मुर्गा गिरफ्तार : 25 दिन से लॉकअप में बंद हैं दो मुर्गे….सटोरिया के साथ पकड़कर लाया गया था… सटोरियों को मिली जमानत, लेकिन मुर्गे….

नेल्लोर 6 फरवरी 2021। बुरे काम करने पर जेल जाने का नियम है। लेकिन अगर कोई बेगुनाह जेल चला जाए तो लोगों का दिल कचोट जाता है। हालांकि ऐसे कई केस हैं जब कई बेगुनाहों ने जेल काटी है। लेकिन अगर वो बेगुनाह इंसान न होकर मुर्गे हों तो मामले में दिलचस्पी जागनी जाहिर है। जी हां, तेलंगाना के नेल्लोर जिले में एक पुलिस स्टेशन की जेल में दो बेगुनाह मुर्गे पिछले पच्चीस दिनों से बंद हैं। मानवाधिकार का मामला भले ही न बन रहा हो लेकिन मासूमों की कैद पर सवाल तो उठता ही है । इसलिए जब मुर्गों के जेल में कैद होने की खबर फैली तो पूछताछ तो बनती ही थी।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि ये मुर्गे गुनहगार की तरह नहीं बल्कि बतौर सबूत जेल में बंद किए गए हैं।महीने मकर संक्रांति के मौके पर तेलंगाना में कुछ लोगों में मुर्गों की फाइट पर सट्टेबाजी की थी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर कुछ सट्टेबाजों को गिरफ्तार कर लिया, उनके पास ये दो मुर्गे भी थे, साथ में ये भी जेल लाए गए। अब सट्टेबाज तो जमानत पर रिहा होकर जेल से निकल गए लेकिन मुर्गों की जमानत भला कौन देता। इसलिए ये बेचारे मुर्गे गुनाह न होने के बावजूद जेल में कैद हैं।

अब ये रिहा कैसे होंगे,ये सवाल लोगों के दिलों में आ रहा होगा। चलिए अब पुलिस की बात भी सुन लेते हैं। चूंकि मुर्गे गुनहगार नही हैं लेकिन ये सबूत के तौर पर काम आ सकते हैं, इसलिए केस की सुनवाई पूरी होने तक इनकी खातिरदारी जेल में ही की जाएगी। अदालत का आदेश हैं चूंकि ये बेजुबान सबूत के तौर पर पेश होंगे इसलिए पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वो इनको सुरक्षा मुहैया करवाए और इनका दाना पानी करे। यानी कि जब तक ये केस अदालत में चलेगा, ये मुर्गे जेल का दाना पानी खाएंगे। सुनवाई के दौरान इन्हें सबूत के तौर पर अदालत में पेश किया जाएगा।

इसके बाद इनकी रिहाई तो हो जाएगी लेकिन रिहाई का सबसे बड़ा पेंच ये है कि इनकी जमानत नहीं होगी। चूंकि इनका कोई मालिक नहीं है, इसलिए इनकी बोली लगाई जाएगी। जो सबसे ज्यादा पैसों की बोली लगाएगा, ये मुर्गे उसके सुपर्द कर दिए जाएंगे। हालांकि ये अलग बात है कि इनका नया मालिक इनके साथ क्या करता है, ये मालिक पर ही निर्भर करता है। इतना तो तय है कि फिर से इन पर सट्टा नहीं लगेगा, ऐसे हालात में ये किसी की पार्टी का जरिया बनेंगे, ऐसी संभावना को ज्यादा बल मिलता है।

पिछले ऐसी ही एक खबर पाकिस्तान से आई थी। मीरपुर इलाके में अदालत के आदेश के बाद पांच मुर्गों को पांच महीने की जेल काटने के बाज रिहा किया गया था। यहां भी मुर्गों की लड़ाई का मामला था। मुर्गों की लड़ाई पर कुछ लोगों ने सट्टा लगाया था जिसके दौरान पुलिस ने रेड मारकर सट्टेबाजों समेत मुर्गों को पकड़ लिया था। सट्टेबाज तो रिहा हो गए लेकिन पांच महीने तक मुर्गे जेल का दाना पानी खाते रहे।आखिर में मीरपुर मथेलो अदालत ने मुर्गों की रिहाई का ऑर्डर दिया था।

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