7 महीने से नहीं मिला है इस महिला शिक्षिका को वेतन…. प्राचार्य की तानाशाही की शिकार शिक्षिका दाने दाने को हुई मोहताज …. शिक्षक नेता विवेक दुबे ने पूरे मामले की मुख्यमंत्री से की शिकायत

रायपुर 2 जुलाई 2021. राज्य में 16278 शिक्षाकर्मियों का 1 नवंबर 2020 की स्थिति में स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया है लेकिन आज भी एक ऐसी महिला शिक्षिका हैं जो अपने विभाग की लापरवाही का शिकार होकर न केवल संविलियन के लाभ से वंचित है बल्कि उन्हें पिछले 7 माह से भी अधिक समय से वेतन तक नहीं मिला है ऐसे समय में उनका गुजारा कैसे चल रहा होगा इसकी कल्पना सहज रूप से की जा सकती है । ऐसा नहीं है कि राज्य कार्यालय से आनन-फानन में इन प्रकरणों का निराकरण नहीं किया गया है लेकिन कई प्रकरण ऐसे हैं जिस पर मामला उच्च कार्यालय तक तो पहुंचा लेकिन वहां से भी त्वरित न्याय नहीं मिल सका और जब वहां से संशोधित आदेश जारी हुआ तो इस स्कूल में बैठे DDO प्राचार्य ने अड़ंगा लगा दिया अब ऐसे में मजबूरी में शिक्षक सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को ट्वीट करके अपनी समस्या बता रहे हैं । जिला बलौदा बाजार भाटापारा के कसडोल ब्लॉक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बया में पदस्थ व्याख्याता रीना ठाकुर के पूरे मामले में डीडीओ प्राचार्य की शिकायत सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक दुबे ने मुख्यमंत्री से की है दरअसल बीईओ कार्यालय से रीना ठाकुर का नाम संविलियन के लिए भेजते समय उनका नाम रीना उर्वशा अंकित किया गया था और संविलियन आदेश भी इसी नाम से जारी हुआ था जबकि वह पूर्व में ही शादी उपरांत अपना नाम कार्यालय से संशोधित करा चुकी हैं और सेवा पुस्तिका में भी रीना ठाकुर अंकित हो गया है यही नहीं कार्यालय से 2018 के बाद जो पत्राचार हुए हैं उसमें भी रीना ठाकुर ही अंकित है लेकिन संविलियन के लिए जानकारी भेजते समय बीईओ कार्यालय की लापरवाही का भुगतान महिला शिक्षिका को करना पड़ा , राजधानी रायपुर जाकर स्वयं शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक जीतेंद्र शुक्ला से मुलाकात की और उन्हें पूरा मामला बताया जिसके बाद वहां से भी संशोधित आदेश जारी हो गया लेकिन स्कूल के आहरण संवितरण अधिकारी आर आर जगत ने वेतन बिल को कोषालय में लगाया ही नहीं और महिला कर्मचारी को घुमाते रहे , उनका कहना है कि नियमितीकरण आदेश न होने के कारण बिल नहीं लगाया जा रहा है जबकि उच्च अधिकारी ऐसे सभी प्रकरणों का निराकरण पहले ही कर चुके हैं और अलग-अलग जिलों में संविलियन प्राप्त अप्रशिक्षित शिक्षकों को लगातार वेतन मिल रहा है ।
पूरे मामले में प्राचार्य दोषी, जानबूझकर महिला शिक्षिका को कर रहे हैं परेशान- विवेक दुबे
इस पूरे मामले में आहरण संवितरण अधिकारी यानी प्राचार्य पूरी तरह से दोषी है और वही जानबूझकर अब महिला कर्मचारी को परेशान कर रहे हैं , इसी प्रकार के प्रकरणों में संचालक डीपीआई ने जो निराकरण दिया था उससे संबंधित समस्त जानकारी उनको पहले ही मैंने खुद उपलब्ध करा दिया था इसके अतिरिक्त जिला कोषालय अधिकारी से भी मेरी बात हुई और उन्होंने भी कोषालय में बिल पास करने को निर्देशित किया है लेकिन प्राचार्य ने जानबूझकर बिल लगाया ही नहीं है और अनावश्यक रूप से महिला शिक्षिका को परेशान कर रहे हैं , हम इस मामले की शिकायत अब कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक कर रहे हैं ।
आर्थिक और मानसिक रूप से कर रहे हैं प्राचार्य परेशान – रीना ठाकुर
मुझे बीते 7 माह से वेतन नहीं मिला है जिसमें मेरी कोई भी गलती नहीं है कार्यालय की लापरवाही का खामियाजा मैं भुगत रही हूं बिना वेतन के मैं कैसे जीवन बसर कर रही हूं आप खुद समझ सकते हैं । मेरे मामले में लगातार दुबे सर ने प्रयास करके राज्य कार्यालय से भी संशोधित आदेश जारी करवा दिया उसके बाद भी प्राचार्य बिल जमा नहीं कर रहे हैं और मुझे जानबूझकर परेशान कर रहे हैं ।

