलतापूर्वक स्थापित किए गए हैं। इस तरह विविधता के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

 

 

 

 

5 स्तनपान कक्षों का निर्माण
महिलाओं में स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने जिला और ब्लॉक कार्यालयों में 5 स्तनपान कक्षों का निर्माण किया है। ये कोने उपयुक्त सूचना, शिक्षा और संचार सामग्री से लैस हैं ताकि स्तन पान कराने वाली माताओं को शिक्षित किया जा सके और साथ ही साथ स्तनपान कराने की प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा सके। आंगनवाडी केंद्रों में बच्चों के अन्दर हाथ धोने की प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए 420 हैंडवाश इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। 2645 से अधिक पोषण वाटिका उद्यानिकी विभाग के साथ अभिसरण में बनाए गए हैं।

सुपोषण चौपाल में जागरुकता के कार्यक्रम
कुपोषित बच्चों के परिवारों में और गंभीर एनिमिक महिलाओं के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व सहायता समूह सदस्यों द्वारा घर घर जा कर मुलाकात की। बच्चे और माँ के अच्छे स्वास्थ्य की महत्ता को बढ़ावा देने के लिए पंचायत में सेल्फी ज़ोन की स्थापना की गई। पंचायत और आंगनवाड़ी केंद्र में आहार चार्ट की स्थापना की गई। आंगनवाड़ी केंद्र में सुपोषण चौपाल का आयोजन किया गया। साथ ही सुपोषण चौपाल में तीन प्रमुख विषय अन्नप्राशन, गोदभराई एवं स्वास्थ्य और पोषण दिवस को शामिल काय गया। सुपोषण चौपाल हर महीने के पहले और तीसरे गुरुवार को आयोजित की जाती है। दिन को एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है और लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ आनंद लेने के लिए आते हैं। समुदाय के सदस्यों के बीच जागरूकता पैदा करने और परिवार के पुरुष सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। हर पंचायत में नुक्कड-नाटक, सुपोषण-रथ, पोषण-मेला, सास बहू-सम्मलेन का आयोजन किया जाता है। हर दुकान, आंगनवाड़ी केंद्र और सार्वजनिक स्थान पर क्यूआर कोड की स्थापना की, ताकि लोग स्कैन कर सकें और पोषण संबंधी उपलब्ध वीडियो ऑनलाइन देख सकें। लाभार्थियों की दीवारों पर सुपोषणकार्ड छापे और चिपकाए जा रहे हैं। इसकार्ड में कुपोषित बच्चों की जानकारी, वजन का दिन और कुपोषण की श्रेणी का विवरण दिखाया गया है।

हर विभाग की जिम्मेदारी तय
महिला और बाल विकास विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों, गर्भवती और गंभीर रूप से एनेमिक महिलाओं को अच्छी गुणवत्ता वाले गर्म पके भोजन का प्रावधान किया जाता है। इसी तरह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की ओर से एनीमिक महिलाओं की पहचान कर उनका इलाज किया जाता है। लक्षित लाभार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच करना, गंभीर और मध्यम कुपोषित बच्चों को उचित उपचार एवं पोषण देना विभाग का काम है। इसी तरह उद्यानिकी विभाग गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को मोरिंगा संयंत्र का प्रावधान करता है। साथ ही रसोई और पोषण उद्यान की उपलब्धता तय करता है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की ओर से आंगनवाड़ी केंद्रों को राशन की आपूर्ति करने के लिए स्व सहायता समूहों द्वारा अभिसरण, महुआ लड्डू वितरण, मुनगा पाउडर की आपूर्ति की जाती है।

फैक्ट फाइल सुपोषण अभियान

क्रियान्वयन कुल 15 महीने
कुल कुपोषित बच्चे  14433
कुपोषण से बाहर आए  5673
एनिमिक महिलाओं की संख्या  8149
उठा हीमोग्लोबीन का स्तर  7308

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