फेडरेशन में बर्खास्तगी पर बवाल : मनीष मिश्रा ने कहा “उन्हें जिलाध्यक्ष बर्खास्त कर ही नहीं सकते”…..जवाब में फेडरेशन ने कहा “बर्खास्तगी ही नहीं सदस्यता भी खत्म कर दी है, अब वापसी असंभव”…. मनीष मिश्रा के चुनाव जीतने से लेकर कार्यशैली तक का खोल दिया चिट्ठा

रायपुर 7 सितंबर 2021। सहायक शिक्षक फेडरेशन में हड़ताल, बर्खास्तगी और बवाल जारी है। आंदोलन में दागाबाजी…गद्दारी और घोखेबाजी जैसे गंभीर आरोपों से घिरे प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा को फेडरेशन की तरफ से बर्खास्त करने का ऐलान कर दिया गया है…लेकिन प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा इस बर्खास्तगी को स्वीकार करने को तैयार ही नहीं। मनीष मिश्रा ने रविवार को ही NPG से कहा था कि उन्हें बर्खास्त करने का अधिकार जिलाध्यक्षों को है ही नहीं….लेकिन कार्रवाई करने वाले संगठन के नेताओं में शामिल अजय गुप्ता का दावा है कि मनीष मिश्रा की बर्खास्तगी नियम के मुताबिक है और अब उनकी संगठन में वापसी नामुकीन है।
दरअसल 5 सितम्बर को वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों को लेकर संगठन ने पदयात्रा और प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन आंदोलन के ऐन पहले देर रात गुपचुप तरीके से प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा की अगुवाई में शिव मिश्रा, सुखनंदन यादव, कौशल अवस्थी, अश्वनी कुर्रे, रंजीत बनर्जी सहित प्रतिनिधि मंडल में शामिल लोगों ने वार्ता कर आंदोलन को खत्म कर दिया। आंदोलन को इस तरह से खत्म करने से बौखलाये शिक्षक बावजूद इसके रायपुर में जुटे और जमकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा पर गंभीर आरोप भी लगे और जमकर उनके खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगे। नाराज शिक्षकों ने प्रदर्शन स्थल पर इन सभी नेताओं की बर्खास्तगी की मांग की, जिसके बाद मनीष मिश्रा एंड टीम को जिलाध्यक्षों ने हस्ताक्षर कर फेडरेशन से बर्खास्त कर दिया।
हालांकि फेडरेशन की इस कार्रवाई को मनीष मिश्रा ने चैलेंज कर दिया और यहां तक कह दिया कि उन्हें बर्खास्त किया ही नहीं जा सकता, जिलाध्यक्ष उन्हें नहीं, वो भले जिलाध्यक्षों को बर्खास्त कर सकते हैं। इधर फेडरेशन की तरफ से इस मामले में मनीष मिश्रा के इस चैलेंज को जवाब दिया गयाहै। फेडरेशन की तरफ अजय गुप्ता ने कहा कि 5 सितम्बर को मनीष मिश्रा सहित एंड कंपनी कि बर्खास्तगी हुई वह भी सही है क्योंकि वह बर्खास्तगी सिर्फ उपस्थित 20 जिलाध्यक्षों ने नहीं किया बल्कि बस्तर,सरगुजा सहित सुदूर अंचलों से पहुंचे सहायक शिक्षकों की मांग थी। जिस पर मुहर भले प्रांतीय पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों ने लगाया पर आक्रोश और सहमति तमाम उपस्थित सहायक शिक्षकों की रही तभी यह सम्भव हो पाया।
अजय गुप्ता ने कहा कि रही बात, मनीष मिश्रा की चुनाव जीतने के बाद पदांकित होने कि तो वह भी गलत ही है। किसी भी पंजीकृत संगठन का आम वोटर उसका प्राथमिक सदस्य होता है, जो आम चुनाव के वक्त बना ही नहीं था। बल्कि मनीष मिश्रा और कौशल अवस्थी ने मिलकर मात्र जिलाध्यक्षों को वोट देने का नियम बनाया, जिसे लोगो ने नकारा तो बाद में दबाव पर समस्त जिला अध्यक्ष,ब्लाक अध्यक्ष,और सचिव सहित प्रांतीय संयोजको को वोट देने का अधिकार माना गया, जो फर्म सोसायटी के नियम विरूद्ध है। अजय गुप्ता ने कहा कि जब वोटर ही वैधानिक नहीं रहा तो चुनाव कैसे वैधानिक होगा। वह चुनाव सिर्फ जिलाध्यक्षों, ब्लाक अध्यक्षों और प्रांत संयोजकों की आपसी सहमति और संघ को एक चेहरा देने मात्र का प्रयास था, जिस पर मनीष मिश्रा खरा नहीं उतर पाए। उन्होंने अपने स्वेच्छाचारी कारगुज़ारी और अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए सहायक शिक्षकों को हथियार बनाया, ताकि राजनीतिक पहुंच बनाने में कामयाब हो सके। लेकिन 5 सितम्बर कि बर्खास्तगी के बाद अब वो कही के नहीं रहे।
आगे अजय गुप्ता ने बताया कि 5 सितम्बर को सुदूर अंचल से पहुंचे सहायक शिक्षकों ने मनीष मिश्रा को फोन किया और सभा स्थल में आकर स्थिति सपष्ट करने को कहा, लेकिन वो नहीं आये। जिसके परिणाम स्वरूप लोगों का गुस्सा फुट पड़ा और लोगों ने मनीष मिश्रा के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाये। यह कोई आम बैठक नहीं था, बल्कि प्रदेशभर के सहायक शिक्षकों कि महापंचायत थी जिसमें निर्णय लिया गया साथ ही पंजीयन कार्यालय के नियमों का भी पालन करते हुए प्रस्ताव पारित हुआ है जिसे जल्द ही पंजीयक कार्यालय रायपुर और तमाम प्रशासनिक कार्यालय को अवगत करा दिया जाएगा।
मनीष मिश्रा और उनके 4 सितम्बर के सहयोगी डेलिगेशन टीम में दूरदर्षिता का अभाव दिखा जिससे हमें कमेटी बनाने के परिणाम मिले ।आज तक शिक्षाकर्मियों के इतिहास में 1998 से लेकर 18 कमेटियां बनी है परिणाम शून्य ही मिला है। जब विश्वास ही नही रहा तो मनीष मिश्रा किस मुंह से अपने को प्रांताध्यक्ष कहलाना चाह रहा है समझ से परे है। अंत में उनकी बर्खास्तगी सही और वैधानिक है जिसका निर्णय आम सभा में हो चुका है जो अंतिम है। आगे सर्व ब्लॉक अध्यक्ष की उपस्थिति में प्रत्येक जिला में बैठक होगी फिर सारे जिलाध्य्क्ष रायपुर में बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे और महापंचायत में पारित प्रस्ताव के आधार पर 3 माह में विसंगति दूर याने व्याख्याता एलबी के समकक्ष शिक्षक एलबी को वेतन मिल रहा है। उसी तरह शिक्षक एलबी के समकक्ष सहायक शिक्षक एलबी को वेतन मिलना चाहिए। वेतन में जो खाई है, उस खाई को समानुपातिक की जाये। अन्यथा 90 दिन के बाद 6 दिसम्बर 2021 से प्रदेश के 1लाख 9 हजार सहायक शिक्षक अनिश्चित कालीन आंदोलन पर चले जायेंगे।।
